/उत्‍तराखण्‍ड कांग्रेस पर संकट के बादल…

उत्‍तराखण्‍ड कांग्रेस पर संकट के बादल…

उत्‍तराखण्‍ड के मंत्रीगणों  का निगमों, बोर्डो पर कब्‍जा, कार्यकर्ताओं व प्रदेश प्रभारी ने जतायी नाराजगी

-देहरादून से चन्‍द्रशेखर जोशी||

उत्‍तराखण्‍ड के मंत्रीगणों तथा विधायकों ने निगमों तथा बोर्डो के अध्‍यक्षों के पद भी कब्‍जा लिये हैं, जिससे उत्‍तराखण्‍ड में कांग्रेस के आम कार्यकर्ता कांग्रेस से विद्रोह की स्‍थिति में आ गये है, कांग्रेस के लिए विकट स्‍थिति खडी हो गयी है, आम जन तथा कांग्रेस के आम कार्यकर्ता में विद्रोह व असंतोष बढ्ता जा रहा है, इसको महसूस कर उत्‍तराखण्‍ड के प्रदेश प्रभारी चौ0 वीरेन्‍द्र सिंह ने साफ कहा है कि निगमों और बोर्डो के पद मंत्रियों के लिए नहीं है, उन्‍हें पार्टी के अन्‍य लोगों को दिया जाना चाहिए। उत्‍तराखण्‍ड में चौ0 वीरेन्‍द्र सिंह द्वारा दिये गये निर्देश पर अमल नहीं हुआ तो उत्‍तराखण्‍ड से कांग्रेस का सफाया होना तय माना जा रहा है, जबकि आमजन को लगता है कि कांग्रेस के मंत्रीगणों को इन सबसे कोई लेना देना नहीं है, यह मंत्रीगण पहले मुख्‍यमंत्री बनने के लिए भिडे, फिर मलाईदार विभागों के लिए भिडे, फिर निगम व बोर्ड का अध्‍यक्ष बनने के लिए भिडे, इस तरह जनता में साफ संदेश जा रहा है कि आम जन हित का इनसे कोई सरोकार नहीं रह गया है, शायद तभी कांग्रेस संगठन का कार्यकर्ता भी अपने मंत्रिगणों से सबक लेकर दायित्‍व रूपी लालबत्‍ती को प्रमुखता दे रहा है। जिससे कांग्रेस का हाथ आम आदमी का साथ- का नारा उत्‍तराखण्‍ड में बेसबक कर दिया है इन राजनेताओं ने। वहीं इन मंत्रिगणों ने एक-एक, दो-दो करके अपने खास लोगों को भी लालबत्ती दिलवा दी। जिससे आम कार्यकर्ताओं में रोष बढता जा रहा है। नेताओं की इस आत्‍मघाती नीति का खामियाजा कांग्रेस को उठाना पडेगा, ऐसी जन चर्चा है। इन सबके बीच उत्‍तराखण्‍ड में कांग्रेस सरकार विकास की अवधारणा को ही भूला बैठी है।

जबकि लखनऊ में कांग्रेस के पूर्व मुख्‍यमंत्री पं0 नारायण दत्‍त तिवारी ने कहा कि फरसा कंधे पर है और गले में माला, यह शुभ हो रहा है, लोग पूछेगें कि फरसा किसके लिए है, मेरा यही जवाब है कि जो विकास नहीं चाहते,उनके लिए है, वहीं उन्‍होंने दोहराया कि वक्‍त आने दे, बता देगें तुझे ए आसमां, हम अभी से क्‍या बताएं, क्‍या हमारे दिल में है।

ज्ञात हो कि विकास पुरूष के नाम से मशहूर एनडी तिवारी उत्‍तराखण्‍ड की वर्तमान स्‍थिति से खुश नही है, उत्‍तराखण्‍ड के मुख्‍यमंत्री की विधानसभा सितारगंज की जनता एनडी तिवारी के पास आकर विकास की गुहार लगा रही है, जिस पर श्री तिवारी अधिकारियों से अपने रसूख से जनता के काम करने का निर्देश दे रहे हैं, इस स्‍थिति को वह ठीक नहीं मान रहे हैं, और बहुगुणा के काम करने के ढंग से नाखुश है।

वहीं दूसरी ओर  उत्‍तराखण्‍ड में विकास की गति धीमी पड गयी है। कई क्षेत्रों में आई गिरावट के लिए मुख्‍यमंत्री का खराब प्रदर्शन को मुख्‍य बजह के तौर पर देखा जा रहा है। आर्थिक वृद्धि उम्‍मीद से भी कम हो गयी है, उत्‍तराखण्‍ड में विकास के लिए हर प्रकार की व्‍यावसायिक गतिविधियां धीमी पड गयी है, जिससे आर्थिक स्‍थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है, इस स्‍थिति से उबरने के लिए मुख्‍यमंत्री के प्रयास नाकाम साबित होते जा रहे हैं।

शायद इस को स्‍वयं मुख्‍यमंत्री ने भी महसूस किया है, शायद तभी उन्‍होंने कहा भी है कि  युवाओं में निराशा से राज्य के विकास पर विपरीत प्रभाव पडता है। राज्य निर्माण को १२ वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान राज्य में विकास हुआ है परंतु इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता है। काफी काम अभी किया जाना है। विकास का लाभ राज्य के सभी क्षेत्रों में समान रूप से नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार समान और समावेशी विकास की पक्षधर है। सीमावर्ती व दूरवर्ती क्षेत्रों के पिछडे रह जाने से पलायन हो रहा है जो कि सामरिक दृष्टि से भी देश की सुरक्षा के लिए संवेदनशील है। सरकार विकास की किरणें सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए तत्पर है।

विकास के नाम पर एक छोटा सा उदाहरण देकर ही राज्य की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजधानी की सडकों पर रात्रि के समय आवागमन असंभव हो जाता है जबकि निकटवर्ती क्षेत्रों में हालात नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं जहां सरकार और प्रशासन से मदद मिलने की कोई उम्मीद ही नहीं होती है। अंधियारे में डूबी राजधानी की सडकों को देखकर यही कहा जाता है कि अंधेर नगरी, चौपट राजा। वहीं दूसरी ओर उत्‍तराखण्‍ड में दलित वर्ग कांग्रेस से मोह भंग की स्‍थिति में हैं, उत्तराखंड अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी फैडरेशन से जुडे हुए कर्मचारियों ने पदोन्नति में आरक्षण जारी रखने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर आंदोलनरत है।

वहीं इन सबसे हटकर कांग्रेस संगठन सत्‍ता में भागीदारी के लिए अलग से दांव पेच कस रहा है जबकि कांग्रेस के मंत्रीगण सारी मलाई खुद ही चाट लेना चाहते हैं, विभागों के मंत्री के अलावा निगमों के मुखिया पद पर भी स्‍वयं कब्‍जा जमाना चाहते हैं, कुल मिलाकर ऐसी दबाव की स्‍थिति बनती जा रही है कि लोकसभा चुनाव के आते आते कांग्रेस के प्रति जनता में असंतोष बढता जा रहा है, इस बात को स्‍वयं कांग्रेस के उत्‍तराखण्‍ड प्रभारी ने महसूस करते हुए कहा कि वह लाल बत्तियों के पक्ष में नहीं हैं। पार्टी की पिछली सरकार में 200 लाल बत्तियां बांटी गई थीं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि इनमें से अधिकांश पार्टी की हार के कारण बने। चौ0 वीरेन्‍द्र सिंह ने यह भी कहा कि निगमों और बोर्डो के पद मंत्रियों के लिए नहीं है, उनके बयान पर हंगामा हो गया। हंगामा बढ़ता देख खिन्‍न होकर चौधरी वीरेन्‍द्र सिंह बीच में ही बैठक छोड़कर निकल गए।

ज्ञात हो कि उत्‍तराखण्‍ड की पूर्व कांग्रेस सरकार लालबत्‍ती अधिक संख्‍या में बंटने के कारण ही चुनाव हार गयी थी, पूर्व में जिन लोगों को लाल बत्तियां दी गईं उनमें से अधिकांश चुनाव में स्‍वयं खडें हो गये तथा कांग्रेस पार्टी को हराने का काम किया।

अब उत्‍तराखण्‍ड में स्थानीय निकाय चुनाव, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव व लोकसभा चुनावों को सन्‍निकट देखकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक बुलायी गयी परन्‍तु कांग्रेस कार्यकर्ता पहले लालबत्‍ती पाना चाह रहे हैं, जिससे दायित्‍व रूपी लालबत्‍ती आवंटन को लेकर कांग्रेस में कोहराम है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा 13 दिसम्‍बर को  सरकार के आठ माह का रिपोर्ट कार्ड के साथ लालबत्‍ती बांटने के लिए हैं तैयार, जबकि सूत्र कह रहे हैं कि उत्‍तराखण्‍ड  में कांग्रेस के मिशन 2013 व 2014  को बाधित करेगी लालबत्ती की रार । लालबत्ती आवंटन के बाद पार्टी की मुश्किलें आसान होने के बजाए और बढ़ना तय है।

लालबत्ती पाने को लेकर कांग्रेस में अंदरखाने मचे घमासान के कारण नव02012 अंतिम दिन लोकसभा चुनाव 2014 की तैयारी के सिलसिले में बुलाई गई प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक निरर्थक साबित हुई। हंगामा देख प्रांतीय प्रभारी बैठक छोड़कर चले गये। कांग्रेस पार्टी की बैठक लाल बत्तियों तक सिमट गई। संगठन के कुछ पदाधिकारियों ने लाल बत्तियों पर ठोस फैसला लिए जाने की वजह से ही बैठक में मुख्यंमत्री विजय बहुगुणा, प्रांतीय प्रभारी चौधरी वीरेंद्र सिंह व सह प्रभारी अनीस अहमद को भी बुलाया था। बैठक में द्वाराहाट के विधायक मदन बिष्ट ने प्रस्ताव रखा कि विधायकों को लाल बत्तियों न दी जाएं क्योंकि पार्टी ने उन्हें टिकट देकर सम्मानित किया है। लाल बत्तियों पर कार्यकर्ताओं का अधिकार है। बिष्ट के बयान पर कई विधायकों ने एतराज किया।  प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व काबीना मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि कार्यकर्ताओं से बेहतर काम लेने के लिए उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए। दिसम्बर या जनवरी तक कार्यकर्ताओं को दायित्व (लाल बत्ती) सौंपे जाने चाहिए। इसी क्रम में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि 13 दिसम्बर को पार्टी के प्रमुख सौ लोगों का देहरादून में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें सरकार के आठ महीने का कामकाज व उपलब्धियों का लेखा- जोखा रखा जाएगा। इसके अलावा सरकार हाईकमान के निर्देश पर विधायकों व कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंप रही है।  प्रांतीय प्रभारी चौ0 वीरेंद्र ने कहा कि वह लाल बत्तियों के पक्ष में नहीं हैं। पार्टी की पिछली सरकार में 200 लाल बत्तियां बांटी गई थीं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि इनमें से अधिकांश पार्टी की हार के कारण बने।  चौ वीरेंद्र सिंह ने पिछली सरकारों का हवाला देते हुए लालबत्ती की बंदरबाट पर अंकुश के संकेत दिए। इनकी संख्या 40 से 50 तक सीमित हो सकती है। ये सरकारी ओहदे वरिष्ठ विधायकों और पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दिए जाएंगे। लालबत्ती बड़ी तादाद में नहीं बांटी जाएंगी। यह संख्या सीमित रहेगी। विधानसभा सत्रावसान के बाद इन्हें वितरित किया जाएगा। वरिष्ठ विधायकों के साथ ऐसे कार्यकर्ताओं को इससे नवाजा जाएगा, जिनसे पार्टी को मजबूती मिल रही हो। ज्यादा लालबत्ती बांटने का खामियाजा न भुगतना पड़े, यह ख्याल रखा जाएगा। इसमें अनुशासनहीनता सहन नहीं होगी। लालबत्ती मांगने वालों को संगठन में सक्रिय काम करने का न्योता दिया गया तो उन्होंने रुचि नहीं दिखाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य ने संगठन में सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं को लालबत्ती देने पर जोर दिया। प्रदेश सरकार और कांग्रेस संगठन ने तय किया है कि 13 दिसंबर को विधानसभा सत्रावसान के बाद पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं की बैठक होगी। बैठक में एफडीआइ पर विपक्ष को करारा जवाब देने को बुद्धिजीवियों को भी बुलाया जाएगा। इस मौके पर प्रदेश सरकार की उपलब्धियों पर भी चर्चा होगी। परन्‍तु 30 नव02012 को कांग्रेस भवन में प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि सम्मेलन का जो हश्र हुआ, आगे प्रस्तावित किए जाने वाले कार्यक्रमों पर भी इसका असर दिखने से इंकार नहीं किया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि सम्मेलन के बहाने पार्टी ने मिशन 2014 की तैयारी के मंसूबे बांधे, लेकिन लालबत्ती पाने की महत्वाकांक्षा ने अंदरूनी हालात जाहिर कर दिए। सरकार बचाये रखने के लिए विधायकों का असंतोष थामने की चुनौती है तो  मिशन 2013,2014 के लिए कांग्रेस संगठन के कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की चुनौती हैं सामने। ऐसे में उत्‍तराखण्‍ड में कांग्रेस के सामने है नाजुक स्‍थिति।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.