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IIMC में घपले पर घपला, प्रवेश परीक्षा में फेल छात्र को RTI के बाद मिला दाखिला

By   /  August 4, 2011  /  1 Comment

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देश के सबले प्रतिष्ठित मीडिया स्कूल भारतीय जनसंचार संस्थान यानि आईआईएमसी में हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा कोर्स में होने वाले दाखिले सवालों के घेरे में आ गए हैं। यहां एक छात्र को प्रवेश परीक्षा में अच्छे अंक लाने के बावजूद साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया। जब उसने सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो जवाब मिलने से पहले उसे साक्षात्कार के लिए बुला लिया गया और बाद में उसे दाखिला भी दे दिया गया। संस्थान इस छात्र के दाखिले को लेकर सफाई दे रहा है कि कंप्यूटर की गलती से छात्र को साक्षात्कार में नहीं बुलाया गया।

आईआईएमसी: सर्वश्रेष्ठ संस्थान..?

 

संस्थान में हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा कोर्स में दाखिले के लिए दो माह पहले प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई थी। जून में लिखित परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया गया। इस रिजल्ट में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हुए एक मेधावी छात्र सौरभ शर्मा जिसका रोल नम्बर JA 10081 है को अनुत्तीर्ण कर दिया गया।

लेकिन सौरभ को अपनी  काबिलियत पर भरोसा था। जब उसने देखा कि पेपर अच्छे होने के बावजूद उसे नहीं नहीं बुलाया गया तो उसने  अपनी प्रतिभा को दबाने वालों को मजा चखाने की सोची। सौरभ ने सूचना अधिकार के तहत आईआईएमसी से अपने बारे में जानकारी मांगी। बस फिर क्या था.. आईआईएमसी में हड़कंप मच गया। प्रशासन ने आरटीआई के तहत जानकारी देने से पहले ही उसे साक्षात्कार में बुला लिया और आनन-फानन में उसे दाखिला भी मिल गया। उसे 85 में 63 अंक लिखित परीक्षा में आए थे ।

खास बात यह है कि परीक्षा में इतने अंक दाखिले की मेरिट में जगह पाने के लिए पर्याप्त होते हैं। सूत्रों के मुताबिक छात्र को लिखित परीक्षा में इतने अंक हासिल हुए थे कि वह साक्षात्कार में आने का हकदार तो था ही, अगर साक्षात्कार में कोई अंक नहीं मिलता तब भी उसे दाखिला मिल जाता। अब संस्थान इस गलती को दूर कर अपनी प्रतिष्ठा बचाने की कवायद मे जुटा है। दाखिले प्रक्रिया में कहां और क्यों गलती हुई इसकी जांच की जा रही है।

आनंद प्रधान: नो कमेंट्स..!

दाखिले की प्रक्रिया में इस तरह की अनियमितता को लेकर छात्र तरह तरह से सवाल ख़ड़े कर रहे हैं। फेसबुक पर संस्थान में दाखिले में पारदर्शिता नहीं होने को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बारे में जब हिन्दी पत्रकारिता कोर्स के प्रभारी आनंद प्रधान से बात की गई तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। संस्थान में ओएसडी जयदीप भटनागर को बार बार फोन करने के बाद भी जवाब नहीं आया। हालांकि सूत्र इसे कंप्यूटर की गलती मान रहे हैं।

(पोस्ट नई दुनिया में छपी खबर तथा ब्यूरो रिपोर्ट पर आधारित)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. Kundan says:

    Suno Bhaiya Itna Jo uchal rahe ho kya saboot he aap logo ke paas jab saboot paise karne ki bari ayegi to gale se pani neche nahi uterega samjhe aur dusro ki khabro ko cut copy paste kar kya dikhana chahte ho anoop varma ji Jeb Khali ho to kabhi dukan ki taraf aankh uthakar nahin dekhna chaiye samjhiye aur vichar kijiye fhir boliyega iske jawab me

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