/तराजू में मेंढ़क तोलते विजय बहुगुणा…

तराजू में मेंढ़क तोलते विजय बहुगुणा…

देहरादून से नारायण परगाई||

देहरादून, भले ही गैरसैंण में कैबिनेट बैठक कर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे पहाड़ के हिमायती हैं, लेकिन मुश्किलें हैं कि उन्हें छोड़ने का नाम ही नहीं लेती। चर्चाओं के अनुसार वर्तमान में जहां सतपाल महाराज जैसे दिग्गज नेता मुख्यमंत्री की कार्यशैली से नाखुश बताए जा रहे हैं, वहीं बीते दिन विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने अपनी ही सरकार पर मात्र 30 फीसदी बजट खर्च करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि पहाड़ में हताशा और निराशा का माहौल है, अब सरकार में कई विधायक और मंत्री भी मुख्यमंत्री की कार्यशैली से खासे नाराज बताए जा रहे हैं।

राज्य की सत्ता की बागडोर संभालने के बाद से लेकर अब तक बहुगुणा की राह में कांटे कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं, पार्टी के विधायक हैं कि जो तराजू के मेंढक की तरह कभी बहुगुणा खेमें में शामिल हो जाते हैं, तो कभी उनसे नाराज होकर बाहर छिटक जाते हैं। मुख्यमंत्री के साथ साये की तरह चलने वाले तीन विधायकों के मुख्यमंत्री द्वारा पर कतरे जाने के बाद वर्तमान में वे उनसे खासे नाराज नजर आ रहे हैं। सुपर चीफ मिनिस्टर का लबादा ओढे मुख्यमंत्री के पड़ोसी एक विधायक में भी आज-कल वो हनक नहीं दिखाई दे रही है, जो कभी दिखाई देती थी, वहीं मुख्यमंत्री दरबार में रोज हाजरी बजाने वाले दो विधायकों को तो यह कहकर धमका दिया गया कि क्या उन्होंने मुख्यमंत्री आवास को नगर निगम का कार्यालय समझ रखा है। इसके बाद से इन विधायकों ने भी दूरी बनानी शुरू कर दी है, वहीं काशीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा क्षेत्र के सांसद के.सी. सिंह बाबा तथा कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल को खासी तरजीह देने के बाद राज्य के एक मंत्री को अकेला छोड़ने के चलते उनकी भी मुख्यमंत्री से दूरियां बढ़ चुकी हैं। यहां यह भी गौरतलब हो कि इस कार्यक्रम में इस घटनाचक्र के बाद स्वास्थ्य मंत्रीे कार्यक्रम बीच में ही छोड़ वापस लौट आए। इतना ही नहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पौड़ी क्षेत्र के लोकसभा सदस्य व पूर्व रेल राज्य मंत्री सतपाल महाराज भी बहुगुणा से इसलिए नाराज हैं कि उन्होंने सारी शक्ति अपने पास रखी हुई है, यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत राज्य की पर्यटन मंत्री हैं।
वहीं बहुगुणा भी अपनी राजनैतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में लगे हुए हैं, इसका एक ताजा उदाहरण यह है कि मुख्यमंत्री से नाराज चल रहे सतपाल महाराज गुट के विधायकों को मुख्यमंत्री ने अपने खेमें में जोड़ना शुरू कर दिया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष पद पर सतपाल महाराज के करीबी रहे गणेश गोदियाल की ताजपोशी के बाद बुधवार से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र से पहले महाराज खेमें के ही बद्रीनाथ विधायक अनुसुया प्रसाद मैखुरी को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाने की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। राजनीति में शह और मात के इस खेल में उंट किस करवट बैठेगा यह तो बताया नहीं जा सकता, लेकिन राजनीतिक क्षत्रप अपनी शक्तियां बढ़ाने पर जुटे हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.