/धर्मशाला: दुनियां का सबसे खूबसूरत क्रिकेट मैदान वनडे मैच करवाने के लिए तैयार

धर्मशाला: दुनियां का सबसे खूबसूरत क्रिकेट मैदान वनडे मैच करवाने के लिए तैयार

 -धर्मशाला से अरविन्द शर्मा||

धर्मशाला का सुंदर क्रिकेट मैदान, जिसे  हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम के रूप में जाना जाता है, पहले से ही इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) खेल के तीन सबसे सफल सीजन की मेजबानी के बाद, ठोस प्रतिष्ठा अर्जित कर चुका है. इसी मैदान पर 27 जनवरी, 2013 को पहली बार एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच खेला जायेगा. ये मैच  भारत और  इंग्लैंड के बीच खेला जायेगा. 

धर्मशाला में यह मैच पहले  दिन – रात के रूप में निर्धारित किया गया था, लेकिन उस समय की अपेक्षित ठंड को देखते हुए अब यह मैच सुबह 9:00 पर शुरू करने का फैसला लिया गया है ताकि दूधिया रोशनी में हड्डी कंपकपाने वाली शाम से बचा जा सके.  इसके अतिरिक्त दिन का खेल के साथ इस क्षेत्र की सुंदरता की झलक का आनन्द सारा संसार ले सके. धर्मशाला का यह मैदान बर्फानी  पहाड़ों की पृष्ठभूमि और  तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के आसपास आधारित संस्कृति के साथ का अद्भुत नमूना है, मैदान  चोटी की ठण्ड में दर्शकों  या खिलाडियों के लिए भी एक अनूठा अनुभव होगा.

समुद्र तल से 1962 मीटर (3800 फीट) की ऊंचाई पर यह क्रिकेट मैदान स्थित है. जो  कई दक्षिण अफ़्रीकी अंतरराष्ट्रीय मैदानों की तुलना में कम है, लेकिन सौंदर्य में यह सबसे बेहतरीन वोट प्राप्त कर चुका है खूब सूरती का आलम देखिये कि ये मैदान  जनवरी 2012 में बर्फ से पूरी तरह ढक गया था. अधिक्टर जनता को इस प्रस्तावित एक दिवसीय में भी ऐसी ही  स्थिति आने की  आशंका कर रहे हैं.

अनुराग ठाकुर, जो हिमाचल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष है ने कहा कि ‘मुझे लगता है मैच के दौरान  नीले आकाश और धूप वाला मौसम होगा, हम इस पल के लिए इंतजार कर रहे है. जब से हमने  2002 में इस जमीन पर स्टेडियम का निर्माण किया था, हम इस अन्तर राष्ट्रीय घडी का इंतजार कर रहे है और हम अपने दर्शकों के लिए एक गर्मजोशी वाले स्वागत का वादा भी करते हैं. यह मौसम भारतीयों के लिए ठंडा हो सकता है, लेकिन इंग्लैंड की टीम के लिए ठीक होगा.’ धर्मशाला में सुविधाओं के बारे में पूछने पर ब्लोए कि ‘गत वर्ष यहाँ आये आईसीसी के रेफरी एवं पूर्व ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज डेविड बून द्वारा स्टेडियम को अन्तर राष्ट्रीय  मैचों की  मंजूरी दिए जाने के बाद ही स्थल के लिए झंडी दे दी गयी है.’ उन्होंने आगे कहा कि मैं नाम लेना  नहीं चाहता, लेकिन वहाँ भारत में कई क्रिकेट केन्द्र ऐसे भी हैं जहाँ होटल  या हवाई अड्डे के रूप में उपलब्ध सुविधाओं का नामो निशाँ भी नहीं है. लेकिन धर्मशाला में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और हम अंतरराष्ट्रीय टीमों की मेजबानी के लिए तैयार हैं.”

इस साल इंग्लैंड के सांसदों की टीम भारतीय सांसदों के खिलाफ एक वनडे खेलने धर्मशाला आई थी . मैच के बाद  कप्तान  मैथ्यू हेनकाक  ने कहा था  “यह एक असाधारण जगह  है और शायद दुनिया में किसी भी क्रिकेट स्टेडियम में सबसे सुंदर स्थानों में से एक है.” “हम अपना मैच हार गए है, लेकिन मुझे आशा है कि 2013 में इंग्लैंड की क्रिकेट टीम वनडे में बेहतर परिणाम दिखायेगी.”

अनुराग ठाकुर (भाजपा सांसद और हिमाचल के मुख्यमंत्री के बेटे) के लिए इंग्लैंड का यह मैच महत्वाकांक्षाओं की शुरुआत है. “मैं वास्तव में यहाँ  एक  दिवसीय के बाद ,पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच की मेजबानी करने का सपना देख रहा हूँ.”

जब पिच और मैदान के बारे में पूछा तो पिच क्यूरेटर सुनील चौहान ने कहा, “एहन की परंपरा तेज़ गति विकेट रही है. यहाँ जो भी बल्लेबाजों जो सीधे बल्ले से खेलेगा खूब रन बटोरेगा. शैली और शक्ति के साथ गेंदबाजी करने वाले  को भी आचे प्रिन्नाम मिलेंगे. आउटफील्ड के लिए नया घास लगाया गया है , जो  अछे  स्कोर के साथ प्रशंसकों के लिए उनके पैसे का मूल्य भी देगा , “उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेल क्षेत्र प्रतिबंधित किया गया  है ताकि दोनों टीमो के लिए बेहतर मैदान दिया जा सके  .

इस मैदान में लगभग 20,000 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था  है. मैच के लिए इंग्लैण्ड की टीम इस प्रकार है :-
एलेस्टर कुक, जोंनि  बैर्स्तोव, इयान बेल, टिम ब्रेसनन, डैनी ब्रिग्स, जेड द्रंबीच , स्टीवन फिन,  क्रेगकेश्वित्त्र, स्टुअर्ट मेकर , इयोन मोर्गन, समित पटेल, केविन पीटरसन जेम्स त्रेंद्वेल्ल  जोनाथन ट्रॉट, जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.