Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

लिंग जाँच के विरुद्ध पैदल मार्च

By   /  December 6, 2012  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

उदयपुर. घटते लिंगानुपात एवं लिंग जाँच निर्धारण के विरुद्ध शहर के युवा एक हो रहे है. बेटियों को बचाने के लिये पहल करते हुए युवाओं ने अगले रविवार शाम शहर मे पैदल मार्च का आयोजन किया है. फतहसागर की पाल से शुरू होकर यह पैदल मार्च देवाली स्थित “महेशाश्रम” जाकर संपन्न होगा. महेशाश्रम मे समाज से ठुकराई गयी बच्चियों को युवाजन अपनी ओर से उपहार एवं अन्य उपयोगी सामग्री प्रदान करेंगे. शहर के युवाओं ने इसके लिये “VOICE” (voluntary organisation for indian citizens empowerment) नामक एक समूह बनाया है.मार्च को सफल बनाने के लिये अन्य सामाजिक संस्थाओं से भी सहयोग लिया जा रहा है.

VOICE से जुड़े आर्यमनु ने इस अवसर पर जारी प्रेस विज्ञप्ति मे बताया कि इस पैदल मार्च का एकमात्र उद्देश्य घटते लिंगानुपात के विरुद्ध मुहिम चलाकर बेटियों की गरिमा को पुनर्स्थापित करना है. इस रैली मे स्थानीय युवाओं के अतिरिक्त सामाजिक डवलपमेंट हेतु कार्यरत जर्मनी, अमेरिका, स्वीडन तथा इटली के प्रशिक्षु भी शामिल होंगे.

इसके लिये सोशल साइट्स पर भी प्रचार किया जा रहा है. शहर के जतन संस्थान, शिक्षांतर, उदयपुर ब्लॉग, द बनियन रूट्स आदि भी अपना सहयोग दे रहे है. VOICE द्वारा आमजन से भी अपील की जाती है कि वे पैदल मार्च मे शामिल हो तथा अपने साथ छोटी बच्चियों को उपहार स्वरुप दी जाने वाली सामग्री लेकर आये और अपने हाथों से बच्चियों को प्रदान करें.

फेसबुक लिंक

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

न्याय सिर्फ होना नहीं चाहिए बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए, भूल गई न्यायपालिका.?

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: