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हिमाचल के चुनावी नतीजों की तस्वीर सोमवार शाम से सामने आने लगेगी

By   /  December 16, 2012  /  No Comments

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105 आज़ाद उमीदवारों पर दोनों प्रमुख सियासी पार्टियों की नज़र और पकड़

नतीजे 20 की सुबह उजागर होंगे…

-धर्मशाला से अरविन्द शर्मा||

हिमाचल ने चार नवम्बर को विधान सभा के लिए मतदान किया था. इसके नतीजों के लिए परदेश वासियों को 45 दिन का लम्बा इंतज़ार करना पड़ा. इंतज़ार अभी भी खत्म नहीं हुआ है परन्तु आज सोमवार को गुरात चुनावों के अंतिम दौर के बाद शाम पांच बजे से एग्जिट पोल , सर्वे एवं तमाम ऐसी अटकलों का बाज़ार खुल जायेगा तथा मातदाता को भी ये लगने लगेगा की हवा किस ओर जा रही है. हिमाचल में 1977 के बाद कांग्रेस तथा भाजपा ने बारी बारी से राज किया है इस लिहाज से इस बार कांग्रेस की बारी है. परन्तु मुख्य मंत्री धूमल का दावा है कि इस बार ये रिवाज़ खत्म होगा और जनता विकास की धारा को देखते हुए भाजपा को दोवारा सत्ता में ला कर इतिहास कायम करेगी. उधर वीर भद्र सिंह कहते है कि कांग्रेस ही हिमाचल में इस बार सरकार बनाएगी. उनका कहना है कि भाजपा तो २६ सीटें भी जीत न पायगी. धूमल105 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रहे है.himachal-elections-2012

हिमाचल में मतदान से पहले तथा उसके बाद भी मतदाताओं की चुप रहने की बात तथा दोनों ही सियासी पार्टियों के कई दिग्गजों के रूठ कर आज़ाद चुनाव लड़ने से यूं  भी लग रहा है की आज़ाद उमीद्वारो के हाथ में सत्ता की चाबी रहेगी. सियासी पंडित भी इसी बात पर जोर दे रहे हैं की दोनों ही पार्टियों को बहुमत मिलना मुश्किल लग रहा है. कुल्लू के दिग्गज महेश्वर सिंह की नवनिर्मित पार्टी भी सियासी रस्ते को मुश्किल बना रही है .

इस बार चुनाबी मैदान में 105 आज़ाद उमीदवार हैं जिनमे से कई भाजपा और कांग्रेस के रूठे नेता हैं इसके अतिरिक्त महेश्वर की पार्टी ने भी 36 ताकतवर उमीदवार उतारे है जो अधितर भाजपा के रुष्ठ नेता है. दोनों पार्टियों की नज़र सरकार बनाने के लिए कितने आजाद उम्मीदवारों पर आपकी नजर है इस पर धूमल कहते है की समय आने पर ही कुछ कहा जा सकता है. राजनीति में विकल्प हमेशा खुले रहते हैं. उधर वीरभद्र का भी मानना की राजनीति में कुछ भी संभव है.इन दोनों व्यानो से लगता है की दोनों नेता अपनी अपनी पार्टी की बहुमत को लेकर आश्वस्त नहीं हैं. हालांकी दोनों ही अपने बूते पर सरकार बनाने की बात कर रहे है.

Election 2012यदि चुनाव लड़ रहे आज़ाद दिग्गजों पर नज़र डालें तो पांवटा से करनेश जंग कांग्रेस के दमदार उम्मीदवार हैं. यदि वह विजयी होते हैं तो उनका समर्थन वीरभद्र को मिलना तय है.  देहरा से योगराज कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं. चर्चाएं हैं कि वह जीत भी सकते हैं. यदि ऐसा हुआ तो उनका समर्थन वीरभद्र सिंह को ही मिलेगा. मनाली से धर्मवीर धामी कांग्रेस उम्मीदवार भुवनेश्वर गौड़ के खिलाफ खड़े हैं. वह भी वीरभद्र सिंह के वफादार हैं, लिहाजा जीतने की सूरत में उनका समर्थन भी उन्हें ही मिलेगा.प्रेमलता ठाकुर पूर्व विधायक सत्य प्रकाश ठाकुर की धर्मपत्नी हैं, जो वीरभद्र सिंह के प्रबल समर्थकों में से एक माने जाते हैं. यदि कुल्लू से उनकी जीत हुई तो उनका समर्थन भी वीरभद्र सिंह को मिल सकता है.विजय ज्योति वीरभद्र सिंह की रिश्तेदार हैं. यदि वह विजयी होती हैं, तो उनका समर्थन भी वीरभद्र सिंह को ही जाएगा.नगरोटा बगवां से अरुण मेहरा (कूका) कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी मौजूदा विधायक जीएस बाली के खिलाफ उतरे हैं. उन्होंने नतीजों से पहले ही जीतने की सूरत में वीरभद्र सिंह को समर्थन देने की घोषणा की है.अमरचंद पाल अर्की से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी उतरे हैं. यदि वह भी जीतते हैं तो उनका भी समर्थन वीरभद्र सिंह को जाएगा. वह पूर्व मंत्री हीराचंद पाल के सुपुत्र हैं.

उधर भाजपा की बात करें तो राजेंद्र राणा सुजानपुर से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी उतरे हैं. प्रदेश में यदि किसी आजाद उम्मीदवार के प्रबल दावे हैं, तो वह राजेंद्र राणा ही हैं. धूमल सरकार में वह मीडिया सलाहकार कमेटी के उपाध्यक्ष रह चुके हैं. मुख्यमंत्री प्रो. धूमल के सिपहसलारों में उन्हें एक माना जाता है. अर्की से चुनाव लड़ रही आशा परिहार जिला परिषद सदस्य हैं. समाजसेवी के तौर पर उन्हें अच्छी खासी ख्याति मिली है. यदि वह विजयी होती हैं तो उनका समर्थन भी प्रो. धूमल को ही मिलेगा.पवन काजल कांगड़ा से बतौर निर्दलीय उतरे हैं. उनकी जीत के भी जबरदस्त दावे हैं. चर्चाओं के अनुरूप उनका समर्थन भी प्रो. धूमल के हक में जाएगा.नूरपुर से राकेश पठानिया मौजूदा विधायक हैं. उन्हें धूमल का नजदीकी माना जाता है. जीतने की सूरत में उनका समर्थन भी प्रो. धूमल को ही मिलेगा.भटियात से भूपेंद्र चौहान ने भाजपा व कांग्रेस को कांटे की टक्कर दे रखी है. उन्हें भी धूमल का नजदीकी माना जाता है. चर्चाएं है कि वह जीतने पर भाजपा को ही समर्थन देंगे.

हिमाचल में आज़ाद उमीदवारों को कम नहीं आँका जा सकता1967 में इन्हें 38.10प्रतिशत मत मिले थे उस समय 16 आज़ाद उमीदवार जीते थे. 1972 मे भी सात अज्जाद उमीदवार जीते थे तब उन्होंने 27.28 प्रतिशत मत हासिल किये थे. 1977 में भी 6 आज़ाद उमीदवारों ने जीत हासिल की थी. 1982 में सबसे ज्यादा 205 आज़ाद उमीदवार चुनाब मैदान में उतरे और उनमे से 6 ने जीत हासिल की. 1998 में पहली वर केवल एक अज्जाद उमीदवार जवाला जी से रमेश चाँद धवाला जीत कर आया और उन्होंने सरकार के गठन में एहम भूमिका निभाई.

हिमाचल की 68 सीटों के लिए 469 उमीदवारों ने अपनि  किस्मत दाव पर लगाई है कांग्रेस तथा भाजपा ने सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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