Loading...
You are here:  Home  >  अपराध  >  Current Article

क्या नारी होना एक अभिशाप है..?

By   /  December 20, 2012  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-मुग्धा ग्रोवर||

भारत की राजधानी में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म की खौफनाक घटना ने सबके सामने एक शर्मनाक सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लडकी होना एक अभिशाप है? घटना की शिकार इस युवती ने कुछ सपने देखे थे और उन्हें सच करने की दिशा में प्रयत्नरत थी. उसके सपने सच में बदल पाते इससे पहले ही उसके जीवन में घटी इस हौलनाक घटना ने उसके सारे सपनों को एक ही झटके में ऐसे कांच के टुकड़ों में तब्दील कर दिया जो कभी नहीं जुड़ पायेगें.

india-bus-rape_2430878b

यही नहीं घटना के बाद यह युवती अपने साथी के साथ एक घंटे तक सड़क पर नग्न और घायल अवस्था में पड़ी रही मगर किसी माई के लाल ने इस युवती को अस्पताल पहुँचाने की जरूरत महसूस नहीं की. क्या यही है बेमिसाल भारत के निवासी, जो हर समय पीड़ितों की सहायता का दावा करते नहीं अघाते. इस पूरे वाकये को जानने मात्र से तन बदन सिहर उठता है मगर धन्य हैं दिल्ली के लोग जिनकी सेहत पर दर्द से तडपती उस बेहाल युवती को देख कर भी कोई असर नहीं हुआ और उसे अस्पताल तक पहुंचाने की जरूरत महसूस नहीं हुई. यही नहीं, कमजोरों पर अपना डंडा भांजने के लिए बदनाम पुलिस भी एक घंटे बाद उस लडकी तक पहुंची. क्या देश की राजधानी इतनी असुरक्षित है कि इतनी दर्दनाक वारदात के बाद भी पुलिस को पहुचने में एक घंटा लग जाये?

पिछले लम्बे समय से देश में महिलाओं के साथ जिस तरह से छेडछाड और दुष्कर्म की घटनाएँ बढ़ रही हैं उसे देख सुन कर तो ऐसा ही लगने लगा है कि इस धर्म परायण देश में जहाँ नारी को पूज्य माना जाता है और साल में दो बार नवरात्र मनाये जाते हैं तथा नवरात्रों के दौरान नौ दिनों तक नारी की देवीय शक्ति की भूखे रह कर वंदना की जाती है. वहीँ, नारी की भ्रूण हत्या से लेकर उसके साथ होने वाले ऐसे जघन्य अपराध इस देश के वासियों की दोहरी मानसिकता दर्शाते हैं. लब्बो लुआब यह कि इस देश में अब नारी होना एक अभिशाप है.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पनामा के बाद पैराडाइज पेपर्स लीक..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: