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अब क्या रंगदारी वसूलने लगा चैनल वन न्यूज़ ?

By   /  December 22, 2012  /  1 Comment

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– मुंबई से पार्थो शील और लखनऊ से पवन पाण्डेय की रिपोर्ट||

आप हैडलाइन पढ़ कर सोच रहे होंगे कि बड़ी चटखारे वाली खबर होगी पर ये बड़ा गंभीर मामला है अभी मीडिया जगत के दिग्गज कहे जाने वाले सुधीर चौधरी के रंगदारी वाले प्रकरण के सदमे से मीडिया जगत उभर नहीं पाया है कि सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि देश के सबसे बड़े औधोगिक घराने रिलायंस से एक (टप्पेबाज न्यूज़ चैनल ) चैनल वन न्यूज़ ने छह करोड़ की रंगदारी वसूल ली. आप सोच रहे होंगे कि ये क्या बकवास मै कर रहा हूँ पर ये सत्य खबर प्रतीत होती है जो सूत्रों के हवाले से आ रही है .

channel one news

पूरी खबर बताने के लिए हम आपको फ़्लैश बैक में ले चलते है मामला 2010 का है आप सभी जानते है कि अमर सिंह और रिलायंस का क्या नाता है. अमरसिंह की कृपा जिस पर हो जाती थी उसका उद्धार हो जाता था चैनल वन न्यूज़ पर भी ये कृपा बनी हुई थी बात गोरखपुर  की है. अमर सिंह कि सभाओ को लाइव करने का ठेका कभी चैनल वन न्यूज़ ने उठाया था पर किसी भी डी टी एच प्रोवाईडर पर ये चैनल नहीं था और न ही उत्तर प्रदेश में केबल पर चल रहा था. अमर सिंह के एक फ़ोन करते ही रिलायंस ने चैनल वन न्यूज़ को अपने बिग टीवी पर आन कर दिया ये कृपा लगभग एक साल तक चैनल वन न्यूज़ पर बनी रही . पर अमर सिंह की विदाई सपा से होते ही बिग टी वी से इस चैनल की विदाई भी हो गई और रिलायंस ने इस चैनल को भुगतान का बिल भी दे डाला बस फिर क्या था खुन्नस में आ कर चैनल वन न्यूज़ के प्रबंधन ने बदला लेने की ठानी.

कुछ समय पूर्व देखा होगा कि इस चैनल ने रिलायंस समूह की बखिया पहले अपना स्लाट बेच बेच कर ये चैनल अपना काम चला लेता था पर कई जगह से रंगदारी वसूल कर इस चैनल समूह केप्रबंधन की छाती चौड़ी हो गयी तो छोटे छोटे मामले चेयरमैन ने अपने चुन्नू और मुन्नू के हवाले कर  दिए और खुद बड़ी मछलियों के पीछे लग गया बीते कुछ रोज पहले उत्तराखण्ड में इस चैनल ब्यूरो के ऊपर पूर्व राज्य मंत्री की सुपारी देने का मामला भी दर्ज हुआ है एक वेब  पोर्टल पर खबर छपने के बाद उस पोर्टल की खबर का असर भी दिखा और चैनल वन न्यूज़ को अपनी सफाई देनी पड़ी. प्रिय पाठको मै आपको कई ऐसे सबूत दे दूंगा जिससे ये साबित हो जायेगा. अभी हाल में ही चैनल वन न्यूज़ का नॉएडा में एक आलीशान आफिस ख़रीदा गया है ये उसी रंगदारी वसूली की कमाई का फल है कि चैनल वन न्यूज़ पत्रकारिता की और चैनल की आड़ में रंगदारी वसूलने में लगा है. प्रोपर्टी डीलरो को गुंडों को दो दो  लाख में इस स्लाट बेचने वाले चैनल वन न्यूज़ को इतनी छूट कैसे मिल गयी क्या सुचना प्रसारण मंत्रालय और हमारे देश के सूचना मंत्री अपनी आँखों में पट्टी बांध कर बैठे है ऐसे चैनलों पर जल्द ही भारत सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए नहीं तो वो दिन दूरनहीं जब ऐसे चैनल कई सुधीर चौधरी पैदा कर देंगे और पत्रकारिता तथा पत्रकारों का चीरहरण गली गली में होगा. उधेड़ने का प्रयास किया गया. कई दिनों तक इस चैनल पर खबरे भी चली और एकदम  सेगायब भी हो गई क्यूकि रिलायंस समूह अपनी फजीहत न हो और चैनल  भी इस खबर को दिखाना न शुरु कर दे तो समूह नेचैनल वन न्यूज़ को मांगी गयी रंगदारी देने में ही अपनी भलाई समझी.  इस पुरे गेम की कमान पाल ग्रुप के चेयरमैन जहीर अहमद ने अपने सिपहसलार नमबियार के साथ संभाल रखी थी. इसी कड़ी में सहारा समूह को भी चैनल वन न्यूज़ ने ब्लैकमेल करने की कोशिश की पर सहारा ग्रुप के सामने इस की एक न चल पायी और खिसयाए चैनल वन न्यूज़ नें सहारापर केस कर डाला आप सभी ये बात जानते है साथ ही न्यूज़ एक्सप्रेस के चैनल हेड निशांत चतुर्वेदी का फर्जी स्टिंग  कर चैनल हेड और साईं प्रसाद ग्रुप से भी रंगदारी वसूलने का प्रयास किया पर यहाँ भी चैनल वन न्यूज़ की दाल गल नहीं पायी और इस प्रकरण में न्यूज़ एक्सप्रेस के निकाले गये चैनल हेड मुकेश कुमार का इस्तेमाल जहीर अहमद कर रहे थे.

 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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