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क्यों रोज हो रहा बलात्कार..?

By   /  December 23, 2012  /  1 Comment

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दिल्ली में एक के बाद एक रोज बलात्कार जैसे कुकृत्य सामने आ रहे है|पिछले दिनों चलती बस में Question_markमेडिकल की छात्रा के साथ हुए अमानवीय घटना के बाद दिल्ली ही नहीं पुरे देश विशाल जनाक्रोश देखा गया|उसके बाद भी दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली के द्वारका साउथ थानाक्षेत्र में घरेलू नौकरानी का काम करने वाली 19 वर्षीय युवती को बंधक बना कर उसके साथ दुष्कर्म की घटना,  कल 21 दिसम्बर को दिल्ली के वेलकम इलाके में एक चालीस वर्षीय महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई| सिर्फ इतना ही नहीं रविवार से लेकर शुक्रवार राजधानी में दुष्कर्म की यह नौवीं घटना है। ये सिर्फ दिल्ली की ही कहानी नहीं है, लगभग देश के हर इलाके में महिलाये अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही है और एक खौफशुदा जीवन जीने को विवश है|  अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतने विशाल जनाक्रोश के बाद भी अपराधी बेखोफ क्यों है ?? आखिर रोज बलात्कार जैसे संगीन जुर्म क्यों हो रहे है ??

इसके कई कारण है :-

1. नशा :-  बलात्कार जैसे अपराध में नशा का सबसे बड़ा योगदान रहता है। नशे की आगोश में आने के बाद इन्सान कब इन्सान से वहसी दरिंदा बन जाता उसे खुद भी पता नहीं होता और उसकी दरिंदगी की सजा कुछ मासूम लोगो को भुगतना पड़ता है। दिन पर दिन बढ़ते हादसों के वाबजूद हर रोज शराब के कई नए ठेके खुलते है । सरकार भी दिल खोल कर लाइसेंस बाटती है क्युकी यहाँ से उन्हें मोटा राजस्व मिलता है और हमारे समाज के रक्षक को हर महीने की उपरी कमाई और पिने के लिए मुफ्त की शराब।

2. संवेदनहिन जनता – समाज में कोई भी अपराध इस वजह से होता है कि आस-पास के लोग उसे नजरंदाज कर देते है लोगों हमारी आदत बन गयी है सिर्फ अपने आप से मतलब रखने की| हमारे आस-पास कोई घटना घटती है तो हम सिर्फ एक दर्शक की तरह देखते रहते है या ये कह कर आगे बढ़ जाते है कि मुझे क्या लेना इन सब से, कौन पड़ने जाये बेकार के झमेले में|इससे भी अपराधियों का हौसला बढ़ता है| जिस तरह का विरोध जनता आज दिखा रही है अगर ऐसा विरोध किस अपराध के होने के समय दिखाया जाये तो अपराध अपने आप कम हो जायेगा |

3. हमारी पुलिस –  बढ़ते अपराध का एक महत्पूर्ण कारन हमारी पुलिस भी है |अपराधियों से ज्यादा हमे हमारी पुलिस से डर लगता है । समाज में शांति व्यवस्था और कानून व्यवस्था कायम रखना पुलिस काम है, लेकिन हमारी पुलिस को रिश्वत खाने और हफ्ता वसूलने से, बड़े-बड़े लोगो की जी हुजूरी करने से फुर्सत ही नहीं। जिन पुलिस पर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है वो 100-100, 200-200 रूपये किसी भी जेबकतरे के हाँथ बिक जाती है। अगर कोई आम इन्सान कई किसी अपराध की रिपोर्ट करने भी जाता है तो पुलिस रिपोर्ट तक नहीं लिखना चाहती है, जब तक की रिपोर्ट लिखने के लिए भी चढ़ावा न चढ़ाया जाये या साथ किसी पार्षद या विधायक की शिफारिस ना हो । हमारी पुलिस की छवि जनता बिच किसी गुंडे से कम नहीं है।

4. कानून :- अगर पुलिस जनता के दवाब में या अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अपराधियों को पकड़ भी ले तो हमारे कानून में कमियों की वजह से या तो बच निकलता है या सजा मिलने में इतनी देर हो जाती ही कि फिर उस सजा का मिलना और न मिलना एक बराबर होता । अपराध को रोकने केलिए सख्त और त्वरित कानून का बनना आवश्यक है।

5. सरकार :- हर दुखद घटना के बाद सरकार और प्रशासन पिछले 65 सालो से बोल रही है :-  जरूरी कार्यवाही हो रही है, दोषियों को बकषा नहीं जाएगा और जनता द्वारा विरोध करने पर कहा जाता है – दोषियों को पकरा जा चूका है और कुछ पुलिसवालों को निलंबित कर चुके है, फिर विरोध होने पर सरकार पीड़ित और मरने वालो के परिवार को उचित मुवाजा देगी । क्या मुआवजे मिले कुछ पैसों से किसी की लुटी हुयी इज्जत या हादसे में मरे लोग वापस आ जायेंगे??  कहने को तो हमारे देश में जनतंत्र है यानी जनता का अपना साशन लेकिन जब वही जनता अपनी बात अपनी सरकार, अपने प्रतिनिधियों तक पहुचने की कोशिश करती है तो उन पर लाठियां चलायी जाती है । आँखों को जला देने वाले आसू गैस छोड़े जाते है। क्या यही जनतंत्र है ??

हमारा कानून अगर किसी अपराधियों को सजा दे भी दे तो हमारे राष्ट्रपती बिना अपराध की गंभीरता को समझे हुए अपनी उदारिता दिखाते हुए उनकी सजा को माफ़ कर देते है इस का उदाहण है पिछले 5  सालो में हमारे देश के प्रथम महिला राष्ट्रपति द्वारा बलात्कार के 30 आरोपियों की फंसी की सजा माफ़ किया जाना :-

केस 1: पांच वर्ष की अबोध बच्ची के साथ दरिदंगी करने और फिर हत्या करने वाले बंटू को फासी की सजा हुई

2. मोलाईराम और संतोष यादव ने एक जेलर की 10 साल के बेटी को हवस का शिकार बनाकर हत्या कर दी इन्हे भी फांसी की सजा हुई

3. सतीश नाम के एक शख्स ने 6 साल की बच्ची को शिकार बनाकर मार डाला , फासी की सजा दी कोर्ट ने

4. बंडू बाबूराव तिड़के ने 16 साल की किशोरी को स्कूल से अगवा कर हैवानियत पूरी की और हत्या कर दी फासी की सजा हुई ।

इसी तरह के कुछ मामलो के साथ करीब 30 अपराधियो की फांसी की सजा हमारी ‘महान दरियादिल पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने माफ कर दी । अब आप जरा सोचिये की उच्चतम न्यायालय फासी दे भी दे तो होती क्यो नही है । ये सवाल तो प्रतिभा पाटिल जी से पूछने का मन तो करता ही है कि एक महिला होते हुये भी उनकी सहानू्भूति दरिंदो के साथ क्यो रही ।

दिल्ली में एक के बाद एक रोज बलात्कार जैसे कुकृत्य सामने आ रहे है|पिछले दिनों चलती बस में मेडिकल की छात्रा के साथ हुए अमानवीय घटना के बाद दिल्ली ही नहीं पुरे देश विशाल जनाक्रोश देखा गया|उसके बाद भी दक्षिणी-पश्चिमी दिल्ली के द्वारका साउथ थानाक्षेत्र में घरेलू नौकरानी का काम करने वाली 19 वर्षीय युवती को बंधक बना कर उसके साथ दुष्कर्म की घटना,  कल 21 दिसम्बर को दिल्ली के वेलकम इलाके में एक चालीस वर्षीय महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई| सिर्फ इतना ही नहीं रविवार से लेकर शुक्रवार राजधानी में दुष्कर्म की यह नौवीं घटना है। ये सिर्फ दिल्ली की ही कहानी नहीं है, लगभग देश के हर इलाके में महिलाये अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही है और एक खौफशुदा जीवन जीने को विवश है|  अब सवाल ये उठता है कि आखिर इतने विशाल जनाक्रोश के बाद भी अपराधी बेखोफ क्यों है ?? आखिर रोज बलात्कार जैसे संगीन जुर्म क्यों हो रहे है ??

इसके कई कारन है :-

1. नशा :-  बलात्कार जैसे अपराध में नशा का सबसे बड़ा योगदान रहता है। नशे की आगोश में आने के बाद इन्सान कब इन्सान से वहसी दरिंदा बन जाता उसे खुद भी पता नहीं होता और उसकी दरिंदगी की सजा कुछ मासूम लोगो को भुगतना पड़ता है। दिन पर दिन बढ़ते हादसों के वाबजूद हर रोज शराब के कई नए ठेके खुलते है । सरकार भी दिल खोल कर लाइसेंस बाटती है क्युकी यहाँ से उन्हें मोटा राजस्व मिलता है और हमारे समाज के रक्षक को हर महीने की उपरी कमाई और पिने के लिए मुफ्त की शराब।

2. संवेदनहिन जनता – समाज में कोई भी अपराध इस वजह से होता है कि आस-पास के लोग उसे नजरंदाज कर देते है लोगों हमारी आदत बन गयी है सिर्फ अपने आप से मतलब रखने की| हमारे आस-पास कोई घटना घटती है तो हम सिर्फ एक दर्शक की तरह देखते रहते है या ये कह कर आगे बढ़ जाते है कि मुझे क्या लेना इन सब से, कौन पड़ने जाये बेकार के झमेले में|इससे भी अपराधियों का हौसला बढ़ता है| जिस तरह का विरोध जनता आज दिखा रही है अगर ऐसा विरोध किस अपराध के होने के समय दिखाया जाये तो अपराध अपने आप कम हो जायेगा |

3. हमारी पुलिस –  बढ़ते अपराध का एक महत्पूर्ण कारन हमारी पुलिस भी है |अपराधियों से ज्यादा हमे हमारी पुलिस से डर लगता है । समाज में शांति व्यवस्था और कानून व्यवस्था कायम रखना पुलिस काम है, लेकिन हमारी पुलिस को रिश्वत खाने और हफ्ता वसूलने से, बड़े-बड़े लोगो की जी हुजूरी करने से फुर्सत ही नहीं। जिन पुलिस पर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है वो 100-100, 200-200 रूपये किसी भी जेबकतरे के हाँथ बिक जाती है। अगर कोई आम इन्सान कई किसी अपराध की रिपोर्ट करने भी जाता है तो पुलिस रिपोर्ट तक नहीं लिखना चाहती है, जब तक की रिपोर्ट लिखने के लिए भी चढ़ावा न चढ़ाया जाये या साथ किसी पार्षद या विधायक की शिफारिस ना हो । हमारी पुलिस की छवि जनता बिच किसी गुंडे से कम नहीं है।

4. कानून :- अगर पुलिस जनता के दवाब में या अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अपराधियों को पकड़ भी ले तो हमारे कानून में कमियों की वजह से या तो बच निकलता है या सजा मिलने में इतनी देर हो जाती ही कि फिर उस सजा का मिलना और न मिलना एक बराबर होता । अपराध को रोकने केलिए सख्त और त्वरित कानून का बनना आवश्यक है।

5. सरकार :- हर दुखद घटना के बाद सरकार और प्रशासन पिछले 65 सालो से बोल रही है :-  जरूरी कार्यवाही हो रही है, दोषियों को बकषा नहीं जाएगा और जनता द्वारा विरोध करने पर कहा जाता है – दोषियों को पकरा जा चूका है और कुछ पुलिसवालों को निलंबित कर चुके है, फिर विरोध होने पर सरकार पीड़ित और मरने वालो के परिवार को उचित मुवाजा देगी । क्या मुआवजे मिले कुछ पैसों से किसी की लुटी हुयी इज्जत या हादसे में मरे लोग वापस आ जायेंगे??  कहने को तो हमारे देश में जनतंत्र है यानी जनता का अपना साशन लेकिन जब वही जनता अपनी बात अपनी सरकार, अपने प्रतिनिधियों तक पहुचने की कोशिश करती है तो उन पर लाठियां चलायी जाती है । आँखों को जला देने वाले आसू गैस छोड़े जाते है। क्या यही जनतंत्र है ??

हमारा कानून अगर किसी अपराधियों को सजा दे भी दे तो हमारे राष्ट्रपती बिना अपराध की गंभीरता को समझे हुए अपनी उदारिता दिखाते हुए उनकी सजा को माफ़ कर देते है इस का उदाहण है पिछले 5  सालो में हमारे देश के प्रथम महिला राष्ट्रपति द्वारा बलात्कार के 30 आरोपियों की फांसी की सजा माफ़ किया जाना :-

केस 1: पांच वर्ष की अबोध बच्ची के साथ दरिदंगी करने और फिर हत्या करने वाले बंटू को फासी की सजा हुई

2. मोलाईराम और संतोष यादव ने एक जेलर की 10 साल के बेटी को हवस का शिकार बनाकर हत्या कर दी इन्हे भी फांसी की सजा हुई

3. सतीश नाम के एक शख्स ने 6 साल की बच्ची को शिकार बनाकर मार डाला , फासी की सजा दी कोर्ट ने

4. बंडू बाबूराव तिड़के ने 16 साल की किशोरी को स्कूल से अगवा कर हैवानियत पूरी की और हत्या कर दी फासी की सजा हुई ।

इसी तरह के कुछ मामलो के साथ करीब 30 अपराधियो की फांसी की सजा हमारी ‘महान दरियादिल पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने माफ कर दी । अब आप जरा सोचिये की उच्चतम न्यायालय फासी दे भी दे तो होती क्यो नही है । ये सवाल तो प्रतिभा पाटिल जी से पूछने का मन तो करता ही है कि एक महिला होते हुये भी उनकी सहानू्भूति दरिंदो के साथ क्यो रही ।

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About the author

This is Vikas K Sinha, I am basically from Village + Post Bajitpur kasturi, Anchal – Sahdei Buzurg, District – Vaishali, Bihar. but living in Delhi. I am Working in a private company as a office asst. and also doing some social work with my some friends

1 Comment

  1. jiyajunior says:

    आज हर तरफ दिल्ली में घटित दामिनी के बलात्कार की घटना की चर्चा हो रही है !सड़क से संसद तक उक्त घटना पर सवाल किये गए और हर तरफ से घटना में शामिल लोगो को फाशी की सजा की मांग की गई !मई पूछना छठा हूँ नेताओं और सभी सामाजिक संगठनो से की क्या ये सामूहिक बलात्कार की घटना पहली बार हुई है?प्रतेक दिन कई बलात्कार की घटनाये अब भी घट रही है फिर चर्चा सिर्फ दिल्ली की क्यों?कई बलात्कारी जेल में क़ैद है और कई अब भी निडर होकर हमारे बिच ही ऐश कर रहे हैं !इनके लिए तो किसी ने फासी की सजा नहीं मांगी?सिर्फ दिल्ली के अपराधियों को ही फासी क्यों?और क्या फाशी देने से बलात्कार की घटनाये रूक जाएगी?जब तक हमारे समाज में उंच-नीच,गरीबी-अमीरी का भेद भाव रहेगा ,जब-तक हमारा समाज संवेदन हिन् रहेगा,विकाश सिन्हा जी ने सही लिखा है की जब-तक शराब बिकते रहेंगे ,मीडिया और इन्टरनेट पर गंदे फिल्म और फोटो या उससे जुडी गंदे सामग्री जो गलत विचारो को जन्म देती है उस पर पूरी तरह से बैन नहीं लगाया जाता तब- तक इन घटनाओं में कमी नहीं लाया जा सकता खत्म होना तो दूर की बात है!जब हमारे नेता विधान सभा में बैठकर इंटरनेट के माध्यम से अपने मोबाइल पर ब्लू -फिल्म देख सकते है तो आम जनता को कोई कैसे रोक सकता है !फाशी की सजा से महिलाओं के लिए और भी मुसीबत बढ़ सकती है तथा से किसी व्य्भाचारी को मारा तो जा सकता है पर उसके विचारों को नहीं?इसलिए सजा ऐसी हो जो अपराधी अपनी आँखों से अपनी सजा खुद देखे ,ऐसी वीभत्स घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधियों को ऐसी सजा दी जाये की उसके परवर में भी लोग उससे नफरत करने लगे!कुछ ऐसी सजा हो की अपराधी खुद अपने लिए मौत मांगे!

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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