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”मुझ पर केस करो और मुझे अनफ्रेंड करो…” IIMC मामले पर दिलीप मंडल ने तोड़ी चुप्पी

By   /  August 7, 2011  /  3 Comments

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प्रकाश झा की फिल्म ‘आरक्षण”  को लेकर फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर अपनी जीत की खुशी मना रहे दिलीप मंडल अचानक आधी रात को भड़क उठे। आईआईएमसी मुद्दे पर तीन दिनों बाद उन्होंने जब कुछ कहा भी तो बस इतना ही कि संस्थान से उनका जुडाव सीमित है तथा उनकी हैसियत भी सीमित है।

दिलीप मंडल: मेरे खिलाफ़ केस कर दो..!

गौरतलब है कि करीब तीन दिनों पहले एक नौजवान पत्रकार अनूप आकाश वर्मा ने आईआईएमसी में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे को अपने फेसबुक पर उठाया था और दिलीप मंडल से इस मुद्दे को फेसबुक आदि पर प्रचारित करें। दिलीप को हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय में ओबीसी सीटों के कनवर्जन के खिलाफ एक अभियान चला कर जीत हासिल करने के लिए खासा प्रचार मिल चुका है।

शिकायत करने वाले छात्रों ने दिलीप मंडल से उसी तरह का अभियान छेड़ने का अनुरोध किया था, लेकिन यहां दिलीप अपनी हैसियत का रोना लेकर बैठ गए और आखिरकार नाराज़ होकर मामले से ही किनारा कर लिया। गौरतलब है कि दिलीप आईआईएमसी से बतौर ऐकेडेमिक एसोशिएट संबद्ध हैं।

फेसबुक पर हुई बातचीत का पूरा ब्यौरा निम्नवत है।

डॉक्टर ओम राजपूत:
दिलीप जी सर अनूप जी के आरोप पर मौन क्यों हो । चुप्पी तोड़ो जल्दी बोलो
जल्दी बोलो जल्दी बोलो।
IIMC पर लगा आरोप
चुप क्यों हो मंडल जी तोप
Vishal Tiwari: क्योँकि दूसरोँ को ज्ञान देना और समाजिकता की शेखी बघारना आसान है!!
Vishal Tiwari: रविश कुमार ने भी बरखा दत्त मामले मेँ यही किया था।
डॉक्टर ओम राजपूत मंडल जी जबाव दे न दे सवाल तो बनता है। कल अनूप जी पूछ रहे थे आम मैं पूछ रहा हूँ कल कोई और पूछेगा। पर पूछेगा जरूर
Harishankar Shahi: दिलीप जी जल्द ही कुछ बोलिए वरना यह एक तरफ़ा ना हो जाए. आप दूसरों को कह देते हैं वह भाग जायेंगे. आप तो आइये बोलिए यहाँ पर.
डॉक्टर ओम राजपूत बहुत लोग कोशिश कर रहे हैं शाही जी पर दिलीप जी ने चूँ तक नहीं किया है। अपनी पर बनती है तभी फटती है।
Harishankar Shahi: नहीं फिलहाल दिलीप जी से ऐसी उम्मीद तो नहीं है. लेकिन देखिये उम्मीदें इसी दुनिया में टूटती हैं.
Anoop Aakash Verma: kaash!ki wo is par bhi bolte…..
Yogesh Kumar Sheetal: ‎@डॉक्टर ओम राजपूत: सवाल मर्यादा में रहकर करें. उन्हें थोडा समय दें, हो सकता ही किसी प्रोब्लम में होंगे. सिर्फ हम आप नही सब लोग वेट कर रहे हैं. उम्मीद है वो हमारे समय का थोडा सम्मान जरुर करेंगे लेकिन जब तक वो कुछ कहते नही उनके बारे में इतनी जल्दी कोई विचार न बनाएं. मत भूलिए कि उनके सम्पादन में प्रकाशित कथादेश में आई आई एम सी को लेकर कई शंकाएं व्यक्त की जा चुकी है. थोडा समय दें उन्हें ये मेरा आग्रह है.
Dilip Mandal: मिश्रा जी,तिवारी जी, शाही जी, राजपूत जी, शुक्रिया आप यह सवाल उठाते रहें। आपका हनुमान भी आपको मिल ही गया है। वैसे मिश्रा जी,तिवारी जी, शाही जी, राजपूत जी आदि तमाम जी के सेवक हनुमान, यह बताओ कि आईआईएमसी में हुआ क्या है? मेरे वाल पर पेस्ट करो। पूरी डिटेल। शुरू से लेकर। और उसमें मेरी भूमिका , तुम्हारे शब्दों में “दिलीप मंडल का दोगला व्यवहार” आदि पूरा ब्यौरा। यह करो, फिर देखते हैं। यह करने तक और कोई तमाशा नहीं।
Dilip Mandal: योगेश मैं किसी प्रॉबलम नें नहीं हूं। तुम्हें गलतफहमी हुई है।
Yogesh Kumar Sheetal: ‎Dilip Mandal आपकी फटकार न कभी बुरी नही लगी है और न कभी लगेगी.
Dilip Mandal: मैं सिर्फ दो विषयों पर पिछले कई महीनों से काम कर रहा हूं। इधर-उधर हाथ नहीं डालता। आईआईएमसी में इसलिए हूं क्योंकि 10 किताबों की मीडिया सीरिज लिख रहा हूं। वहां मैं नौकरी नहीं करता। ठेके पर काम करता हूं। लाइब्रेरी का इस्तेमाल करने के लिए। हनुमान को नहीं पता, तुम तो जानते हो। लेकिन अब जब हनुमान की और उनके स्वामियों की इच्छा है तो यह भी सही। 10-15 मिनट खोटा होगा। कुछ लोगों के दिल की शांति के लिए यह भी सही।
Dilip Mandal: मिश्रा जी,तिवारी जी, शाही जी, राजपूत जी आदि तमाम जी के सेवक हनुमान, अब देर मत करो। मेरे खिलाफ अपनी चार्जशीट पेश करो। आप लोगों ने जो भी लिखा, मैंने सब रहने दिया तो आप लोगों का दिमाग खराब हो गया। आप लोगों को लगा कि अब फाइनली घेर लिया है। शुक्ला जी, पांडे जी लोग मिठाई बांटने लगे। अभी किसी और को कुछ भी लिखने की जरूरत नहीं। सिर्फ हनुमान लिखेगा। हनुमान को अगर नहीं पता कि हनुमान कौन है,तो चाहे वह जहां लिखे, यहां तमाशा नहीं करेगा।
Yogesh Kumar Sheetal: ‎Dilip Mandal सर आप जो सजा देना चाहें दीजिये, लेकिन मैंने न आप पर कोई आरोप लगाया न आप पर लगे किसी आरोप को समर्थन दिया है. वैसे आपकी डांट जरुरी थी, अब ठंडा ठंडा फील हो रहा है, मुझे जिनसे शिकायत है वो मै सार्वजनिक कर चुका हूं और उसके प्रमाण भी कई जगह आ चुके हैं, सर आपको पता है सच्चाई क्या है.
Dilip Mandal: शीतल, मुझे कुछ नहीं पता है। संस्थान से मेरा जुड़ाव सीमित है,हैसियत भी सीमित है। शीतल अब तुम भी रुको। कुछ लिखने की जरूरत नहीं है। अब हनुमान की चार्जशीट आने दो। देखता हूं।
Dilip Mandal: मेरे खिलाफ जो शिकायत है (अगर कोई शिकायतहै), उसे लेकर केस दाखिल करो, या फिर अपने सारे अपडेट और कमेंट खोज-खोज कर डिलीट करो या फिर मुझे अनफ्रैंड करो। 12 घंटे के भीतर। तमाशा खत्म।

यहां यह बता देना आवश्यक है कि डॉक्टर ओम राजपूत ने 6 अगस्त को करीब 10 बजे रात दिलीप की वॉल पर यह पोस्ट किया था जिस पर दिलीप मंडल आधी रात के बाद अपनी टिप्पणी के साथ मैदान में उतरे, लेकिन एक घंटे में ही बहस बंद करने की घोषणा कर दी।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. जनाब .. मेरा कमेन्ट डिलीट कर दिए हैं उसमे से? मैंने उसी रात में ३ बजे जब उनको इसी बात पर घेरा तो नाराज होकर ब्लाक मार दिए.. आखिर जब हैसियत नहीं है लड़ने की तो चिल्लाते क्यों है ? आईआईएमसी के अहसान तले दिलीप दबें होंगे.. हम नहीं .. श्रवण शुक्ल // नाम ले लेना .. कान खड़े हो जायेंगे .आरक्षण के पुजारी के ..

  2. Suresh Rao says:

    दिलीप मंडल जी एक इमानदार पत्रकार है, कुछ लोग उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे है, क्योंकि वह हमेशा दलित और पिछड़े लोगो से जुड़े सवाल उठाते रहे है, परन्तु वह जबाब देने में सछम है ऐसा मेरा विश्वास है.और उनका जबाब आ गया है , कृपया अब इसें बंद कर दे. दिलीप जी आप पर लोंगो को पूरा विश्वास है और लोग जानते है की आप क्या है और कैसे है.. धन्यवाद् आपके संघर्ष के लिए..

  3. भूषण कुमार (For Dilip Mandal) says:

    आईआईएमसी मामले पर कैसे अभियान छेड़ सकते थे अनूप जी.. आखिर रिसर्च के लिए लाइब्रेरी में जाने देते हैं प्रधान जी, कभी-कभी क्लास लेकर ज्ञान झाड़ने का मौका भी दे देते हैं। और आपको भी कोई टाइम नहीं मिलता है आंदोलन करने का..? अभी प्रकाश झा अपने फिल्म आरक्षण को कंट्रोभर्सियल बनाने के लिए कांट्रैक्ट दिए हुए हैं और आप लोग एगो लिस्ट का मामला लेकर आ गए.. अरे भाई हमेशा नुकसाने का बात कीजीएगा..? कभी कभी प्रौफिट का भी तो सोचिए.

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