/कच्छ सीमा पर पकड़ा गया जासूस बाज

कच्छ सीमा पर पकड़ा गया जासूस बाज

-चन्दन भाटी||

बाड़मेर राजस्थान गुजरात फ्रंटीयर के सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने गुजरात के कच्छ जिले में एक जासूस बाज पकड़ा है.hawk

बीएसएफ के उप महा निरीक्षक एके सिन्हा ने मंगलवार को बताया कि जासूसी कर रहा यह बाज सोमवार रात कच्छ जिले में भारत पाकिस्तान सीमा पर वीघा कोट आउटपोस्ट से पकड़ा गया. उन्होंने बताया कि इस बाज की एक टांग पर ट्रांसमीटर लगा है. बाज को अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक पिलर संख्या 1111 पर पकड़ा गया.

उन्होंने बताया कि इस पर लगे ट्रांसमीटर और एंटिना को आगे की जांच पडताल के लिए अपराध जांच शाखा को भेजा जाएगा. उन्होंने बताया कि सतर्कता विभाग भी इसकी जांच कर रहा है कि बाज का इस्तेमाल जासूसी के लिए किया गया अथवा इसे किसी और मकसद से यहां भेजा गया है.

वर्ष 2008 में कच्छ के झकाऊ पोस्ट में भी इसी तरह के एक बाज को पकड़ा गया था. बाज 15 हजार फुट की ऊंचाई तक उड़ सकता है और दुश्मन देश जासूसी के लिए इसका खूब इस्तेमाल करते हैं. इससे   में   पकड़ा   .मुंबई पर हमला करने आए आतंकवादियों ने रास्ता खोजने के लिए एक बाज़ की मदद ली थी. राजस्थान पुलिस ने बीएसएफ की मदद से एक बाज़ को पकड़ा था , जिसके पंखों पर ट्रांसमिटर लगा था .
सूत्र बताते हैं कि यह एक ट्रेन्ड बाज़ था . इस तरह के बाज़ की कीमत लाखों रुपये तक हो सकती है. ये बाज़ सऊदी अरब के शाही परिवारों के पास पाए जाते हैं. बताया जाता है कि इन शाही परिवारों के कुछ लोग आजकल पाकिस्तान में पक्षियों के शिकार पर आए हुए हैं. ये शिकारी साइबेरियन क्रेन जैसे दुर्लभ पक्षियों के शिकार के लिए इन ट्रेन्ड बाज़ों का इस्तेमाल करते हैं.

जब इस बाज़ को इलाके में देखा गया तो यही समझा गया कि दहशत फैलाने के लिए बॉर्डर के उस पार से किसी ने कैमरा वगैरह लगाकर इस बाज़ को छोड़ दिया है. लेकिन जब इसे पकड़ा गया और ध्यान से देखा गया तो पता चला कि इस बाज़ के पंखों में बैटरी से चलने वाला एक ट्रांसमिटर और एक ऐंटीना भी लगा था.–

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.