/जैसलमेर में महिला जनप्रतिनिधि को पीटा..

जैसलमेर में महिला जनप्रतिनिधि को पीटा..

महिला जनप्रतिनिधी के साथ मारपीट.. वार्ड संख्या 10 की है पार्षद…पुलिस नहीं कर रही मामला दर्ज…. न्याय के लिये दर दर भटक रही है महिला…..
 -जैसलमेर से सिकंदर शेख||
दिल्ली के दुष्कर्म के बाद देश भर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर छिडी बहस अभी थमी ही नहीं है कि महिला के साथ मारपीट का एक मामला स्वर्णनगरी जैसलमेर भी उभर कर सामने आ गया। vlcsnap-2013-01-03-18h15m39s153देश भर में छिडी इस बहस के बाद कहीं न कहीं ऐसा लगना शुरू हो गया था कि अब शायद महिलाओं को न्याय व सुरक्षा दिलाई जा सकेगी लेकिन जैसलमेर शहर के वार्ड संख्या 10 की पार्षद मीना भाटी के साथ गत 29 दिसम्बर को हुई मारपीट को लेकर न तो पुलिस गंभीर है और न ही प्रशासन ऐसे में जब महिला जनप्रतिनिधियों के ये हालात हैं तो आम महिला की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने वाजिब ही है।
मामला है जैसलमेर शहर के वार्ड संख्या 10 का जहां पर इस वार्ड की पार्षद मीना भाटी का एक भूखण्ड है जिस पर कब्जा जमाने की नीयत के कुछ लोगों द्वारा इस महिला पार्षद पर हमला कर इसके साथ मारपीट की गई।

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पार्षद भाटी द्वारा जब इस मामले को लेकर पुलिस में गुहार लगाई तो पुलिस ने धारा 151 के तहत मामला दर्ज कर मामले की इतिश्री कर दी जब कि महिला के साथ मारपीट व अभद्र व्यवहार के लिये कोई भी धारा आरोपियों पर नहीं लगाई है। ऐसे में पहले दिन जमानत पर छूटे इन अपराधियों द्वारा लगातार इस महिला पार्षद को धमकाया जा रहा है और पुलिस द्वारा ढुलमुल जवाब देने से त्रस्त यह महिला अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी आशंकित दिखाई दे रही है। पुलिस थाना कोतवाली द्वारा मामले में कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने के बाद आज यह महिला जिला कलक्टर शुचि त्यागी व जिला पुलिस अधीक्षक ममता राहुल विश्नोई के पास भी पहुंची व उन्हें ज्ञापन देकर अपनी सुरक्षा की मांग की है। जब सक्षम अधिकारीयों से  मामले से बात करनी चाही तो कोई भी अधिकारी कैमरे पर बात  करने को राज़ी नही हुआ
गौरतलब है कि पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाने वाली स्वर्णनगरी में प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पुरूष व महिला सैलानी आते हैं ऐसे में अगर शहर की एक जनप्रतिनिधि के साथ इस प्रकार के मामले होना व न्याय नहीं मिलना कहीं न कहीं शहर की अन्य महिलाओं को हतोत्साहित सा करता है।
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.