/केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुद्दे पर कांग्रेस नेता आमने सामने..

केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुद्दे पर कांग्रेस नेता आमने सामने..

हिमाचल कांग्रेस नेताओं द्वारा केन्द्रीय विश्वविद्यालय को लेकर राजनीतिक दांव पेच शुरू हो गए हैं तो पूर्व मंत्री एवं वर्तमान देहरा से भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि ने कहा कि प्रदेश की पूर्व धूमल सरकार ने इस विश्वविद्यालय को देहरा में ही स्थापित करने का एलान किया है परंतु केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर कांग्रेस के नेताओं द्वारा राजनीति की जा रही है, उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय देहरा का है तथा देहरा में ही रहना चाहिए.

-धर्मशाला से अरविन्द शर्मा||

केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर हिमाचल में अभी तक जहां काग्रेंस और भाजपा में लड़ाई cuhp1-imgचल रही थी वहीं अब इस मुद्दे पर कांग्रेस  के ही नेता आमने सामने हो गए हैं. प्रदेश  में काग्रेंस की सरकार बनने के साथ ही पहली बार मंत्री बने धर्मषाला से काग्रेंस के विधायक सुधीर शर्मा ने केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर दो दिन पहले ही अपनी पत्रकार वार्ता में  धर्मषाला में बयान दिया जिसमें उन्होंने इसकी स्थापना को धर्मशाला को ही एक मात्र विकल्प बताया लेकिन वहीं इसके एक दिन बाद ही ज्वालामुखी से काग्रेंस विधायक संजय रतन ने केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर देहरा की वकालत करके एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. संजय रतन ने ज्वालामुखी में पत्रकारों के साथ बातचीत में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पूर्व भाजपा सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर मोहर लगाते हुए देहरा के लिए 70 फीसदी हिस्सा स्थापित करने की बात कहकर अपनी ही सरकार के मंत्री के बयान का कटाक्ष कर लोगों के बीच चर्चा छेड़ दी है. संजय रतन के इस बयान के बाद काग्रेंस के मंत्री और विधायक में जंग छिड़ गयी है.

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का मुद्दा पूर्व में भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी खूब उलझा रहा. भाजपा और कागे्रंस इसकी स्थापना को लेकर धर्मषाला और देहरा के बीच ही उलझी रही. वहीं अब संजय रतन के इस बयान के बाद काग्रेंस के मंत्री और विधायक में इस मुद्दे पर खींचतान षुरू हो गई है

कांग्रेस के मंत्री व विधायक के बीच केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर शुरु हुआ यह राजनीतिक का खेल देहरा व धर्मशाला की जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है. लोगों में इस बात को लेकर जोरों पर चर्चा है कि एक और जहां कांग्रेस के मंत्री केंद्रीय विश्वविद्यालय को धर्मशाला में स्थापित करने का एलान कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस के विधायक अगले दिन केंद्रीय विश्वविद्यालय को देहरा में स्थापित करने का एलान कर रहे हैं. गौरतलब है कि पूर्व भाजपा सरकार ने केंद्रीय विश्वविद्यालय को देहरा में स्थापित करने का एलान किया था जिसके लिए देहरा के निकट ही एक भूमि का चयन भी कर लिया गया था, परंतु उस दौरान कांग्रेस के नेताओं ने केंद्रीय विश्वविद्यालय को धर्मशाला में स्थापित करने का पूरा जोर लगाया तथा कांग्रेस के नेताओं ने यह भी कहा था कि केंद्र ने पहले ही केंद्रीय विश्वविद्यालय को धर्मशाला में स्थापित करने करने को कहा ऐसे में उसे देहरा में स्थापित करने का सवाल ही पैदा नही होता. इसके लिए कांग्रेस के नेताओं द्वारा धर्मशाला के निकट भूमि पर भी अपनी सहमति प्रकट की थी मगर पूर्व भाजपा सरकार ने साफ शब्दों में कांग्रेस से कहा था कि केंद्रीय विश्वविद्यालय देहरा में ही स्थापित होगा. हालांकि पूर्व भाजपा सरकार के समय में केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर जो राजनीति का खेल शुरु हुआ उसके कारण यह विश्वविद्यालय अभी तक न तो देहरा में ओर न ही धर्मशाला में स्थापित हो सका है. परंतु प्रदेश में अब कांग्रेस की सरकार बनने के साथ ही एक बार फिर से केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर राजनीति का खेल शुरु हो चुका है. अब देखना यह है कि इसमें धर्मशाला के मंत्री कामयाब होते हैं या फिर ज्वालामुखी के विधायक. क्योंकि दोनों ही अपने-अपने विस क्षेत्र की जनता पर हावी होने के लिए इसे अपने-अपने क्षेत्र में स्थापित करने के जोरअजमाईश के खेल को शुरु कर चुके हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.