/स्वर्ण नगरी में देह व्यापार को मिल रहा है खाकी का प्रश्रय…

स्वर्ण नगरी में देह व्यापार को मिल रहा है खाकी का प्रश्रय…

स्वर्ण नगरी में फल फूल रहा है देह व्यापार का कारोबार..पुलिस की नाक के नीचे होता है देह का धंधा…कच्ची बस्तियों में बाहर से आई कई महिलायें इस धंधे में शामिल…

-जैसलमेर से सिकंदर शेख़||

स्वर्ण नगरी जैसलमेर विश्व् मानचित्र पर पर्यटन नगरी के नाम से विख्यात है, देश दुनिया से लाखों की संख्या में पर्यटक हर वर्ष इसको निहारने यहाँ आते हैं जिससे इस शहर की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा सुदृढ़ है, आज भी यहाँ के बाशिंदे अपनी सभ्यता और संस्कृति के लिए खासे जाने जाते हैं.college-prostitute-5 लेकिन कुछ एक वर्षों से यहाँ अपराधिक गतिविधियाँ ज्यादा बढ़ गयी है, चाहे वो चोरी की हो, लूट की हो, यहाँ तक की हत्या जैसी भी घटनाये यहाँ बढ़ गयी है, पुलिस की बात की जाए तो वो एक नाकर सिस्टम के साथ यहाँ बैठी है, चाहे हरीश हत्याकांड हो, डालूराम हत्याकांड या फिर हाल ही में होटल काम्प्लेक्स के पास मिला एक युवक का शव , इन सारी हत्याओं के पीछे कोई न कोई तथ्य जरूर रहा है मगर पुलिस इन हत्याकांडों की गुथियाँ सुलझाने में असमर्थ ही रही है या यूँ कहे की अपनी ड्यूटी को निभाने में वो असफल रही है ,सभी हत्याओं पर गौर किया जाय तो सबके पीछे कोई ना कोई वजह जरूर रही होगी, लेकिन पुलिस का मानना है की इन सब हत्याओं के पीछे अवैध संबंधों की बू आती है.

अब बात यहाँ आ पहुंची है तो गौर करने वाली बात ये है की पिछले कुछ समय से जैसलमेर में ऐसा कौन आ गया जिसके पीछे हत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया जो कि इस जैसलमेर जैसे शांत वातावरण में ज़हर घोलने का कार्य कर रहा है

इसका सबसे बड़ा उदाहरण है यहाँ बाहर से आई वो महिलाएं जो शहर के विभिन्न हिस्सों में देह व्यापार का कारोबार फैला कर बैठी है, कच्ची बस्तियों में इस तरह का व्यापर आम बात हो गयी है, ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी पुलिस या प्रशासन को नहीं है , जानकारी है मगर सूत्र बताते हैं की इन महिलाओं का नेटवर्क इतना तगड़ा है की पुलिस भी इनपर हाथ डालने से घबराती है, पहले इस तरह के कार्य रात के अँधेरे में होते थे मगर आज कल तो दिन में खुलेआम देह व्यापार का कार्य होता देखा जा सकता है

गफूर भट्टा  हो बब्बरमगरा  हो, वहाँ रात दिन वासना का खेल पैसे लेकर खेला जाता है, आस पड़ोस के लोगों का तो जीना ही मुहाल हो गया है. मगर पुलिस में शिकायत करने से भी घबराने वाले लोग दबी जुबां में कहते हैं कि यहाँ तो ऐसे लोगों को भी आते देखा है जो की काफी ऊंची पहुँच वाले है तो इन महिलाओं का हौसला इतना बुलंद है कि बेचारा पडोसी किसी मामले में फंस न जाय, इससे ये शिकायत करते भी घबरा जाता है.

यहाँ के युवाओं को भटकाती ये बाहर से आई देह व्यापार करने वाली महिलाएं उन्हें इस गर्त में धकेल रही है साथ ही साथ इनका नेटवर्क भी इतना बढ़ गया है कि जोधपुर और अहमदाबाद से लडकियां लाकर यहाँ सप्लाई की जाती है , और पर्यटन सीजन में तो ये लड़कियों को होटलों और बाहर बने रिसोर्ट में भी भेजती है जिससे बाहर से आने वाले पर्यटक को सीधे लडकियां सप्लाई की जाती है ,

गफूर भट्टे पर भी एक बाहर से आई महिला इस तरह का कारोबार करती है मज़े की बात तो ये है की वो जिस मकान में रहती है वो पूरा अतिक्रमण है. ना तो उसका कोई सर्वे हो रखा है और न ही कोई पट्टा है, मगर फिर भी वो महिला धड़ल्ले से वहाँ रह रही है और बेखोफ देहव्यापार का कारोबार चला रही है.

नगरपरिषद जहाँ एक और गरीबों के झोंपड़े तोड़ रहा है वहीँ, इस महिला के अतिक्रमण पर उसकी कोई नज़र भी नहीं जाती है और पुलिस तो यहाँ आये ही क्यों? क्योंकि यहाँ तो उसका कोई काम ही नहीं है, कहने वाले कहते हैं कि कई खाकी वर्दी वाले भी यहाँ रात को मंडराते दिखाई पड़ते हैं, मगर कोई कार्रवाई करने नहीं अपितु……! सुनने में तो ये भी आया था की एक बुजुर्ग को इस महिला ने काफी समय से ब्लैकमेल कर रखा था जो कि अभी इन दिनों यहाँ आया था और उसने बड़ी मुश्किल से इस महिला से पीछा छुड़ाया. क्योंकि इस महिला ने उससे काफी रकम भी ऐंठ रखी थी और काफी लम्बे समय से ब्लैकमेल भी कर रही थी बेचारे उस बुजुर्ग के लड़के ने यहाँ आकर उससे पीछा छुड़ाने के लिए जिन लोगों से मध्यस्थता करवाई वो भी सब लोगों को पता चल चुकी है कि कौन लोग थे. इन महिलाओं को आप जिला कलेक्ट्रेट में भी बिना हिचक घुमते देख सकते है.

गौरतलब है की जैसलमेर में बढ़ रहे अपराधों में इस तरह के देह व्यापार का भी बहुत अहम् हाथ है ये एक तरह की वो काली स्याही है जो धीरे धीरे समाज में एक बिमारी की तरह फ़ैल रही है अगर समय रहते इसे रोका ना गया तो इसका हश्र क्या होगा ये कोई नहीं जानता.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.