/स्वास्थ्य मंत्री से बड़ा सरकारी डाक्टर.

स्वास्थ्य मंत्री से बड़ा सरकारी डाक्टर.

-नारायण परगाई||

देहरादून. उत्तराखण्ड में मंत्री से बड़े अधिकारी बेलगाम होकर मंत्रियो के आदेशों को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं. यह पहला मामला नही है कई मामलो में सरकार के मंत्रियो की अधिकारी एक नही सुन रहे. प्रदेश के मुख्यमंत्री भी अधिकारियो की इस चाल से खासे परेशान हैं लेकिन प्रदेश में अधिकारीयों की कमी के चलते सीएम का हंटर अभी चलता हुआ नही दिख रहा. उत्तराखण्ड में अधिकारियों की एकजुटता सरकार के मंत्रियो को भी कोई काम नही करने दे रही.Letter

ताजा मामला उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य महकमे का सामने आया है, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी के आदेशों को महानिदेशक स्वास्थ्य द्वारा किस तरह ठेंगा दिखाते हुए नजर अंदाज कर डाला है जबकि स्वास्थ्य मंत्री ने तत्काल प्रभाव से तबादला आदेश जारी किए थे. इसे अधिकारियो की लौबिंग कहें या फिर मंत्री से बड़ा डाक्टर जिसकी तूती पूरी महकमे में बोलती हुई दिख रही है. गरदपुर मे तैनात चिकित्साधिकारी डा0 इनायत उल्ला खान कार्यप्रणाली एवं जनता के साथ दुर्व्यवहार के संबंध में शिकायतें प्राप्त हो रही थी और इतना ही नहीं बीते कुछ समय पूर्व स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जब गदरपुर के सरकारी अस्पताल में छापा मारा गया था तब भी कई अनियमितताएं मौजूद मिली थीं और इसके अलावा यह भी पता चला था कि सरकारी डाक्टर के पद पर रहते हुए डा0 खान अस्पताल के बजाए अपने प्राइवेट क्लीनिक में मरीजो को देखते हैं और अस्पताल के अन्य कर्मचारियो के साथ भी दुर्व्यवहार किया जाता है. जिसकी शिकायत सीएमओ से उधमसिंहनगर से लेकर डीजी स्वास्थ्य से की गई थी, लेकिन जांच की खाना पूर्ति कर सीएमओ से भी अपने पाले से गेंद को आगे सरका दिया जबकि बीते कुछ समय पूर्व डा0 खान द्वारा अवकाश के दौरान सरकारी आदेश लिखे गए थे और देहरादून में प्रशिक्षण कार्यक्रम तक मे भाग में लिया गया था इसकी शिकायत गदरपुर अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट विकास ग्वाड़ी द्वारा भी की गई थी और अस्पताल में कई कई अनियमितताओ की तरफ भी इशारा किया गया था लेकिन बाद में जब सीएमओ उधमसिंहनगर द्वारा फार्मासिस्ट को गदरपुर से तबादला किए जाने की धमकी दी गई तो विकास ने डा0 खान से समझौता कर लिया और अधिकारियो को भी यह बताया कि अब अस्पताल में ठीक तरीके से चल रहा है.

surendra singh negiजबकि इस बात के तमाम सबूत मौजूद हैं कि फार्मासिस्ट विकास द्वारा डा0 खान पर आरोप ही नही लगाए गए बल्कि जमीन के एक मामले में लाखो रूपए लिए जाने की खुलासा किया गया था. लेकिन सवाल यह उठ रहा था कि क्या स्वास्थ्य महकमे का एक मंत्री इतना लाचार हो गया है कि उसके आदेशों को स्वास्थ्य महकमे का महानिदेशक भी मानने से इनकार कर रहा है इससे साबित हो जाता है कि उत्तराखण्ड में कांग्रेस की सरकार के कैबिनेट मंत्रियो की हैसियत अधिकारियो की नजर में कितनी है. जब इस बारे में स्वास्थ्य महकमे के डीजी से उनके दूरभाष नम्बर पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होने कई दिनों तक अपना फोन नही उठाया जबकि यह तबादला आदेश 11 दिसम्बर 2012 को जारी किया गया है जिसमें डा. खान को चमोली या पिथौरागढ़ में तत्काल प्रशासनिक आधार पर करने के आदेश स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र नेगी द्वारा किए गए हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.