/बालिका आश्रम में 11 नाबालिग आदिवासी छात्राओं के साथ दुष्कर्म…

बालिका आश्रम में 11 नाबालिग आदिवासी छात्राओं के साथ दुष्कर्म…

दिल्ली बस सामूहिक दुष्कर्म के सदमे से देश अभी उबर भी नहीं पाया था कि छत्तीसगढ राज्य में कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक में एक आदिवासी छात्रावास में रहने वाली 11 छात्राओं के साथ सामूहिक बलात्कार के सनसनीखेज मामला प्रकाश में आ गया है. कांकेर की कलेक्टर अलरमेल मगई डी एवं पुलिस अधीक्षक राहुल भगत ने पत्रकारों से इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में दो लोगो के विरुद्ध बलात्कार का मामला दर्ज करने के बाद आरोपी शिक्षाकर्मी और चौकीदार को गिरफ्तार कर लिया गया है.  महिला एवं बाल विकास अधिकारी ने छात्राओं के बयान दर्ज किए और इसके बाद कलेक्टर को सौंपी गई रिपोर्ट में घटना की पुष्टि की. इसके बाद कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने इसके बाद छात्रावास का दौरा किया और पुलिस ने बलात्कार का मामला दर्ज कर लिया.

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कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लाक के झलियामारी गांव में स्थित आदिवासी कन्या आश्रम में 46 छात्राएं रहती हैं. जिनकी उम्र महज पांच से बारह साल की है, जो पहली से पांचवी तक अध्ययनरत है. इन बच्चों को पढ़ाने वाले एक शिक्षाकर्मी मनु गोटी और चौकीदार दीनानाथ नागे यहां रहकर पढ़ने वाली 11 नाबालिग आदिवासी छात्राओं के साथ लंबे समय दुष्कर्म जैसा घिनौना अपराध करते आ रहे हैं. और बच्चों को मारपीट कर किसी को नही बताने धमकाते रहे जिससे की मामले के खुलासा आज तक नही हो सका. लेकिन मामले का खुलासा तब हुआ जब शनिवार को अचानक निरीक्षण पहुंची कलेक्टर ए मंगई डी को आश्रम के पीड़ित  नाबालिक आदिवासी छात्राओं  ने रो-रोकर अपने साथ हो रहे इस घिनौने कृत्य की जानकारी दी. जिसे सुनकर अवाक कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल शिक्षाकर्मी और चौकीदार के खिलाफ  थाने रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश जारी किये. हरकत में आई पुलिस ने तत्काल चौकीदार को हिरासत में ले लिया जबकि जानकारी मिलने के बाद आरोपी शिक्षाकर्मी फरार हो गया. कलेक्टर ने बताया कि एक कन्या आश्रम के बच्चों के साथ शिक्षाकर्मी और चौकीदार द्वारा गलत काम करने की जानकारी मिली जिसकी तत्काल थाने में रिपोर्ट दर्ज कर चौकीदार दीनानाथ नागे को गिरफतार कर लिया और उसके निशनदेही पर फरार शिक्षाकर्मी मनु गोटी की तलाश में जुटी. कलेक्टर ने कहा कि लगातार आश्रम अधीक्षक और शिक्षाधिकारियों की मिटिंग लेकर आवश्यक निर्देश दिये जाते हैं. निरीक्षण के दौरान अन्य अधिकारियों के द्वारा पंजी चेक किया जाता है. इन सब के बाद इतनी बढ़ी घटना का आज तक खुलासा ना होने को गंभीरता से ले रही हैं. आश्रम के बच्चों को सुरक्षित स्थान पर उनके परिजन के साथ रखने की व्यवस्था की जा रही है. इस मामले की पहले से जानकारी होने पर शिकायत नही करने वाले तथा अन्य संलिप्त लोगों पर सख्ती से कार्यवाही की जायेगी.)

इस बीच राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को लेते हुए जांच के लिए एक तीन सदस्यीय टीम का गठन कर दिया है. भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी नीतू कमल.संयुक्त संचालक आदिम जाति कल्याण एवं स्थानीय पुलिस अधिकारी रीना कु जूर इस टीम के सदस्य होंगे.सरकार ने इन्हे तत्काल जांच शुरू करने का आदेश दिया है. मामले की जांच कर रहे एडीएसपी सीडी टंडन ने बताया कि  झलियामारी ग्राम के आश्रम के नाबालिक आदिवासी छात्राओं के साथ शिक्षाकर्मी और चौकीदार द्वारा अश्लील हरकत एवं दुष्कर्म की शिकायत मिली है. आरोपी चौकीदार को हिरासत में लेकर मामले की जांच की जा रही है. पीडित बच्चों को परिजन के साथ बुलाया जाकर पुछताछ कर ब्यान दर्ज किया जा रहा है. मामले की जांच की जा रही है. फरार शिक्षाकर्मी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जायेगा तथा इस मामले में संलिप्त सभी पर कठोर कानुनी कार्यवाही की जायेगी.

भाजपा के क्षेत्रीय सांसद सोहन पोटाई ने भी घटना की निन्दा करते हुए कहा कि दिल्ली की घटना के बाद जब पूरा देश उद्वेलित था उस समय भी स्थानीय प्रशासन का चौकस नही रहना दुर्भाग्यपूर्ण है.

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बालिकाओं पर शारीरिक अत्याचार की घटना को गंभीरता से लिया है. उन्होंने इसे  निंदनीय बताते हुए कहा है कि इसमें लिप्त पाए गए किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. जो भी दोषी पाया जाएगा,  उसके खिलाफ कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक और जिला कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को इस घटना से पीड़ित बालिकाओं की सुरक्षा का समुचित ध्यान रखने और पूरे मामले की तत्परता से जांच करने के निर्देश दिए हैं.

केन्द्रीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण रायमंत्री चरणदास महंत ने घटना को बहुत शर्मनाक करार दिया है. डा.महंत ने घटना पर यहां प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा इसकी जितनी निन्दा की जाय कम है. जिन आदिवासियों के बूते पर रमन सिंह की सरकार गत नौ वर्षो से सत्ता में है उनकी रक्षा करने में वह पूरी तरह से विफल रही है. उन्होने कहा कि जिले के प्रभारी मंत्री तथा भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नैतिकता के नाते तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए. उन्होने कहा कि इतनी बडी घटना की जिम्मेदारी एवं जवाबदेही से जिले के अफसर भी बच नही सकते है. रमन सरकार को जल्द जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.