/हिमाचल विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर हंगामेंदार चर्चा..

हिमाचल विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर हंगामेंदार चर्चा..

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान गर्माया सदन..सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच हुई हल्की नोंक-झोंक…सत्तापक्ष ने पूर्व सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए आयोग की उठाई मांग….

-धर्मशाला से अरविन्द शर्मा||

तपोवन में चल रहे प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन राज्यपाल बीते दिन दिए गए अभिभाषण पर सत्तापक्ष द्वारा लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान चर्चा में कुछ देर के लिए सदन में माहौल गर्मा गया. सदन में चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच हल्की नोंक झोंक हुई. किन्नौर से काग्रेंस विधायक जगत सिंह नेगी द्वारा सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया गया जिसका ज्वालामुखी से काग्रेंस विधायक संजय रतन ने समर्थन किया. C M Himachalसदन में धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विधायक जगत सिंह नेगी ने अभिभाषण पर बोलते हुए कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में भ्रष्टाचार और भू-माफिया का बोलबाला रहा. उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के हर वर्ग के साथ अन्याय हुआ. प्रदेश का खजाना खाली हो चुका है तथा पूर्व सरकार के कार्यकाल में प्रदेश का कर्जा 26 हजार करोड़ तक पंहुच गया. उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार सिर्फ अपने राजनीतिक प्रतिद्वदिंयों खासकर काग्रेंस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मामले बनाने में ही मष्गूल रही जबकि प्रदेश विकास के मामले में 20 साल पीछे चला गया. उन्होंने कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर भी कई झूठे मामले बनाए गए जिनसे वह पूरी तरह बेदाग होकर बाहर आए हैं. नेगी ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में लोगों को कुशासन और भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नही मिला. सरकार को उस दौरान मिले अवार्ड को उन्होंने क्रिकेट की तरह मैच फिक्सिंग बताते हुए कहा कि यह अवार्ड भी फिक्सिंग के तहत ही लिए गए. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में जो भी भ्रष्टाचार और भूमि सौदे हुए हैं उनकी जांच के लिए आयोग का गठन किया जाये तथा इन मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक  कोर्ट में लाए जाएं ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके.

चर्चा में हिस्सा लेते हुए विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण काफी संक्षिप्त है तथा इसमें सरकार की नीतियों और योजनाओं का कोई खास उल्लेख नही है. उन्होंने सत्तापक्ष के सदस्यों के पूर्व भाजपा सरकार पर लगाए गए आरोपों को नकारते हुए कहा कि पूर्व सरकार ने प्रदेश को हर क्षेत्र में विकास के रूप में एक माडल राज्य बनाया है. प्रदेश के हर वर्ग के लिए पिछले पांच सालों में सरकार ने कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं षुरू की जिसका फायदा लोगों को मिला है. उन्होंन कहा कि पूर्व सरकार ने जो भी मामले बनाए वह विजीलैंस की जांच के आधार पर बनाए गए. उन्होंने कहा कि जहां तक बात खजाना खाली करने की है तो पिछले पांच साल के दौरान कर्मचारियों को ही 8.5 करोड़ के लाभ दिए गए तथा इस दौरान कर्जा सिर्फ 4 हजार करोड़ ही बढ़ा है जो कि 2003-08 तक पूर्व काग्रेंस की सरकार में 22 हजार करोड़ था.

धूमल ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने घोषणापत्र में बेरोजगारों को जो बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही है उसे बजट सत्र से लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने जहां मजदूरों की दिहाड़ी 75 से 150 रूपए की वहीं सामाजिक सुरक्षा पैंशन में वृद्धि की. इसके साथ ही हर वर्ग के लोगों को राहत दी गई. उन्होंने सत्तपक्ष के अवार्ड फिक्सिंग के आरोपों पर बोलते हुए कहा कि अगर फिक्सिंग हुई भी तो उन्होंने देश के राष्ट्रपति के साथ की गई जो गर्व की बात है क्योंकि वह ईनाम राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति से प्रदेश को मिले.

चर्चा में काग्रेंस के विधायक नंद लाल ने हिस्सा लेते हुए कहा कि पूर्व सरकार की उपलब्धियां सिर्फ विज्ञापनों में ही दिखी जबकि हकीकत में विकास के नाम पर कुछ नही हुआ. उन्होंने कहा कि सड़कों की हालत खस्ता रही. अस्पतालों में डाक्टरों और अन्य स्टाफ की कमी और प्राथमिक स्कूलों को बंद करने का काम किया गया. जबकि पांच सालों के अंदर 14 निजी विश्वविद्यालय खोल दिए गए. कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई रही. मंहगाई और कालाबाजारी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाए गए. उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय में कुशासन ही जनता को मिला.

हिलोपा के विधायक महेश्वर सिंह ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए रेणुका उपचुनाव के दौरान पवित्र झील से शराब की 300 पेटियों को छुपाने तथा झील की पवित्रता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस कुकृत्य के बावजूद पूर्व सरकार के कार्यकाल में दोषियों को पकड़ा नही गया. उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय में प्रदेश में भ्रष्टाचार और भू-माफिया का ही राज रहा. उन्होंने बंदरों के आंतक और अवारा पशुओं के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि बंदरों की नसबंदी करने के बाद भी प्रदेश में इनकी संख्या बढ़ी है जिससे इसमें भी कोई धपला होने का अंदेषा है तथा इसकी एस.आई.टी का गठन कर जांच होनी चाहिए. उन्होंने बंदरों के निर्यात की भी मांग उठाई ताकि लोगों की परेशानियां दूर हो सकें. उन्होंने प्रदेश में लोकपाल बनाए जाने की भी मांग सदन में उठाई. उन्होंने कहा कि अवारा गउएं रोज सड़कों पर मर रही हैं उनके संरक्षण के लिए कोई ठोस योजना बने तथा सड़कों पर छोड़ने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के लिए कानून बनाया जाए. चर्चा में विधायक रणधीर शर्मा और रवि ठाकुर ने भी हिस्सा लिया.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.