/पाकिस्तान ने सरहद पर बनाए हज़ार से अधिक बंकर ..फिर पाक सैनिको के भी काटो सिर …

पाकिस्तान ने सरहद पर बनाए हज़ार से अधिक बंकर ..फिर पाक सैनिको के भी काटो सिर …

-चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर पाकिस्तान के सैनिको द्वारा भारतीय सीमा में घुस कर जिस कायरता से भारतीय सैनिको के सिर काटे उससे पूरा देश उद्वेलित  हें. पाकिस्तान अपनी इस कायराना हरकत की साफगोई में जिस कुटिलता से यह कह रहा हें कि भारतीय सैनिको ने भारतीय सरहद में बंकर निर्माण बनाये इस कारण बदला लेने की नीयत से इस कृत्य को अंजाम दिया .

.पाकिस्तान द्वारा नो मेन्स लेंड पर निर्मित जीरो लाइन प्लेटफोर्म
.पाकिस्तान द्वारा नो मेन्स लेंड पर निर्मित जीरो लाइन प्लेटफोर्म

इस हिसाब से भारतीय सेना को इस जैसे कृत्य को बहूत पहले अंजाम दे देना चाहिय था ,क्योंकि भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के आंकड़े कहते हें पाकिस्तान ने ना केवल अपनी सरहद पर बल्कि नो मेन्स लेंड  पर भी एक हज़ार से अधिक बंकरो का निर्माण अन्तराष्ट्रीय नियमो का उल्लंघन कर बने .

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ो पर नज़र डाले पाकिस्तान सेना द्वारा भारत पकिस्तान की सरहद पर आठ सौ छियासी बंकरो का निर्माण अवेध रूप से कराया वहीं दो सौ मोर्चो का निर्माण , तीन सौ अठानुवे तोवारो का निर्माण एक सौ त्यालिस अग्रिम चौकियो का निर्माण अवेध रूप से कराया , भारतीय सेना , सीमा सुरक्षा बल द्वारा समय समय पर पाकिस्तानी सेना और रेंजरो की बैठकों में इन निर्माणों का जमकर विरोध किया गया , मगर पाकिस्तानी सेना और रेंजरो ने भारत की आपति को हमेशा अनदेखा किया. तो फिर भारतीय सेना को भी पाकिस्तान की कार्यवाही की तर्ज पर बड़ी कार्यवाही को अंजाम देना चाहिए.

पश्चिमी राजस्थान से लगती लगभग ग्यारह सौ किलोमीटर लम्बी तारबंदी के आस पास सैंकड़ों की तादाद में निर्माण कराया ,वहीं बाड़मेर जिले के मुनाबाव रेलवे स्टेशन के हिक सामने स्थित पाकिस्तान के जीरो लाइन प्लेटफार्म के पास पकिस्तान ने अवेध रूप से मोर्चा बना रखा हें ,और तो और पाकिस्तान ने तो भारत की छाती पर रेलवे प्लेटफार्म भी अवेध रूप से बनाया जिसका राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारतीय सेना और सुरक्षा बल द्वारा विरोध दर्ज कराया मगर पाकिस्तान की सेहत पर कोई असर नहीं पडा ,अब जबकि जम्मू में पाकिस्तान्बी सैनिको द्वारा भारतीय जवानो के सिर महज इसलिए कलम किये की भारतीय जवानो ने सरहद पर बंकरो का निर्माण कराया अब जबकि खुलासा हो चूका हें की पाकिस्तान ने भी पिछले पांच सालो में सरहद पर अवेध रूप से सुलह सौ से अधिक अवेध निर्माण कार्य कराये हें ,फिर भारतीय सेना पाकिस्तानी सैनिको के सर कलम क्यों नहीं करती.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.