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दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला – शोभना, अमित चोपड़ा, शशिशेखर इत्यादि की गर्दन पर गिरफ्तारी की तलवार..

By   /  January 14, 2013  /  1 Comment

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-मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट||

करीब 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले से जुड़ी दो याचिकाओं में 17 दिसंबर,12 को पटना उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक आदेश आनेके बाद मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, नई दिल्ली के प्रबंधन में बेचैनी बढ़ गई है । मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड के प्रबंधन ने अचानक कोतवाली मुंगेर के कांड संख्या- 445।2011 के नामजद अभियुक्त प्रकाशक और मुद्रक अमित चोपड़ा को अब विधिवत कंपनी से अलग कर दिया है।hindistan

अमित चोपड़ा की जगह अजय कुमार जैन नए प्रकाशक और मुद्रक बने

वर्ष 2013 में प्रथम सप्ताह में मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड के नए प्रकाशक और मुद्रक अजय कुमार जैन बनाए गए हैं। दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण में अंतिम पृष्ठ पर प्रिंट लाइन में अब मुद्रक और प्रकाशक के रूप में अजय कुमार जैन का नाम छपना शुरू हो गया है । यूं प्रकाशक और मुद्रक अमित चोपड़ा के कंपनी से अलग होने की खबर पटना उच्च न्यायालय के आदेश आने के बाद से ही उड़ रही थीं।

200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले के नामजद अभियुक्त शोभना भरतिया, अध्यक्ष, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड। के द्वारा कोतवाली,मुंगेर- कांड संख्या-445।2011 के नामजद अभियुक्त मुद्रक और प्रकाशक अमित चोपड़ा को कंपनी से अलग करने से संबंधित जानकारी कांड के सूचक मन्टू शर्मा ने मुंगेर के पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन को मिलकर दे दी है । श्री शर्मा ने पुलिस अधीक्षक को यह भी सूचित किया है कि अभियुक्त शोभना भरतिया ने इस कांड के अन्य अभियुक्त अकू श्रीवास्ताव को पटना से हटा कर नई दिल्ली स्थित अपने अन्य कार्यालय में पदस्थापित कर दिया है ।

शोभना, अमित चोपड़ा, शशिशेखर और अन्य के गर्दन पर गिरफतारी की तलवार लटकी

: पटना उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति माननीय अंजना प्रकाश ने अपने 17 दिसंबर के ऐतिहासिक फैसले में मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-445।2011 के अनुसंधान में इस अवस्था में हस्तक्षेप करने से साफ इन्कार कर दिया । माननीय न्यायमूर्ति ने इस कांड के सभी नामजद अभियुक्तों के खिलाफ एफ0आई0 आर0 रद्द करने वाले सभी आवेदनों पर भी संज्ञान लेने से साफ इन्कार कर दिया ।
इस ऐतिहासिक आदेश में माननीय न्यायमूर्ति ने मुंगेर पुलिस को दैनिक हिन्दुस्तान के200 करोड़ केसरकारी विज्ञापन घोटाला में अनुसंधान तेज करने और इस आदेश की प्राप्ति के तीन माह के अन्दर पुलिस अनुसंधान पूरा करने का भी आदेश निर्गत कर दिया । न्यायालय ने इस आदेश की प्रति फैक्स से मुंगेर के पुलिस अधीक्षक को भेजने का भी आदेश दिया ।

पटना उच्च न्यायालय के 17 दिसंबर के इस फैसले के बाद मुंगेर कोतवाली कांड संख्या-445।2011 के नामजद अभियुक्त श्रीमती शोभना भरतिया, अध्यक्ष, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्सलिमिटेड, नई दिल्ली, अमित चोपड़ा, पूर्व प्रकाशक, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड,नई दिल्ली, शशि शेखर, प्रधान संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान,नई दिल्ली, अवध कुमार श्रीवास्तव उर्फ अकू श्रीवास्तव, संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान,पटना संस्करण,पटना और विनोद बंधु, स्थानीय संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, भागलपुर संस्करण, भागलपुर के गर्दन पर गिरफतारी की तलवार लटक गई है।

बिहार पुलिस अब नामजद अभियुक्तों को किसी भी क्षण गिरफ्तार कर सकती है । सभी नामजद अभियुक्त भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420।471 और 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धाराएं 8।बी।, 14 और 15 के अन्तर्गत आरोपित हैं।

पटना उच्च न्यायालय ने पूर्व के अपने आदेशों में अंतिम आदेश आने तक सभी नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगा दी थीं। अब पटना उच्च न्यायालय के अंतिम आदेश आ जाने के बाद अभियुक्तों के विरूद्ध कानूनी काररवाई पर लगी रोक स्वतः समाप्त हो गई है ।

सभी नामजद अभियुक्तों पर आरोप है कि उन लोगों ने केन्द्र और राज्य सरकारों के सरकारी विज्ञापनों को पाने के लिए बिना निबंधन वाले दैनिक हिन्दुस्तान अखबार को सरकार के समक्ष निबंधित अखबार के रूप में पेश किया और जालसाजी और धोखाधड़ी करके लगभग 200 करोड़ का सरकारी विज्ञापन विगत 10 वर्षों में अवैध ढंग से प्राप्त कर सरकरी राजस्व की लूट मचा दीं।

इस बीच,मुंगेर के पुलिस उपाधीक्षक ए0के0 पंचालर और पुलिस अधीक्षक पी0 कन्नन ने अपनी पर्यवेक्षण-टिप्पणियों में सभी नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध लगाए गए सभी आरोपों को दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर‘‘ प्रथम दृष्टया सत्य‘‘ घोषित कर दिया है ।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. ASHOK SHARMA says:

    मीडिया की बिरादरी मै मैंने देखा है कि एक लौबी कम करती है जो कि संपादक की अनुपस्थिति का इंतजार करती है और वही आज शायद यहाँ दिखाई देता है

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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