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तो क्या पी.सी.ज्वैलर्स से ऑपरेट होता था सैक्स रैकेट का कारोबार…?

By   /  February 3, 2013  /  5 Comments

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-नारायण परगाई||

देहरादून. देहरादून में पकड़ा गया अब तक का सबसे बड़ा सैक्स रैकेट जाने माने पी.सी.ज्वैलर्स के यहाँ से संचालित हो रहा था लेकिन पुलिस की थ्योरी मे इस नाम को बेपर्दा होने से इसलिए बचा लिया क्योकि इसमें बड़े कई बड़े सफेद पोश नेताओ के दामन दागदार थे. देहरादून पुलिस इस रैकेट को भांडा फोड़ करने का जो फार्मूला तैयार कर पाई उसमें कई तरह के छेद नजर आए जबकि इस गिरोह का मुख्य सरगना परदे के पीछे से पुलिस के साथ मिलकर लाखो का खेल खेल गया. राजपुर रोड स्थित पी.सी.ज्वैलर्स में हाई फाई कॉल गर्ल्स को दिखाने के साथ साथ वहां इनकी डीलिंग के लिए सबसे मुफीद जगह साबित होती थी.pc-jewellers

पांच सितारा थीम पर बने पी.सी.ज्वैलर्स के यहां किट्टी पार्टियां भी आयोजित की जाती हैं और कई बड़े घरानो की महिलाएं इनमें शिरकत करती हैं लेकिन पुलिस ने जिस कमल अग्रवाल को इस सेक्स रैकेट का सरगना करार दिया है उसने पुलिस के दावों की हवा निकाल दी ळै. कमल अग्रवाल का कहना है कि वह तो सिर्फ मोहरे के तौर पर इस्तेमाल होता था जबकि इस धन्धे में कई सफेद पोश नेताओ को मनोज गुप्ता लड़कियां सप्लाई किया करता था. इतना ही नहीं उसने इस बात का भी राज फाश किया कि मनोज गुप्ता की पत्नी रेनू गुप्ता पी.सी.ज्वैलर्स देहरादून में बतौर काम करने के साथ साथ इस गोरख धन्धे में मिली हुई है और पी.सी.ज्वैलर्स के ही कई अन्य लोग भी इसमं मिले हो सकते हैं. हाइ प्रोफाइल सैक्स रैकेट का देहरादून पुलिस ने 30 जनवारी को खुलासा कर 9 लड़कियों सहित कुल 21 लोगो को गिरफतार किया था लेकिन सूत्र बताते हैं कि इस खेल का मास्टर माइंड मनोज गुप्ता लाखो की डील कर बच निकला क्योकि उसे ऐसे सफेद पोश नेताओं का संरक्षण प्राप्त था जो राजनेता  बतौर सरकार में भी अपना रसूख रखते हैं. कमल अग्रवाल के इस खुलासे के बाद पुलिस की कहानी सिर्फ उसे बचाती हुई दिख रही है, हालाकि जनपद के पुलिस कप्तान केवल खुराना का साफ कहना है कि यदि इसमें कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल हुआ तो उसे गिरफतार किया जाएगा. लेकिन सवाल यह उठ रहा ळै कि जब इस गैंग का भांडा फोड़ करने के लिए देहरादून की एस.ओ.जी टीम व नेहरू कालोनी की पुलिस को  लगाया गया था तो आखिर किसके इशारे पर मनोज गुप्ता को नही पकड़ा गया.

पुलिस अभी तक इस मामले में पकड़ी गई एक गाड़ी के मालिक का नाम पता नही हासिल कर पाई हैं जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान उठ रहे हें. इस पूरी कहानी में एसओजी टीम की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही ळै जिसे देखते हुए पुलिस कप्तान ने इस खेल के राज को तलाशना शुरू कर दिया है क्योंकि जनपद के पुलिस कप्तान को इस मामले में कई जानकारियो से अवगत नही कराया गया. जबकि सूत्रो की खबरो पर यकीन करें तो इस मामले में  कुछ लोगो द्वारा मनोज गुप्ता को बचाने लाखो का खेल खेला गया ळै. इस बारे में जब पी.सी.ज्वैलर्स के देहरादून मैनेजर भारत मेहता से जानकारी ली गई तो उन्होने पी.सी.ज्वैलर्स में रेनू गुप्ता के काम करने की बात तो स्वीकार की लेकिन ज्यादा कुछ बताने से इनकार कर दिया जबकि मनोज गुप्ता कई बार फोन पर सही जानकारी नही दे पाए. अब देखना होगा कि इस सैक्स रैकेट में पुलिस क्या पी.सी.ज्वैलर्स के यहां की वीडियो फुटेज खंगालती है या नही क्योकि पुलिस ने इस रैकेट में पकड़े सरगना कमल अग्रवाल ने खुद को सरगना ना बताकर मनोज गुप्ता को सरगना बताया है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

5 Comments

  1. pc jewelers aapke saath……

    9 kadam aap rakho, aur 1 kadam pcj……. hahahahhaaaaaaaa 😉

  2. yes to itney badey barand ko duoob marney wali bat hai.

  3. Satya Gupta says:

    kuchh bhi ho sakta hai.

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