Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

देहरादून मीडिया सेंटर में कैद कर दिए पत्रकार

By   /  February 6, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-नारायण परगाई||

देहरादून के सचिवालय स्थित मीडिया सेन्टर में आज दोपहर पत्रकारों को कमरे में कैद कर दिया गया, जिससे वहां मौजूद कई पत्रकारों में हड़कम्प मच गया. हुआ यूं कि रोजाना की तरह सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकार अपना काम निपटा रहे थे और उसके बाद करीब आधे घंटे तक पत्रकारों के कमरों में बाहर से कुंडी लगाकर उन्हें बंद कर दिया गया.dehradun

सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसने पत्रकारों को कैद करने की कोशिश की थी, जिसका खुलासा होना जरूरी है. ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो पाए. यदि यह किसी की शरारत थी तो क्या मीडिया सेंटर में आने वाले इन शरारती तत्वों पर सूचना विभाग कोई नकेल कस पाएगा.

सूचना विभाग के कई अधिकारी मीडिया सेंटर को पत्रकारों के आराम का स्थल मानते हैं उनकी नजर में यहां आने वाले निकम्मे पत्रकार जिनका खबरों से कोई वास्ता नहीं होता वह रोजाना चाय की चुस्कियों का आनन्द लेते हैं. वर्तमान में मीडिया सेंटर की बदहाली भी किसी से छुपी नहीं है. यहां पर लगी फैक्स मशीन को विभाग द्वारा हटा दिया है क्योंकि यहां कई पत्रकारों ने मीडिया सेंटर को ही अपना ऑफिस बना लिया है.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: