Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

गहलोत ने फिर दी वसुंधरा को गीदड़ भभकी

By   /  February 12, 2013  /  3 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को गीदड़ भभकी देते हुए कहा है कि हम प्रदेश का माहौल खराब नहीं करना चाहते, कोई गिरफ्तारी नहीं चाहते, वरना तमिलनाडु व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्रियों जैसा हश्र यहां भी होता। नागौर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने वसुंधरा के ही दो दिन पहले दिए गए बयान पर पलट कर कहा कि वसुंधरा के खिलाफ खूब मामले हैं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से सरकार को भी नोटिस मिले हैं। माथुर आयोग पर लोकायुक्त जांच की बात कही गई है। इनक्वायरी कमीशन बना है, खूब जांचें हुई हैं।raje_gehlot
ज्ञातव्य है कि नागौर के मूंडवा के वीर तेजा शिक्षण एवं शोध संस्थान में वसुंधरा राजे ने कहा था कि कांग्रेस सरकार ने मेरे खिलाफ कई जांच आयोग बैठाए, फाइलें भी खोलीं, मुझ पर कई आरोप लगाए गए, जांच भी कराई गईं, लेकिन एक रुपए का आरोप साबित नहीं कर पाई। मैं अग्निपरीक्षा में खरी उतरी हूं। यह मेरे प्रदेश की जनता का भरोसा ही है।
असल में दोनों के बीच इस प्रकार के शब्द बाण पूर्व में भी चल चुके हैं और ऐसा करते-करते कांग्रेस सरकार के चार साल पूरे हो गए। गहलोत का पुराना घिसा-पिटा रिकार्डर सुन-सुन कर राजस्थान की जनता भी उकता गई है। वसुंधरा भी बार-बार चुनौति देती रही हैं कि भ्रष्टाचार का एक भी आरोप साबित करके दिखाओ और गहलोत भी हर बार ऐसा ही बयान जारी करते रहे, मगर एक बार भी आरोप साबित नहीं कर पाए। इसका परिणाम ये है कि चुनाव नजदीक देख कर एक बार फिर वसुंधरा शेरनी की तरह दहाड़ रही हैं। उनकी इस दहाड़ का गहलोत पर कोई असर होता हो या नहीं, मगर कांग्रेसी नेताओं को मलाल रहा है कि अकेले इसी मुद्दे को लेकर वसुंधरा भारी पड़ रही हैं।
आपको याद होगा कि पूर्व उप प्रधानमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी की जनचेतना यात्रा के राजस्थान दौरे के दौरान भी कांग्रेस और भाजपा के बीच चले आरोप-प्रत्यारोप के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को यह चुनौती मिली थी कि वे वसुंधरा राजे सरकार के दौरान हुए जिस भ्रष्टाचार को लेकर वे बार-बार भाजपा पर हमले करते हैं, उन्हें साबित भी करके दिखाएं। वसुंधरा ने गहलोत के गृह नगर में ही उन्हें चुनौती दी कि केवल आरोप क्या लगाते हो, उन्हें साबित भी करके दिखाओ। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि गहलोत ने उन्हें घेरने के लिए माथुर आयोग तक बनाया, कोर्ट में भी गए, मगर आज तक आरोप साबित नहीं कर पाए हैं। पूरी सरकार आपके पास है, सरकारी दस्तावेज आपके पास हैं, भ्रष्टाचार हुआ था तो साबित क्यों नहीं कर पा रहे। जाहिर तौर पर उनकी बात में दम है। तब भी गहलोत पलट कर कोई जवाब नहीं दे पाए थे। सरकार की यह हालत देख कर खुद कांग्रेसी नेताओं को बड़ा अफसोस रहा कि गहलोत सरकार इस मोर्चे पर पूरी तरह से नकारा साबित हो गई है। उन्होंने बाकायदा इसका इजहार भी किया। उन्हें बड़ी पीड़ा रही है कि वे वसुंधरा को घेरने की बजाय खुद ही घिरते जा रहे हैं। वसुंधरा के दहाडऩे से उनके सीने पर सांप लौटते हैं। वे सियापा करते रहे हैं कि सरकार ने वसुंधरा के खिलाफ की जांच ठीक से क्यों नहीं करवाई? कांग्रेसी नेताओं का ये भी कहना है कि भले ही तकनीकी पहलुओं के कारण माथुर आयोग की कवायद बेकार हो गई, मगर इसका मतलब ये नहीं है कि भ्रष्टाचार तो नहीं हुआ था। कोर्ट ने वसुंधरा को क्लीन चिट नहीं दी है। कदाचित उनकी बात में कुछ सच्चाई भी हो, मगर न केवल वसुंधरा की ओर से, अपितु कांग्रेस ने भी एक तरह से गहलोत को चुनौती दे दी थी कि वसुंधरा पर आरोप लगाने मात्र से कुछ नहीं होगा, उसे साबित भी करके दिखाइये। ऐसे में गहलोत का एक बार वही पुराना राग अलापना यही जाहिर करता है कि वे फिर गीदड़ भभकी दे रहे हैं।
आरोप-प्रत्यारोप से अलग हट कर भी देखें तो गहलोत का ताजा बयान बड़े गंभीर सवाल खड़े करता है। वो यह कि ऐसी क्या वजह है कि वे वसुंधरा की गिरफ्तारी नहीं चाहते? क्या केवल उनकी गिरफ्तारी से माहौल खराब होने की आशंका से घबरा कर ही वे आरोप सिद्ध नहीं कर रहे हैंï? तो क्या माहौल शांत रखने मात्र के लिए वसुंधरा पर लगाए गए आरोपों को दबा कर रखेंगे? कहीं ऐसा तो नहीं कि उनके जादू के पिटारे में कुछ है नहीं, कोरा यूं ही डरा रहे हैं? क्या आरोप दबाने की वजह ये तो नहीं कि वसुंधरा भी उनका कोई कच्चा चिट्ठा खोल देंगी, जिसका कि वे कई बार ये पूछ कर जिक्र कर चुकी हैं कि गहलोत बार-बार मुंबई क्यों जाते हैं? और सबसे अहम सवाल ये कि इस प्रकार कथित रूप से सबूत होने के बाद भी उन्हें दबाने के लिए क्या गहलोत को दोषी नहीं माना जाना चाहिए? आशंका ये भी होती है कि कहीं ये नूरा-कुश्ती तो नहीं? ऐसे में अगर आप पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस व भाजपा एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं, तो क्या गलत है?
-तेजवानी गिरधर

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

अजमेर निवासी लेखक तेजवानी गिरधर दैनिक भास्कर में सिटी चीफ सहित अनेक दैनिक समाचार पत्रों में संपादकीय प्रभारी व संपादक रहे हैं। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश सचिव व जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अजमेर जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। अजमेर के इतिहास पर उनका एक ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। वर्तमान में अपना स्थानीय न्यूज वेब पोर्टल संचालित करने के अतिरिक्त नियमित ब्लॉग लेखन भी कर रहे हैं।

3 Comments

  1. आप सही कह रहे है, शुक्रिया

  2. mahendra gupta says:

    सच तो यही है कि गहलोत की यह सब कोरी भभकी ही है,जब भी गहलोत अपने आप को कमजोर महसूस करते हैं ,अपने पिटारे से ऐसे बयां दे कर जनता का धयान बांटने की कोशिश करते हैं.वास्तव में अपनी असफलताओं को छिपाने का एक प्रयास मात्र है.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पाकिस्‍तान ने नहीं किया लेकिन भाजपा ने कर दिखाया..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: