/क्या सी.बी.आई. कर्म सिंह हत्याकांड में कर रही है लीपापोती?

क्या सी.बी.आई. कर्म सिंह हत्याकांड में कर रही है लीपापोती?

कांग्रेस की एजैंट होने के आरोपों से घिरी सी.बी.आई. आखिरकार क्यों नही करती कांग्रेसी विधायकों से पूछताछ…

-अनिल लाम्बा||

करनाल,दो साल पहले गांव कंबोपूरा के पूर्व सरपंच कर्म सिंह हत्याकांड के असली दोषियों का कोई भी चेहरा कांग्रेस सरकार जनता के सामने लाने में असफल तो रही, लेकिन अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जांच में जुटी सी.बी.आई. भी कर्म सिंह हत्याकांड में क्या लीपापोती कर रही है?jiley ram sharma

इस पर प्रदेश के लोगों की नजर है. विपक्षी पार्टियों द्वारा सी.बी.आई. को पहले से ही कांग्रेस की एजैंसी बताया जा चुका है. इन आरोपों से घिरी सी.बी.आई. आखिरकार कांग्रेसी विधायकों से पूछताछ क्यों नही कर रही. यह अपने आप में एक बड़ा सवाल बना हुआ है. अभी तक सी.बी.आई. ने न तो प्रदेश के o.p. jainपूर्व परिवहन मंत्री तथा मौजूदा विधायक ओम प्रकाश जैन से बात की ओर न ही मौजूदा विधायक और पूर्व संसदीय सचिव जिले राम शर्मा से. माना जा रहा है कि जिस तरह सी.बी.आई. कर्म सिंह हत्याकांड प्रकरण को लेकर दिशा अपना रही है उससे आने वाले दिनों में यह कहना मुश्किल है कि कर्म सिंह के असली हत्यारे पकड़ में होंगें. सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिरकार सी.बी.आई. ने मृतक कर्मसिंह के परिजनों से तो पूछताछ कर ली और पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों से बातचीत भी की गई, लेकिन हत्या के आरोपों से घिरे दोनों कांग्रेसी विधायकों से पूछताछ करने की जहमत नही उठाई गई.

क्या सी.बी.आई. के अधिकारी यह बता सकते है कि आखिरकार दोनों विधायकों से सिरे से पूछताछ क्यों नही की जा रही. क्योंकि पूर्व में क्राईम ब्रांच भी दोनों विधायकों से पूछताछ कर चुकी है. काबिलेगौर है कि मंगलवार को सी.बी.आई. की टीम करनाल में उस स्थान पर पहुंची थी. जहां कर्मसिंह घायल अवस्था में पड़ा था. इसके अलावा सी.बी.आई. काफी समय पहले भी जांच के लिए करनाल आ चुकी है, लेकिन सी.बी.आई. जिस तरह घटनास्थल के आसपास झाडिय़ों को साफ कर वक्त बर्बाद करती रही उससे साफ जाहिर है कि हत्याकांड की असली जांच अभी तक अटकी हुई है.

जब तक आरोपों से घिरे विधायकों से कड़ी पूछताछ नही की जाती तब तक इस मामले की सच्चाई सामने आना भी मुश्किल है. काबिलेगौर है कि घायल कर्मसिंह को अस्पताल जब ले जाया गया था तो उसने दम तोड़ दिया था. उसके पेट पर सूईयों के निशान मिले थे. सरकारी एजैंसी क्राईम ब्रांच ने दोनों विधायकों को बड़ी राहत देते हुए यह कह कर क्लीन चिट दी थी कि इस हत्याकांड में दोनों का कोई हाथ नही है, लेकिन हाईकोर्ट ने यह सवाल उठाया था कि आखिर आरोप दोनों पर क्यों लगे और पेट पर सूईयों के निशान कैसे आए. जिसके बाद यह जांच सी.बी.आई. को सौंपी गई.

मंगलवार को करनाल में पहुंची सी.बी.आई. ने कई घंटे झाडिय़ों में व्यर्थ कर दिए. उसे जो चाकू बरामद हुए उससे भी कुछ हासिल होने वाला नही लग रहा क्योंकि चाकूओं का प्रयोग भले ही हत्या के मामले में हुआ हो, लेकिन यह चाकू इतने पुराने हो गए है कि यह पता लगाना भी नामुकिन है कि इन चाकूओं का प्रयोग हत्या में लाया गया था या नही, लेकिन सी.बी.आई. के अधिकारी अभी भी कांग्रेसी विधायकों से पूछताछ न करके उन स्थानों पर समय खराब कर रहे है जहां से कुछ हासिल होने वाला नही है. इस हत्याकांड के दोषियों को लेकर पूरे प्रदेश के लोगों की निगाहें इस पर टिकी है. अब देखना यह होगा कि वास्तविक जांच से भटकी सी.बी.आई. हाईकोर्ट में पेश होकर क्या सबूत सामने लाती है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.