/अनुष्का रविशंकर भी बचपन में हुई थी यौन उत्पीडित…

अनुष्का रविशंकर भी बचपन में हुई थी यौन उत्पीडित…

दिवंगत सितारवादक पंडित रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर ने सनसनीखेज राज फ़ाश  किया है कि बचपन में वो भी यौन उत्पीडन का शिकार हुई हैं और उनका यौन उत्पीडन उनके माता पिता के सबसे विश्वसनीय व्यक्ति ने किया. यौन उत्पीडन का यह सिलसिला काफी लम्बे समय तक चलता रहा.anushka ravishankar

अनुष्का ने वेबसाइट (चेंजडॉट ओआरजी) के जरिए महिलाओं और अपने फैंस से अपील करते हुए कहा है कि इस वेलेंटाइंस डे पर उठें, बाहर निकलें, डांस करें और इस तरह की हिंसा खत्म करने के लिए आवाज उठाएं. इस वेबसाइट पर अनुष्का शंकर का एक वीडियो भी मौजूद है, जिसमें वो उन महिलाओं की ओर से बात करती दिखाई दे रही हैं.

अनुष्का ने अपनी आपबीती का भी जिक्र किया कि “मैं स्वयं भी बचपन में कई सालों तक इसी प्रकार यौन और भावनात्मक उत्पीडन सहती रही हूं. वो भी एक ऎसे व्यक्ति के हाथों, जिस पर मेरे माता-पिता आंख मूंदकर भरोसा करते थे.

बडे होते-होते मैंने भी ज्यादतर अन्य महिलाओं की तरह कई तरह की छेडखानी का सामना किया है, जिनसे मैं निपटना नहीं जानती थी.” लंदन में बसी अनुष्का कहती हैं कि “एक महिला के रूप में मैं हमेशा डरी हुई रहती हूं.

रात को अकेले घूमने से या ऎसे किसी व्यक्ति को जवाब देने से भी, जो भले ही मुझसे सिर्फ समय पूछ रहा हो, उससे डर जाती हूं.” अनुष्का ने कहा है कि “अब मैं दिल्ली गैंगरेप पीडिता और उसके जैसी अन्य महिलाओं के लिए उठ रही हूं. मैं अपने भीतर की उस बच्ची के लिए जाग रही हूं, जो न अपनी आपबीती भुला पाएगी और न माफ कर पाएगी. इसलिए आइए हम खुद को और इस दुनिया को बदल डालें.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.