Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

वैलेन्टाइन डे पर जम कर बेचे सेक्स टॉयज

By   /  February 15, 2013  /  7 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

प्रेम के प्रतीक माने जाने वाले वैलेन्टाइन डे को बाजारू शक्तियां किस कदर भुनाती हैं इसका ताज़ा नमूना था कल बड़े शहरों की गिफ्ट शॉप्स पर बिक रहे अश्लील सेक्स टॉयज. वैसे भारत में कानूनी तौर पर सेक्स टॉयज नहीं बेचे जा सकते मगर 2843_81वैलेन्टाइन डे के मौके पर कई दुकानदारों ने कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए खुले आम इन सेक्स टॉयज की न केवल सजावट ही की बल्कि जम कर सेक्स टॉयज बेचे भी.

2839_42

अहमदाबाद से खबर है कि वैलेंटाइन डे पर गिफ्ट्स की दुकानों में युवाओं की जबर्दस्त भीड़ थी, वहीं बड़ी संख्या में लोग इन गिफ्ट्स का विरोध करने सड़कों पर उतरे हुए थे. यहां बात सिर्फ अश्लील ग्रीटिंग्स तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि कई दुकानों में तो बिंदास रूप से (बतौर गिफ्ट आयटम) सेक्स ट्वॉयज भी बेचे जा रहे थे.

जब इसकी सूचना शहर के जागृत लोगों तक पहुंची तो विरोध की आग कई जगह फूट पड़ी. प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि कई दुकानों में तो सेक्स ट्वॉयज खुलेआम ही नजर आ रहे थे और लड़के ही नहीं, बल्कि लड़कियां भी ऐसे गिफ्ट्स खरीद रही थीं. वैलेंटाइन डे गिफ्टस के नाम पर कई जगह ऐसी सामग्री बिकती नजर आईं.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

7 Comments

  1. mam shivni jia kya likhua sajhha miy nhiya a raha hia.

  2. वेलेन्टाइन डे है हि अश्लीलता फैलाने का दिन तो भला क्यों कोई पीछे रहेगा!

  3. वैलेंटाइन के नाम पर अश्लीलता फैलाने और अश्लीलता का प्रदर्शन करने वालो का तो विरोध होना ही चाहिए , लेकिन कोई सभ्य तरीके से इजहार -ऐ- मोहब्बत कर रहा हो तो उसपर लाठी डंडे बरसाना कही से भी जायज नहीं है….

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

जौहर : कब और कैसे..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: