/पूनम पांडे ने अपनी बिकनी उठाकर ट्विटर पर टांक दी….

पूनम पांडे ने अपनी बिकनी उठाकर ट्विटर पर टांक दी….

न्यूड फोटोशूट से हमेशा चर्चा में रहने वाली मॉडल और अभिनेत्री पूनम पांडे ने अपनी फिल्म नशा हिट करवाने के लिए ट्विटर के ज़रिये वैलेंटाइन डे पर नशा फिल्म में पहनी गयी बिकिनी को प्रतियोगिता पर लगा दिया.14feb_poonam_4

फिल्‍म नशा के साथ बॉलीवुड में कदम रखने जा रहीं पूनम पांडे ने अपनी बिकनी उठाकर ट्विटर पर टांक दी, तो लोग उसे पाने के लिये बेताब हो गये. लोगों को नहीं पता कि पूनम अपने जिस्‍म और बिकनी का इस्‍तेमाल सिर्फ अपनी फिल्‍म नशा को हिट कराने के लिये कर रही हैं. पूनम ने पहले तो अपनी बिकनी को नीलाम करने का फैसला किया.उन्‍होंने ट्विटर पर लिख दिया कि वो अपनी बिकनी नीलाम करना चाहती हैं.14feb_poonam_2 तो उनके हजारों फैंस ऐसे खुश हो गये, जैसे वो बिकनी उन्‍हें मिल ही गई हो. अब पूनम ने ट्विटर पर हैश टैग डाल दिया है #IfIGetPoonamPandeysBikini यानी अगर मुझे पूनम पांडे की बिकनी मिल जाये तो… इस हैश टैग पर ढेरों कमेंट आ रहे हैं. जाहिर सी बात है ऐसे हैश टैग पर कमेंट साफ-सुथरे तो हो नहीं सकते. शैडी मुंबई ने लिखा भगवान ही जाने पूनम की बिकनी पर न जाने कितने लोगों के फिंगर प्रिंट पहले से ही होंगे. हैदराबाद भगत लिखते हैं पूनम पांडे कुछ नहीं सिर्फ द हर्ट लॉकर की नकल कर रही हैं. उसमें भी ब्रा और पैंटी की नीलामी की गई थी. आदिल खान ने लिखा अगर मुझे पूनम की बिकनी मिल जाये तो मैं सड़क के किनारे फेंक दूंगा. अंकुर ढाका लिखते हैं कि उन्‍हें अगर पूनम की बिकनी मिली तो वो कमाल रशीद खान को गिफ्ट कर देंगे, ताकि वो उसकी सुगंध ले सकें. ट्विटर पर कई लोग पूनम की बिकनी के लिये पागल भी दिखे. सागर शर्मा ने तो बीस बार सिर्फ लव, लव लिखा वहीं राज कहते हैं पूनम का नशा 100 बोतलों से भी ज्‍यादा है.poonam-pandey-in-bikini

पूनम ने कहा कि मैं अपने फैन्स से बहुत प्यार करती हूं और मैं उनके लिए यह वैंलेंटाइन डे कुछ स्पेशल बनाना चाहती थी. एक लकी विजेता को वह बिकनी सूट मिलेगा जिसे मैंने फिल्म ‘नशा’ में पहना था. मेरे फैन्स के लिए यह उन्हें एक प्यार का तोहफा होगा. अब पूनम की बिकनी किसको मिलेगी, यह तो मालूम नहीं, लेकिन पूनम की लोकप्रियता ट्विटर पर और बढ़ गई है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.