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अखिलेश राज में डीएसपी की हत्या..

By   /  March 3, 2013  /  2 Comments

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद से कानून व्यवस्था किस कदर चरमरा गई है इसकी बानगी यह है कि ग्रामीणों की भीड़ ने कुंडा के डीएसपी जिया उल हक की हत्या कर एक एएसआई और एक गनर को बुरी तरह से जख्मी कर डाला.

डीएसपी हथिगवां क्षेत्र के बलीपुर में शनिवार रात प्रधान नन्हें यादव की हत्या के बाद भड़की हिंसा पर काबू पाने के लिए फोर्स के साथ वहां गए थे.dspkilled

इससे पहले गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी के घर पर हमला बोलकर आग लगा दी. पुलिस और ग्रामीणों के बीच संघर्ष और फायरिंग में प्रधान के भाई की भी मौत हो गई. मरने वाला प्रधान प्रदेश सरकार के कुख्यात मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया का समर्थक बताया जाता है.

घटनाक्रम के मुताबिक बलीपुर के प्रधान नन्हें यादव (40) शनिवार रात गांव के चौराहे पर चाय की दुकान पर समर्थकों के साथ बैठे थे. बातचीत के बाद जब घर जाने के लिए उठे तो सामने से आया एक युवक उनके सीने में गोली मारकर भाग निकला. फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े. उन्हें अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने प्रधान को मृत घोषित कर दिया. प्रधान की हत्या की जानकारी मिलते ही राजा भैया समर्थकों का जमावड़ा लगने लगा. गुस्साए लोगों ने पाल बस्ती स्थित आरोपी के घर पर हमला बोल दिया और उसे फूंक दिया.

इसके बाद हालात काबू करने के लिए बड़ी मात्रा पुलिस बल भेजा गया. पुलिस ने लोगों को हटाना चाहा, तो लोग उससे भिड़ गए. पुलिस और ग्रामीणों के बीच संघर्ष में प्रधान के भाई सुरेश कुमार की मौत हो गई. देर रात तक ग्रामीणों व पुलिस में फायरिंग जारी थी. मदद के लिए गई पुलिस देर रात गांव के अंदर दाखिल होने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी. वहीं गांव के अंदर फंसे पुलिस वालों का कोई पता नहीं था. रात 11 बजे सीओ कुंडा जिया उल हक का शव मिला. उनका सर्विस रिवाल्वर गायब था. ध्यान रहे कि प्रधान पर दो दिन पहले भी हमला हुआ था. इसके बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इससे लोगों का गुस्सा अधिक था.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. जिस दिन अखिलेश कुर्सी पर बैठे थे , उसी दिन इसका अंदाज लग गया था.अतएव इस पर चिंता करने की जरूरत नहीं.मायावती,मुलायम, और अखिलेश सरकारों के यह सब पर्याय हैं. कोई और जन हित कारी काम हो रहा हो तो उसकी चर्चा करना अच्छा लगता है.

  2. mahendra gupta says:

    जिस दिन अखिलेश कुर्सी पर बैठे थे , उसी दिन इसका अंदाज लग गया था.अतएव इस पर चिंता करने की जरूरत नहीं.मायावती,मुलायम, और अखिलेश सरकारों के यह सब पर्याय हैं. कोई और जन हित कारी काम हो रहा हो तो उसकी चर्चा करना अच्छा लगता है.

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