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सुब्रत राय: पानी में फंसा मगरमच्छ..( दो )

By   /  March 17, 2013  /  2 Comments

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-कुमार सौवीर||

सेबी का कहना था कि यह गैरकानूनी उगाही है और ऐसी उगाही के सार्वजनिक मुद्दों को नियंत्रित निवेशकों की सुरक्षा के लिए बने नियमों का खुलासा किये बिने किया गया। इसके पंचाट भी इसी तरह का फैसला कर चुका था। नवंबर- 2010 को ऐसे फैसले के बाद सुब्रत राय ने शेखी बघारी कि ”सहारा समूह के पास 30 जून-10 तक 1,09,224 करोड़ रूपये की संपत्तियां हैं।subrato roy सुब्रत राय ने खिल्ली उड़ायी कि सेबी तो 35 हजार करोड़ की वसूली की बात करती है, सहारा समूह जब चाहे किसी भी दिन सुबह दस बजे तक इससे ज्यादा रकम अदा कर सकता है। लेकिन ऐसा कभी भी नहीं हो पाया। वजह यह कि सहारा के ऐसे दावे हमेशा हकीकत से कोसों दूर ही रहे।

लेकिन बात इतनी ही होती तो कोई बात नहीं। दरअसल सहारा ने समय-समय पर जो दावे किये, विज्ञापन किये वह भी भ्रामक और धोखाधड़ी से भरे हैं। मसलन, राय एक बार बोले कि तरल निवेश, नगदी और बैंक में जमा राशि, सावधि जमा राशियां (19,456 करोड़ रूपये), कर्जदार, कर्ज व अग्रिम राशि, आयकर रिफंड, अन्य मौजूदा पूंजी (7,629 करोड़ रूपये), जमीन, निर्माण, चल रहा काम, खत्म हो चुके, स्टॉक और सावधि पूंजी (82,139 करोड़ रूपये) हमारे पास मौजूद है। इतना ही नहीं, सेबी के आदेश पर सहारा ने अखबारों-चैनलों में बेहिसाब विज्ञापन जारी करते हुए ऐलान किया कि वह वक्तशुदा समय से छह महीना पहले ही सारे भुगतान कर देगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। और मामला सुप्रीम कोर्ट पर आ गया। दरअसल, सेबी को पता चला था कि आइपीओ जारी करने का मन बना रही सहारा समूह की कंपनी सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड ने 30 सितंबर, 2009 को सेबी को दी अपनी प्रस्तावना में अपने समूह के बारे में कई बड़े मसलों पर गलत सूचनाएं दी थीं। सहारा ने जब ऐतराज किया तो कानून मंत्रालय ने सहारा के पक्ष में राय दी। लेकिन सेबी अपने तर्क पर अड़ा रहा। नवंबर, 2010 में उसने एक अंतरिम आदेश में सहारा समूह की कंपनियों एससीएससीएल और एसएचआइसीएल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए। जवाबदेही बनायी गयी जनता से पैसा उगाहना बंद करके सुब्रत राय, वंदना भार्गव, रवि शंकर दुबे और अशोक रॉय चौधरी सरीखे प्रमोटरों को जनता से पैसा उगाहने से रोका जाए।

इसके पहले सहारा की एक घोषणा से वित्त-जगत बौखला गया कि सहारा इंडिया फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एसआइएफसीएल) कंपनी के पास जून, 2011 तक 73,000 करोड़ रूपये की नकदी है। चौंक जाना लाजमी था ही, क्यों कि किसी गैरबैंकिंग कम्पनी के बारे में यह दावा अविश्वसनीय रूप से बड़ी रकम है। जाहिर है कि यह मसला झूठ का था। फिर एक और चौंकाने वाली खबर आयी कि इसके पहले ही सुब्रत राय ने 3,250 करोड़ रूपये अदा कर लंदन का एक मशहूर और बेमिसाल होटल खरीद लिया था। इसको लेकर भी जमकर विवाद शुरू हो गया।

कुछ हो, लेकिन सहारा इंडिया और सुब्रत राय के मसले पर मामला बुरी तरह फंस गया है। नोटों का माहिर जादूगर पहली बार कानून के फंदे में बुरी तरह ऐसा फंसा है कि इस बार निजात मुमकिन नहीं दीखती। न्यायायिक कार्रवाइयों के इतिहास में यह पहला मौका रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के सर्वोच्च न्यायाधीश ने सीधे शीर्षस्थ बार एसोसियेशन के अध्यक्ष को भरी अदालत में फटकार लगायी और कहा कि आप जैसे लोगों को सहारा जैसी कम्पनियों की पैरवी करने के पहले कई-कई बार सोचना चाहिए। ( जारी )

(सौजन्य: मेरीबिटिया.कॉम)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. ASHOK SHARMA says:

    सरकार और सरकार के दामाद देश के ये उद्दोग पतीसब कुछ करना चाहते है मीडिया बिल्डर शिक्षा दलाली कोई भी [किसी की भी दलाली ] सब इनको ही चाहिए और दूसरा करना चाहे तो आपत्ति भी इनकोही होती है भारत के संबिधान मै क्या इनपर अंकुश लगाने का कोई नियम नहीं है यदि है तो उसको लागू करना आज बहुत आबश्यक है

  2. Ashok Sharma says:

    chit fand ka matlab chitar or fraud.

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