Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  मनोरंजन  >  Current Article

मुंबई हाईकोर्ट में ‘आरक्षण’ को मिली हरी झंडी, लेकिन जनता की अदालत का फैसला है बाकी

By   /  August 10, 2011  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिल्म ‘आरक्षण’ के रिलीज की अनुमति देते हुए फिल्म की खास स्क्रीनिंग पर भी रोक लगा दी है, लेकिन कई राज्यों में इसके रिलीज़ पर माहौल अशांत हो जाने का खतरा है। अदालत ने मंगलवार को दो वकीलों की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आरोप था कि प्रकाश झा की फिल्म ‘आरक्षण’ में आरक्षण जैसे मसले को गलत तरीके से फिल्माया गया है और इससे समाज पर गलत असर पड़ सकता है।

अदालत ने फिल्म को 12 अगस्त को ही रिलीज करने की हरी झंडी देते हुए कहा था कि उसे ऐसा कुछ नहीं दिखाई दे रहा है जिससे रिलीज पर रोक लगाई जाए। अदालत ने कहा कि रिलीज होने से पहले इसकी कोई खास स्क्रीनिंग भी नहीं होगी। अदालत के मुताबिक अगर फिल्म से माहौल बिगड़ता है तो ये राज्य सरकार के लिए कानून व्यवस्था का मामला है।

गौरतलब है कि प्रकाश झा पहले ही कह चुके हैं कि ये फिल्म किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। किसी को भी ठेस पहुंचाने का उनका कोई इरादा नहीं है। अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 22 अगस्त तय की है जबकि फिल्म 12 तारीख को ही रिलीज़ हो रही है।  इस फिल्म को लेकर कई राज्यों समेत अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग भी  विरोध कर रहा है।

उधर मद्रास हाई कोर्ट ने भी फिल्म आरक्षण पर से रोक हटा ली है। वहां इस फिल्म पर सामाजिक या राजनीतिक होने की बजाए आर्थिक विवादों के बादल छाए थे। सोमवार को फिल्म से जुड़े एक फायनैंसर ने फिल्म के निर्माता फिरोज ए नाडियाडवाला द्वारा जारी 3.75 करोड़ के एक चेक के बाउन्स हो जाने के बाद हाई कोर्ट में फिल्म पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की थी। दोनों पक्षों के मामला कोर्ट से बाहर सुलझाने और और याचिकर्ता द्वारा याचिका वापस  लेने  के बाद कोर्ट ने फिल्म के रिलीज़ पर से रोक हटा ली।

लेकिन फिल्म के उत्तरप्रदेश और राजस्थान में शांतिपूर्ण तरीके से रिलीज होने की संभावनाएं कम हैं। देश के कई राज्यों और विदेशों में भी इस फिल्म को रिलीज कर रही कंपनी रिलायंस भी यूपी के मामले में फूंक-फूंककर कदम रख रही है। कंपनी से जुड़े एक अधिकारी ने  मीडिया दरबार  को बताया कि स्थिति शुक्रवार सुबह ही पूरी तरह से स्पष्ट होगी जब ‘आरक्षण’ यूपी के सिंगल स्क्रीन और मल्टीप्लेक्सों में लगेगी। अगर जरा भी विवाद या तोडफ़ोड़ की घटना हुई तो पूरी संभावना है कि हॉल और मल्टीप्लेक्स मालिक इसे अपने यहां से हटा लेंगे।

अभी तक उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती या उनकी सरकार के किसी मंत्री की ओर से इस मुद्दे पर अधिकृत बयान नहीं आया है लेकिन माना जा रहा है कि वे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। आयोग ने सेंसर बोर्ड से रिलीज होने के पहले फिल्म दिखाने की मांग की है। निर्देशक प्रकाश झा का कहना है कि यूपी के कुछ अधिकारियों ने उन्हें फोन-कर फिल्म के रिलीज होने के पहले उन्हें दिखाने के लिए कहा है क्योंकि फिल्म का विषय संवेदनशील है।

दूसरी तरफ, यूपी से भी बुरे हालात राजस्थान में है जहां फिल्म का शांतिपूर्ण तरीके से रिलीज होना मुश्किल है। वहां ‘करनी सेना’ ने इसे किसी भी हाल में रिलीज न होने देने की बात कही है। फिल्म विश्लेषक और प्रमुख फिल्म वितरक संजय मेहता का कहना  है कि अगर फिल्म का विरोध करने वाले लोगों ने तोडफ़ोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी तो आमतौर पर मल्टीप्लेक्स वाले भीड़ की मांगें मानने के लिए तैयार हो जाते हैं।

देखना है कि फिलहाल कानूनी पेचीदगियों से बाहर निकल चुकी इस फिल्म के साथ जनता क्या सुलूक करती है।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

ये इमरजेन्सी नहीं, लोकतंत्र का मित्र बनकर लोकतंत्र की हत्या का खेल है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: