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प्रेमी के गले में बाँधा चक्की का पाट, प्रेमिका को गंजा किया…

By   /  March 31, 2013  /  2 Comments

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-दिलीप सिकरवार||

प्रेम करने की अनोखी सजा मिली उन दोनों को. भागकर प्रेम विवाह रचाने वाले युवक- युवती का प्रेम रस उतारने में सामाजिक बंधुओं ने कोई कसर नहीं छोड़ी. लड़की को सजा में अपने घने बालों से हाथ धोना पड़ा तो आशिक को चक्की का पाट गले बांध कर गाँव में घुमाया गया. lalgarthmaoistsa
घटना मध्य प्रदेश में बैतूल जिले के चिखलार गाँव की है.
यहाँ आदिवासी समाज की लड़की- लड़का सुखनंदन ने एक- दुसरे को पसंद किया और शादी की ठान ली. बकौल सुखनंदन, मुघे वो पसंद आ गई थी हमने घर से भाग कर प्रेम विवाह कर लिया. परिवार वालों का गुस्सा शांत होने तक हम बाहर ही रहे. फिर २० मार्च को गाँव लौट कर आ गये.
गाँव आना महंगा पड़ गया. सामाजिक लोगों ने हमारे साथ ऐसा सुलूक किया जैसे हमने किसी को गोली मार दी हो. हमने तो शादी की थी. मगर कोई सुनने वाला नहीं था. उन्होंने मेरे मुंडन कराया. गले में पाट ( चक्की के ऊपर वाला भारी पत्थर ) बांध कर पूरे गाँव में घुमाया. बुरा- भला भी कहा.
मेरी पत्नी को भी मारा पीटा. उसके बाल काट डाले. यह सब हमारी परम्परा के नाम पर किया गया, जबकि ऐसा कुछ नहीं होता है. आदिवासी तो एक तरह से मुक्त जीवन जीता है.
गाँव में हो रहे जुल्म की खबर मुख्यालय पहुंची तो प्रशासन अलर्ट हो गया. महिला एवं बाल विकास की पर्यवेक्षक नीरजा शर्मा ने पुलिस में रिपोर्ट की. तब आदिवासी समाज के १६ लोगों पर धारा ३४१, २९४, ५०६, ३४ के तहत मामला दर्ज किया गया. इनमे से १३ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. अब समाज के लोग एसपी से मामला वापस लेने का निवेदन कर रहे है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. D.c. Kush says:

    kya abhi hamare desh me esa hota hai – kitane sharam ki bat hai -shyad abhi shiksha ka abhav hai kuch jagah par –

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