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ऐम्पल मीडिया ने दिखाया ठगी का सैम्पल, दुहराया जा रहा है चुनावों में उम्मीदवार मुंडन का फार्मूला

By   /  August 10, 2011  /  2 Comments

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नाम:- ऐम्पल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड

पता:- 108-ए सुकृति कमप्लेक्स, डाक बंगला रोड पटना-1

नया पता:- फ्लैट नं0- 709, दीना टावर, सहयोग प्रेस लेन, एक्जविशन रोड, पटना- 1

फोन नंबर- 0612-3215923 (नंबर काम नहीं कर रहा है)

जस्ट डायल पर मौजूद फोन नंबर- +(91)-(612)-3215925

+(91)-9304095077, 8083075908 (सभी नंबर बंद हैं)

 यहां हर रोज खुद के बिजनेस को बढाने और भोले-भाले लोगों को लूटने के लिए नए-नए फार्मूले तैयार किए जाते हैं। मीडिया के चकाचौंध में उलझे युवा हों या फिर बेरोजगारी की मार झेल रहे प्रौढ अब तक सैंकड़ो लोग इसके शिकार हो चुके हैं। जब इस संस्थान ने बिहार की पावन धरती पर कदम रखा था तब यहां विधान सभा चुनाव की गहमा गहमी थी लिहाजा चैनलों और अखबारों के लिए कुबेर का खजाना खुला हुआ था।

अजय सिंह, संस्थापक

शुरूआती दौर में ऐम्पल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास Chardikla time tv और भारत देश हमारा सप्ताहिक अखबार की फ्रेंचाइजी थी।ज्ञात हो कि भारत देश हमारा दिल्ली से एक दैनिक अखबार है, जिसके मुख्य सम्पादक जगजीत सिंह दर्दी हैं। इस अखबार का आर. एन. आई नम्बर 57282/94 लिखा जाता है। दिल्ली से प्रकाशित होने वाले इस दैनिक अखबार को बिहार से साप्ताहिक के रूप में प्रकाशित किया जाने लगा जिसके लिये आर. एन. आई से स्वीकृति भी नहीं ली गई।

20000 रू से 35000 रू लेकर पूरे प्रदेश में करीब 100 से ज्यादा पत्रकार नियुक्त किए गए जिनका इस्तेमाल Chardikla time tv पर प्रसारित होने वाले प्रोग्राम चुनावी चक्कर के नाम पर पैसे वसूलने के लिए किया गया । (इसके ढेर सारे ब्यूरो चीफ, रिर्पोटर या तो स्नातक की पढाई कर रहे हैं या फिर स्नातक कर चुके हैं, लेकिन मीडिया से उनका इससे पहले कोई वास्ता नहीं रहा है)। नजीर के तौर पर, बिहार में इसके न्यूज़ हेड पुष्पेंद्र शर्मा हैं जिनके पास इससे पहले मीडिया में काम करने का अनुभव नहीं रहा है। शर्मा जी अजय सिंह एण्ड कम्पनी के मित्र हैं, राजस्थान के रहने वाले शर्मा जी एम. बी. ए करते ही न्यूज़ हेड बन गये।

राहुल आनंद, सह संस्थापक

ऐसे में चुनावी समर में अपनी किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों से लाखो रूपये की उगाही तो हुई पर प्रोग्राम चैनल पर दिखा या नहीं अगर इसे जांच के दायरे में लाया जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। हां विज्ञापन को अखबार में एक छोटा सा कोना जरूर मिला पर ये कह पाना मुश्किल है कि अखबार कितना छपा और सर्कुलेशन था या नहीं। इस बात से इन्कार नही किया जा सकता कि अखबार हैंडबिल की तरह उस हाथ तक जरूर पहुचा जिस से पैसे ऐंठे गए। उस समय ईटीवी बिहार ने संस्थान के काले कारनामों को उजागर करते हुये खबर भी चलाई थी और घटना समस्तीपुर की थी। फिलहाल Chardikla time tv और साप्ताहिक अखबार भारत देश हमारा दोनो ही बिहार में बंद है।

पुनः कुछ महीने बाद बिहार में पंचायत चुनाव की बयार बहनी शुरू हुई तो ठगों ने भी अपना चोला बदल लिया। अब उनके पास टीवी99 की फ्रेंचाइजी आई। पुराने लोग जो इनकी मनसा को भांप गए थे, सो उन्हे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और फिर बहाली की नई प्रक्रिया शुरू की गई। फिर कुछ लोगों को पत्रकार बनाने के नाम पर चूना लगाया गया। पंचायत चुनाव पर आधारित कार्यक्रम खुली बहस के नाम पर भी वही किया गया जो विधान सभा चुनाव के दौरान चुनावी चक्कर के नाम पर किया गया। ये प्रोग्राम भी शायद ही कभी प्रसारित हुआ।

सुनने में तो ये भी आ रहा है कि जिस टीवी99 के नाम पर आज भी वसूली चल रही है उसकी फ्रेंचाइजी कभी एम्पल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास थी ही नहीं। खैर अब कुछ दिनों में इनका खुद का अखबार भी बाजार में आने वाला है जिसकी अर्जी अनुमंडलाधिकारी पटना सदर के यहां जमा की जा चुकी है। आने वाले इस अखबार के संपादक होंगे प्रहलाद कुमार जिनके पास पत्रकारिता का अक्षर ज्ञान भी नहीं है और हाल ही में एम.बी.ए कर लौटे हैं। साथ ही एक दूरभाष निर्देशिका एम्पल वेज (तैयार हो रहे एम्पल वेज का सारा डेटा उलट-पुलट कर चर्चित पटना परिक्रमा जिसके सम्पादक गुंजन अग्रवाल हैं से कॉपी पेस्ट किया जा रहा है), यह जांच का विषय है कि कितने लोग एम्पल वेज के लिये डेटा इकट्ठा करने में लगाये गये और इस काम में लगाये गये व्यक्तियों ने कितने संस्थानों और लोगों से सम्पर्क किया। इसे प्रकाशित करने और नये चैनल जी न्यूज़ की फ्रेंचाइजी लेने की बात चल रही है। शायद ये तैयारी पटना में होने वाले नगर निगम चुनाव में लूट मचाने की है। देखना ये है कि लूट – पाट में इस बार कितनी सफलता हाथ लगती है।

बताते चलें कि यह संस्थान होर्डिंग-बैनर लगवाने का भी काम करती है। जिन्हें अपना होर्डिंग पटना में लगवाना होता है उनके साथ तो ये गोरखधंधा नहीं कर पाते हैं लेकिन जब अन्य शहरों में होर्डिंग का ठेका लिया जाता है तो शायद ही कभी लगवाया जाता हो। पटना स्थित श्रेया मेरीन नामक संस्थान के साथ भी इन लोगों ने यही किया पटना के अलावे किसी अन्य शहर में बेचारे की होर्डिंग लगी ही नहीं और झांसा देकर पैसा वसूल लिया गया। ओम प्रकाश नूरावासी जो इनके कॉरपोरेट दलाल हैं इनका बखूबी साथ देते हैं।

गौरतलब है की इस संस्थान को चलाने वाले चार युवक अजय सिंह , राहुल आनंद , परमजीत सिंह और प्रहलाद कुमार (नोट- अजय सिंह को छोड़ बांकी के तीनों फ्रेशर हैं जिनके पास मीडिया का कोई अनुभव नहीं है।) हैं । ये चारों रहने वाले तो बिहार के ही हैं लेकिन पुणे में रह कर मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। सबसे खास बात तो ये है कि जब इन्होंने संस्थान की नींव रखी थी, उस वक्त ये चारो कुंवारे थे। लेकिन वक्त की नजाकत का फायदा उठाते हुए प्रहलाद कुमार और परमजीत सिंह ने जल्द हीं अपने-अपने घर बसा लिए। अजय सिंह भी कतार में हैं, देखें बेचारे राहुल आनंद का क्या होता है।

(एम्पल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड) Chardikla time tv + :- भारत देश हमारा -. बिहार विधान सभा चुनाव। tv99 :- बिहार में पंचायत चुनाव। G News :- . पटना नगर निगम चुनाव।

 नोटः- इस पर गौर करें और अंदाजा लगाएं कि एम्पल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड का मकसद क्या है ?

(समाचार पटना के एक भुक्तभोगी पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित। इस ऐम्पल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड का मेरठ स्थित इसी नाम के दूसरे संस्थान से कोई लेना-देना नहीं है। मीडियादरबार.कॉम ने ऐम्पल मीडिया के संचालकों से संपर्क करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन उनके वेबसाइट पर मौजूद किसी भी नंबर या पते पर कोई नहीं मिला। अगर पाठकों को कोई शिकायत या जानकारी शेयर करनी हो तो वे कमेंट के जरिए ऐसा कर सकते हैं। -मॉडरेटर)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. abhay pandey says:

    khabar to 16 aane sach hai lekin is bimari kaa ilaaj jald se jald kerna jaruri hai

  2. Dilip Sharma says:

    ये ऐम्पल का सैम्पल पब्लिक भी देख चुकी है और नेता भी.. अब इनकी दाल यहाँ नहीं गलने देंगे बिहार के पत्रकार.. अब तो इनका डिब्बा बंद करना ही होगा.. जो लोग भी इससे ठगे गए हों सामने आएं और इस पर केस ठोकें.

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