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पहले बेटियाँ बचा लो फिर बेटे पैदा करना

By   /  April 3, 2013  /  Comments Off on पहले बेटियाँ बचा लो फिर बेटे पैदा करना

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2011 की जनगणना में बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया कि 2001 की जनगणना की तुलना में 2011 में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। यह सत्य भी दिखता है क्योंकि 2001 में प्रति एक हजार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 933 थी जो 2011 में बढ़कर 940 तक जा पहुंची। यह आंकड़ा एक पल को भले ही प्रसन्न करता हो किन्तु इसके पीछे छिपे कड़वे सत्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। 2001 की जनगणना में छह वर्ष तक की बच्चियों की संख्या 927 (प्रति हजार पुरुषों पर) थी जो 2011 में घटकर 914 रह गई है। यही वो आंकड़ा है जो हमें महिलाओं की बढ़ी हुई संख्या पर प्रसन्न होने की अनुमति नहीं देता है। सोचने की बात है कि जब इस आयु वर्ग की बच्चियों की संख्या में बढ़ोत्तरी नहीं हो सकी है तो महिलाओं की संख्या में इस वृद्धि का कारण क्या रहा?Save The Girl Child

यदि 2011 की जनगणना के आँकड़े बच्चियों के संदर्भ में देखें तो उनके भविष्य के प्रति एक शंका हमें दिखाई देती है। 2001 की जनगणना में जहां देश के 29 राज्यों में शून्य से छह वर्ष तक की आयुवर्ग की बच्चियों की संख्या 900 से अधिक थी वहीं 2011 में ऐसे राज्यों की संख्या 25 रह गई। राज्यों में बच्चियों के प्रति सजगता की स्थिति यह रही कि मात्र आठ राज्य ही ऐसे रहे जिनमें बच्चियों की संख्या में 2001 के मुकाबले 2011 में वृद्धि देखने को मिली, इनमें भी चार राज्यों में बच्चियों की संख्या 900 के आँकड़े को छू भी नहीं पाई।  इसे नीचे दी गई सारणी से आसानी से समझा जा सकता है।

 

0-6 वर्ष आयु वर्ग की बच्चियों की संख्या में वृद्धि वाले राज्य (प्रति 1000 पर)

राज्य ++++++++++ 2001+++ 2011+++ वृद्धि

पंजाब ++++++++++ 798++++ 846 +++ 048

चंडीगढ़ +++++++++ 845++++ 867 +++ 022

हरियाणा ++++++++ 819++++ 930 +++ 011

हिमाचल प्रदेश +++++ 896+++ 906 ++++ 010

अंडमान-निकोबार +++ 976+++ 966 ++++ 009

मिजोरम +++++++++ 964+++ 971 ++++ 007

तमिलनाडु ++++++++ 942+++ 946 ++++ 004

गुजरात ++++++++++ 883 +++ 886 +++ 003

(Source: Provisional Population Totals India : Census 2011

Official Website : Ministry of Home Affairs : Office of the Registrar General & Census Commissioner, India

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About the author

बुन्देलखण्ड के उरई-जालौन में जन्म। बुन्देलखण्ड क्षेत्र एवं बुन्देली भाषा-संस्कृति विकास, कन्या भ्रूण हत्या निवारण, सूचना का अधिकार अधिनियम, बाल अधिकार, पर्यावरण हेतु सतत व्यावहारिक क्रियाशीलता। साहित्यिक एवं मीडिया क्षेत्र में सक्रियता के चलते पत्र-पत्रिकाओं एवं अनेक वेबसाइट के लिए नियमित लेखन। एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन। सम्प्रति साहित्यिक पत्रिका ‘स्पंदन’ और इंटरनैशनल रिसर्च जर्नल ‘मेनीफेस्टो’ का संपादन; सामाजिक संस्था ‘दीपशिखा’ तथा ‘पीएचड होल्डर्स एसोसिएशन’ का संचालन; निदेशक-सूचना अधिकार का राष्ट्रीय अभियान; महाविद्यालय में अध्यापन कार्य। सम्पर्क - www.kumarendra.com ई-मेल - [email protected] फेसबुक – http://facebook.com/dr.kumarendra, http://facebook.com/rajakumarendra

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