/मंत्री के आदेश पर बनेगी पत्रकारों की कुंडली..

मंत्री के आदेश पर बनेगी पत्रकारों की कुंडली..

-दिलीप सिकरवार||

मध्य प्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग को उन्ही के मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने फरमान भेजा है. जिसके मुताबिक अब तहसील स्तर तक के कलम घिसने वाले भाइयों की कुंडली तैयार की जाये. इससे अहसास हो रहा है कि चुनाव करीब हैं और ऐसे में मीडिया की अनदेखी सरकार को भारी न पड़ जाये, इसलिए पत्रकारों की जमात सूचीबद्ध कर ली जाये. Laxmikant_Sharma0
शायद शर्मा जी को यह मालूम नहीं है कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है. शोषण का शिकार है. अखबार मालिको का सताया है. एक पत्रकार किसी आम व्यक्ति की समस्या के प्रति तो गंभीरता से लड़ता है, किन्तु उसका हक सदैव मारा जाता है. मगर बेचारा चौथा स्तम्भ हमेशा खामोश रहता है.
पत्रकारों की याद ऐसे भला कैसे आ सकती है. जो जनसंपर्क विभाग पत्रकारों को प्रेसनोट भेजने में लकवाग्रस्त दिखता है, वो इतना फिक्रमंद भला कैसे हो गया? खबर मिली कि मंत्री जी की उपस्थिति में राजधानी में एक बैठक हुई. इसी का असर चिठ्ठी के रूप में पत्रकारों तक पहुंचा. जिसका अर्थ यह है- तहसील स्तर से लेकर जिले में कार्य करने वाले पत्रकारों की सूचि तैयार हो रही है. इसलिए वाकई लिखने वाले पत्रकारों को अपनी पूरी जानकारी यानि नाम, संस्थान का नाम, परिचय पत्र की कॉपी, इ मेल पता, मोबाइल नंबर, आवास का पता दर्ज करना होगा. आश्चर्य की बात है की प्रदेश के जनसंपर्क दफ्तरों में शायद ही पत्रकारों का ब्यौरा होगा. लेकिन मंत्रीजी के आदेश से कम से कम पत्रकार तो सूचीबद्ध हो जायेंगे. हालाँकि इसमें पत्रकारों का कितना लाभ होगा यह तो भगवन जाने. हाँ! चुनावी विज्ञप्ति जरूर आपको मिल जायंगी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.