Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

किराये के भवन में बन रहे पत्रकार, पहचान तलाशता कर्मवीर विद्यापीठ

By   /  April 6, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

mlcशेख शकील||

मध्य प्रदेश में पत्रकारिता के पितृ  पुरुष  कहे जाने वाले पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कर्मभूमि खंडवा में उनके नाम पर राजनीति करने वालो ने अपनी दूकान तो ज़माली लेकिन उनके नाम से चल रहे पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय खंडवा में ही अपनी पहचान तलाश रहा है ।
 माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विस्तार परिसर कर्मवीर विद्यापीठ की स्थापना के लगभग 12 वर्षो बाद भी एक अदद भवन की तलाश है। आज भी विद्यापीठ किराये के भवन में संचालित हो रहा है। इतने वर्षो में ना तो विद्यापीठ को स्वयं का भवन मिल पाया और ना ही भूमि। दादा के नगर में उनके नाम के पत्रकारिता कालेज की ये दुगर्ति समझ से परे है। इतने लंबे समय बाद भी यूनिवर्सिटी के अधिकारी और प्रशासन भी इस विषय पर कुछ नहीं कर पाया।

माखनलाल जी चतुर्वेदी की याद में पत्रकारिता की नई पौध को तैयार करने के उद्देश्य से16 जनवरी 1991 में उनके नाम पर प्रदेश में पत्रकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी और माखन दादा के नगर खंडवा में विश्वविद्यालय के विस्तार परिसर कर्मवीर विद्यापीठ को सन 2000 में स्थापित किया गया था। आशा थी कि खंडवा में जल्द ही एक बड़ा और सुव्यवस्थित भवन तैयार होगा जहां पत्रकारिता की नई पीढ़ी आकर पत्रकारिता के गुर सीखेगी। लेकिन सन 2000 में एक होटल के कमरे से आरंभ हुआ ये सफर किराये भवन पर आकर रूक गया। हर बार कुलपति और रजिस्ट्रार अपनी प्राथमिकताओं में खंडवा के कर्मवीर को रखते है भवन बनाने के बड़े-बड़े वादें करते है लेकिन परिणाम सिफर ही नजर आते है।

पारिवारिक पत्रकारिता संस्थान 
आईये आपको मिलवाते है आप को राष्ट्रीय पत्रकारिता में अपना दखल रखने वाले पत्रकारिता संसथान से ।लगभग 30 बाय 80 के क्षेत्र फल में बना एक माकन जिसे किराये पर लिया गया है ।पहला कमरा प्रचार्य का पड़ोस के कमरे में कार्यालय ठीक बगल में पुस्तकालय जहा अगर चार छात्र खड़े हो जाए तो पांचवे की जगह नहीं बचती। पहली मंजिल पर पत्रकारिता की काल्सेस के दो कमरे जिन्हें आप शयन कक्ष भी काह सकते है । हाल में कम्प्यूटर लेब जिन में कम्प्यूटर तो चलते है पर एक कम्पूटर पर 4 से 5 छात्र होते है। इन कम्प्यूटर में इंटरनेट नाम की प्रजाति कभी कभी ही अपने दर्शन करा देती है ऐसे में आधुनिक शिक्षा या यूं कहे की आधुनिक पत्रकारिता से केसे जुड़ा जायगा अंदाजा ही लगाया जा सकता है ।चलिए अभी और भी कुछ बाकि है दूसरी मंजिल के हाल में कम्पूटर विज्ञानं की कक्षा के साथ ही साथ ही छोटे से कमरे में मास्टर डिग्री की कक्षा …कुल मिला कर आप इसे पारिवारिक पत्रकारिता संस्थान भी कह सकते है ।

छात्रों के सपने होते है चकनाचूर 
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का नाम आपने आप में बड़ा है यहाँ आपने वाला हर छात्र अपनी आँख में एक बड़े से विश्वविद्यालय परिसर का सपना ले कर आता है और उस का सपना पूरा भी होता है जब वह भोपाल स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आता है लेकिन जब उसे उसी विश्वविद्यालय के विस्तार परिसर में दाखिला मिलता है तो सपना टूटते देर नहीं लगती । सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय के और भी विस्तार परिसर गई जहा कर्मवीर से ज्यादा सुविधाए मिल रही है लेकिन कर्मवीर को क्यों अनदेखा किया जा रहा है समझ से परे है ।

बद से बदतर हुआ विद्यापीठ
वर्तमान में जिस स्थान पर विद्यापीठ संचालित हो रहा है उसकी हालत बेहद खराब है। खिड़कियों केटूटे कांच अपनी कहानी स्वयं बयां करते है। फिलहाल यहां पर देश के अनेक हिस्सों से आकर विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे है। इन हालातों में वे यहां से क्या सीखकर जाएगें ये आसानी से समझा जा सकता है। जब विश्वविद्यालय से सुविधाओं की मांग की जाती है तो जवाब आता है जैसे ही नया भवन बनेगा यहां पर सभी सुविधाएं मौजूद होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कई बार जिला कलेक्टर से भी शासकीय भूमि की मांग की लेकिन आज तक कोई प्रबंध नहीं हो पाया। कुछ दिनों पूर्व विद्यापीठ को किसी अच्छे किराये के भवन में संचालित किये जाने की चर्चा थी लेकिन नया सत्र आरंभ होने के है लेकिन विश्वविद्यालय वह भी नहीं कर पाया। वर्ष 2005 में इंदौर रोड़ स्थित भूमि को कर्मवीर विद्यापीठ को सौंपने की तैयारी कर ली गई थी लेकिन राजनैतिक उठापटक के चलते एक उद्योगपति को वह जमीन दे दी गई। हलाकि यह बात कोई खुल कर कबुल नहीं करता।

नाम की खाने वाले भी भूले 
माखन दादा के नाम पर अपनी राजनीति करने वाले दल भी दादा को सिर्फ जन्मदिन व पुण्यतिथि पर ही याद करते है। माला पहना इतिश्री कर ली जाती है। हलाकिं ये ही राजनैतिक दल के नेता बड़े मंचों पर आमजन के सामने दादा की याद में मर मिटने की कसम खाने से भी परहेज नहीं करते। पत्रकारों द्वारा सवाल पूछने पर जल्द ही दादा की याद में कुछ बड़ा करने का वादा तो कर लेते है लेकिन वादें अक्सर टूट ही जाते है।

अभी बाकी है आशा की किरण 
कर्मवीर विद्यापीठ में पिछले बारह वर्षो में देश को होनहार पत्रकार दिये जो आज भी माखनलाल का नाम देश ही नहीं विदेश में भी उंचा किये हुए है। राजनेता हो या प्रशासन अगर कुछ कर गुजरने की इच्छा शक्ति हो तो सबकुछ होना संभव हो। महापरिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं है वह अगर चाहे तो अपनी इच्छाशक्ति से कर्मवीर की भूमि एक भव्य विश्वविद्यालय बनाने के लिये जमीन दिलवा सकते है कुल मिलाकर प्रदेश के मुखिया और बेहतर मुख्यमंत्री से ही आशा की उम्मीद की जा सकती है। श्री चौहान अगर चाहे तो या आशा की किरण नया सवेरा लेकर आ सकती है।

(लेखक तेज न्यूज डॉट काम के संपादक हैं)

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: