Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  धर्म  >  Current Article

चैत्र नवरात्र पर कांगड़ा शक्तिपीठों के दर्शन होंगे ऑनलाईन

By   /  April 11, 2013  /  2 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

श्री ज्वालामुखी मन्दिर विश्व का पहला ऐसा तीर्थस्थल है, जहां आदिशक्ति भवानी किसी मूर्त रूप में न होकर, साक्षात् ज्योति के रूप में विराजमान है

-अरविन्द शर्मा ||

चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर श्रद्धालु कांगड़ा जिला के श्री ज्वालामुखी व श्री ब्रजेश्वरी शक्तिपीठों के आन-लाईन लाईव दर्शन  कर सकेंगें, जिसके लिए मंदिर न्यास द्वारा डिवाईन इंडिया लिमिटेड को अनुबंधित किया गया है। इसके अतिरिक्त 11 से 19 अप्रैल तक मनाये जाने वाले चैत्र नवरात्र मेलों के लिये मन्दिर न्यास एवं जिला प्रशासन  द्वारा सभी आवष्यक प्रबन्ध पूर्ण कर लिये गये हैं।Chamunda

कांगडा जिला में तीन शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी, श्री ब्रजेश्वरी एंव श्री चामुण्डा  नन्दीकेश्वर धाम कालांतर से  हैं, जहां हर वर्ष देश-विदेश  से लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंच कर माता का आशीर्वाद  प्राप्त करने के साथ-साथ धौलाधार की हिमाच्छादित पहाडि़यों एवं कांगड़ा की नैसर्गिक छटा का भरपूर आनंद उठाते हैं। इन शक्तिपीठों में वर्ष के दौरान पड़ने वाले  नवरात्रे चैत्र, शरद, गुप्त तथा श्रावणाष्टमी के अवसर पर इन मन्दिरों में मां के दर्शन  और पूजन का विषेश  महत्व होता है। परन्तु चैत्र मास में पड़ने वाले नवरात्रों को विक्रमी संवत के अनुसार नववर्ष का आगमन माना जाता है, जिसका हमारे धार्मिक ग्रन्थों में विशेष  उल्लेख किया गया है। श्रद्धालु नववर्ष पर माता के शक्तिपीठों  में दर्शन करना अपना अहोभाग्य मानते हैं ताकि आने वाला वर्ष उनके जीवन में  खुशहाली एवं समृद्धि लेकर आये।

शक्तिपीठों का प्रादुर्भाव माता पार्वती के यज्ञशाला में कूदकर आत्मदाह करने से जुड़ा है। धार्मिक ग्रंथों  के अनुसार दक्ष प्रजापति महाराज द्वारा आदि काल में हरिद्वार के समीप कनखल नामक तीर्थस्थल पर आयोजित यज्ञ में अपने दामाद भगवान शिव को आमंत्रित न करने पर माता पार्वती ने स्त्रीहठ के वशीभूत होकर यज्ञ समारोह में बिना बुलाए शामिल होने का निर्णय लिया। परन्तु वहां भगवान शिव  का अपमान होते देख वह यज्ञशाला में कूद गईं।  भगवान शिव को जब यह मालूम हुआ तो उन्होंने पार्वती माता के  अधजले शरीर को कंधे पर उठाकर ताण्डव नृत्य करना प्रारम्भ कर दिया, जिससे पूरे ब्रह्मण्ड में प्रलय मच गई। तब सभी देवताओं के आग्रह पर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता पार्वती के अधजले शरीर के टुकडे़ करके भगवान शिव  को भारमुक्त किया। जहां-जहां माता पार्वती के अंग गिरते गये, वह स्थान कालांतर में शक्तिपीठ कहलाये। धर्मग्रंथों के अनुसार ज्वालामुखी में जिह्वा तथा नगरकोट धाम में माता का धड़ गिरने की विद्वानों ने पुष्टि की है।

श्री ज्वालामुखी मन्दिर विष्व का पहला ऐसा तीर्थस्थल है, जहां आदिशक्ति भवानी किसी मूर्त रूप में न होकर, साक्षात् ज्योति के रूप में विराजमान है। इस मन्दिर में नवदुर्गा के रूप में नौ ज्योतियां प्राकृतिक रूप से आदिकाल से निरन्तर प्रज्जवलित हो रही हैं और श्रद्धालु इन ज्योतियों का दर्शन  पाकर अपना सौभाग्य मानकर पुण्य प्राप्त करते हैं।

इस शक्तिपीठ का इतिहास सोलहवीं शताब्दी के मुगल साम्राज्य से भी जुड़ा है। जनश्रुति के अनुसार मुगल सम्राट अकबर ने मां ज्वालाजी की परीक्षा के लिये ज्योति को बुझाने हेतू नहर, तवे इत्यादि का प्रयोग किया। परन्तु ज्योति ज्यों कि त्यों प्रज्ज्वलित रही। अकबर सम्राट ने मां ज्वालाजी से क्षमा मांग कर अभिमान स्वरूप सोने का छत्र भेंट किया। परन्तु इसे चढ़ाते ही छत्र अधातु बन गया तथा मुगल सम्राट अकबर का अभिमान चूर-चूर हो गया। यह छत्र धरोहर के रूप में आज भी मन्दिर में श्रद्धालुओं के दर्षनार्थ मौजूद है। माता के हर गुणगान में अकबर के घमण्ड के चूर होने का उल्लेख मिलता है। ‘नंगे-नंगे पैरी मां अकबर आया, तवा फाड़कर निकली ज्वाला अकबर शीश नवाया’ इत्यादि पंक्तियां सोलहवीं शताब्दी से आज तक मां की गाथाएं लोकगीतों के रूप में गाई जाती हैं। ज्वालाजी मंन्दिर परिसर में नौ प्रज्ज्वलित ज्योतियों के अतिरिक्त गोरखडिब्बी, राधाकृष्ण मन्दिर, तारामन्दिर, लाल षिवालय, पिलकेष्वर, टेड़ा मन्दिर, नागार्जुन, अम्बिकेष्वर, गणेश, भैरव इत्यादि मन्दिर, इस स्थल में आने वाले श्रद्धालुओं के हृदय को पूर्णतया श्रद्धामयी बना देते हैं।

इसी प्रकार कांगड़ा शहर, जोकि अतीत में नगरकोट के नाम से विख्यात था, में स्थित श्री ब्रजेश्वरी धाम, मां भवानी पिंडी रूप में अवस्थित हैं। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार इस स्थल पर माता पार्वती का वक्षस्थल गिरा था, जो कि कालांतर में मां ब्रजेश्वरी शक्तिपीठ कहलाया।  इस मन्दिर एक प्रमुख विषेशता यह भी है कि इसका भवन सर्वधर्म का परिचायक है जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख एवं ईसाई धर्म के मंदिरों की शैली स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इसके अतिरिक्त श्री चामुण्डा नंदिकेष्वर धाम में माता चामुण्डा मूर्ति रूप में विद्यमान हैं और इसके साथ गुफा में भगवान शिव परिवार सहित शिवलिंग एंव अन्य देवताओं की मूर्तियों के साथ विराजमान हैं। मन्दिर के साथ धौलाधार पर्वत से निकलने वाली नदी बाण गंगा श्रद्धालुओं के लिये स्नान एंव आर्कषण का केन्द्र है। मन्दिर के साथ बना प्राचीन शमषान घाट इस तीर्थ स्थल की अनेक दंत कथाओं को दर्शाता है।

जिला कांगड़ा मन्दिर ट्रस्ट आयुक्त एवं उपायुक्त श्री सी पालरासु के अनुसार 11 अप्रैल से आरम्भ होने वाले चैत्र नवरात्र मेलों के लिये जिला के सभी शक्तिपीठों एवं अन्य धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के लिये आवष्यक प्रबन्ध किये गये हैं, जिसमें लगभग 500 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि तीनों शक्तिपीठों के सुनियोजित विकास के लिये मास्टर प्लान तैयार कर दिये गये हैं, जिसके तहत मन्दिर स्थलों में सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाओं को बड़े पैमाने पर सृजित किया जा रहा है।

मेले में यात्रियों के ठहरने, पेयजल, शौचालय तथा पार्किंग की सुविधा के पुख्ता प्रबन्ध किये गये हैं ताकि बाहर से आने वाले यात्रियों को कोई असुविधा न हो। मेले में सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिये अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों को तैनात किया गया है, ताकि किसी प्रकार की महामारी के फैलने की आशंका उत्पन्न न हो। जिला प्रशासन द्वारा मेले के दौरान इन शक्तिपीठों मंे शांति तथा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिगत सम्बन्धित क्षेत्र में 10 से 20 अपै्रल तक आग्नेय, धारदार शस्त्र तथा विस्फोटक सामग्री रखने एवं लेकर चलने पर भारतीय दण्ड संहित की धारा 144 के अन्तर्गत पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया गया है। इसके अलावा नारियल के चढ़ावे तथा ढोल, नगाड़े, बैंड इत्यादि के बजाने को भी प्रतिबन्धित किया गया है।

मंदिर एवं देवालय, जहां प्रदेश की समृद्ध संस्कृति का संरक्षण करते हैं, वहीं पर इनमें लोगों की धार्मिक आस्था एवं अगाध श्रद्धा होने से लोगों में आपसी प्यार, सद्भाव, परस्पर सहयोग के साथ-साथ राष्ट्र की एकता एवं अखण्डता को बढ़ावा मिलता है।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. mahendra gupta says:

    जानकारी से भरी अच्छी ज्ञानवर्धक पोस्ट

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

पाकिस्तान में हिंदू कैसे रहते हैं..

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: