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यहाँ सब चलता है, सैटिंग है…..

By   /  April 26, 2013  /  3 Comments

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जैसलमेर की ट्रैफिक व्यवस्था भगवान् भरोसे… हादसों से भी नहीं चेतती जैसलमेर ट्रैफिक पुलिस….

-सिकंदर शैख़||

हिन्दुस्तान में हादसों के बाद ही चेतने का रिवाज है, बड़ी बड़ी दुर्घटनाओं का अगर ज़िक्र किया जाय तो उनके पीछे वजह बहुत ही छोटी सी थी. अगर समय रहते उनको रोका जाय तो हादसों से निजात मिल सकती है. अभी हाल ही में जयपुर के घाट की गुनी टनल में हुए दर्दनाक हादसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाये हैं , मगर ऐसे हादसों से भी अभी तक इन पुलिस कर्मियों को कोई ज्यादा फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है.traffic jaisalmer

बात गर जैसलमेर के सन्दर्भ में करें तो आये दिन सड़क हादसों की ख़बरें यहाँ सुनने को मिल जाती है जिसमे कभी ओवरलोड वाहन किसी को थोक डेट अहै या फिर कभी कोई शराबी किसी को उड़ा देता है , मगर यहाँ के पुलिस कर्मियों की तो यहाँ बड़ी सैटिंग दिखती है जिससे जैसलमेर की ट्रैफिक व्यवस्था भगवन भरोसे चल रही है.  स्थानीय हनुमान चौराहे पर हमेशा ही वाहनों की रेलम पेल रहती है और सबसे ज्यादा ट्रैफिक भी यही रहता है क्योंकि ये जैसलमेर का हृदय स्थल है , मगर आपको यहाँ की यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए यदा कदा ही कोई ट्रैफिक कर्मी नज़र आता है और अगर आ भी जाए तो किसी चाय के ढाबे पर गप्पे हांकते या फिर किसी मित्र के हाथों में हाथ थामे घुमते हुए. स्थानीय चौराहे पर ओवरलोड वाहन दिखना आम बात है मगर ट्रैफिक कर्मियों को वो नज़र भी आते हैं तो उसको वो नज़र अंदाज़ कर देते हैं क्योंकि यहाँ तो इनकी “सैटिंग” है, और अगर मीडिया के कैमरे में आ जाये तो रफूचक्कर होने में भी देर नहीं लगाते हैं. इस तरह की लापरवाही से बेचारे आम आदमी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है जो कि विचारणीय है. जब हमने इस बारे मे पुलिस उपाधीक्षक शायर सिंह से बात की तो उन्होंने कार्रवाई करने की बात कहते हुए इस पर जल्द ही बात करने की बात कही.

अब अगर हमारी सुरक्षा करने वाले ही इस तरह की सैटिंग करने लगे तो आम आदमी की जान का ज़िम्मेदार कौन होगा , आम आदमी अगर कही हादसों में मरता भी है तो उसका ज़िम्मेदार इस तरह के ट्रैफिक कर्मी ही होंगे जो अपनी “सैटिंग” के चलते आम आदमी की जान का सौदा करते हैं.

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  • Published: 5 years ago on April 26, 2013
  • By:
  • Last Modified: April 26, 2013 @ 7:46 am
  • Filed Under: देश

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. ASHOK SHARMA says:

    सेटिंग से आज राज्य सरकारें और देश की सरकार चल रही है ट्राफिक तो बहुत छोटी सी व्यबस्था है

  2. Ashok Goel says:

    sabhi jagah yahi hal hae, jab rishwat sae tabadlae kiya gaiga to loot to machni hi hae.

  3. kanoon ke rakhwale hi kanoon ke sath khilwad kare to koun roke , is desh me jinko jis kam ke liye rakha jata hai wo wahi kam sahi nahi karte ,
    jiski rakhwali ke liye rakha jata hai usi ki chori karte hai —-or kiya kahu.

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