/पुलिस कर्मियों के बच्चों को डिस्काउंटेड कोचिंग दिलाने का पुलिसिया अंदाज़..

पुलिस कर्मियों के बच्चों को डिस्काउंटेड कोचिंग दिलाने का पुलिसिया अंदाज़..

राजस्थान के कोटा पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार के हस्ताक्षर से जारी हुए एक गोपनीय कार्यालय आदेश के अनुसार राजस्थान पुलिस विभाग में कार्यरत अधिकारीयों और कर्मचारियों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए निजी कोचिंग सेंटर्स पर ली जाने वाली  कोचिंग फीस पर पचास प्रतिशत रियायत मिलेगी. कोटा पुलिस अधीक्षक के अनुसार उन्होंने करीब सात कोचिंग संस्थानों से इसकी सहमति ले ली है.  इस गोपनीय पत्र में कोटा पुलिस अधीक्षक ने पुलिस विभाग में तो इस योजना का भरपूर प्रचार करने के लिए लिखा है साथ ही यह ताकीद भी कर दी है कि इसकी जानकारी पुलिस विभाग से बाहर न जाये.

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पुलिस कर्मियों के बच्चों को रियायती दरों पर कोचिंग देने के लिए राज़ी हुए कोचिंग संस्थानों कि सूची इस प्रकार है:

1. एलेन कैरिअर इंस्टिट्यूट

२. एजूवेव

३. मोशन

४. बंसल क्लासेज़

५. कैरियर पॉइंट

६. वाईब्रेंट

७. रेजोनेंस

002विगत चार अप्रेल को क्रमांक:- को.श/विविध/२०१२/४३ से निकले इस गोपनीय पत्र में कहा गया है कि कोटा पुलिस ने अथक प्रयास कर इन सातों कोचिंग संस्थानों को इस रियायत के लिए सहमत किया है. इस गोपनीय पात्र के अनुसार राजस्थान भर में इन संस्थानों की सभी शाखाओं पर इस रियायत का लाभ उठाया जा सकेगा.

 

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि किन शर्तों पर पुलिस ने इन जाने माने कोचिंग संस्थानों को पचास प्रतिशत रियायत के लिए सहमत किया है. यदि सिर्फ अनुरोध भर से इन कोचिंग संस्थानों ने सभी पुलिस कर्मियों के बच्चों को यह रियायत दी है और किसी प्रकार का अनुचित तौर तरीका नहीं अपनाया गया है तो इस पत्र को गोपनीय रखने की क्या जरूरत थी? या फिर अब ये कोचिंग संस्थान पुलिस कर्मियों के बच्चों की मदद करेंगे और बदले में पुलिस विभाग के अधिकारी कर्मचारी इन संस्थान मालिकों की.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.