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‘आरक्षण’ पर पंजाब, UP और आंध्र प्रदेश में रोक, देश भर में Ban के लिए दिलीप मंडल Facebook पर, उदित राज उतरेंगे सड़क पर

By   /  August 11, 2011  /  8 Comments

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प्रकाश झा की फिल्म ‘आरक्षण’ पर उत्तर प्रदेश में ग्रहण लगता नजर आ रहा है। देश के इस सबसे बड़े प्रदेश में शुक्रवार को शायद यह फिल्म रिलीज नहीं हो पाए। दलित मुख्यमंत्री के तौर पर मशहूर मायावती के नेतृत्व वाले प्रदेश सरकार को फिल्म के कई डॉयलाग्स पर ऐतराज़ है। सरकार ने राज्य में फिल्म के प्रदर्शन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।

मुख्यमंत्री मायावती

प्रदेश सरकार को लगता है कि फिल्म के मौजूदा स्वरूप में रिलीज होने पर समाज में वैमनस्य पैदा हो सकता है, जिससे राज्य की कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसी आशंका के मद्दनेजर राज्य सरकार ने पिछले दिनों निर्देशक झा को पत्र लिखकर रिलीज से पहले फिल्म दिखाने के लिए कहा गया था। मंगलवार को प्रदेश सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों ने स्पेशल प्रिव्यु मे फिल्म देखा। बुधवार को समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने राज्य में फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति न देने का निर्णय किया है।  उत्तर प्रदेश चलचित्र (विनियमन) अधिनियम 1955 के तहत अधिकारों का प्रयोग करते हुए राज्य के मनोरंजन कर सचिव चंद्रभानु ने बुधवार देर शाम इस संबंध में आदेश जारी किया।

समिति का मानना है कि फिल्म में आपत्तिजनक ल उत्तेजक संवाद हैं, जिनसे समाज के विभिन्न वर्गो में वैमनस्य पैदा होने की प्रबल संभावना है। सरकार का मानना है कि पूर्व में आरक्षण के विरोध एवं समर्थन में हुए आंदोलनों में बड़े पैमाने पर जन व धन की हानि हुई है। फिल्म को लेकर व्यक्त किए जा रहे विचारों से आरक्षण की विभिन्न व्यवस्थाओं पर सामाजिक रूप से स्वीकृत एवं संवैधानिक रूप से तय हो चुके शांत मुद्दे के फिर से जागृत होने की प्रबल आशंका है।

गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार की ही तर्ज पर पंजाब सरकार ने भी प्रकाश झा की फिल्म ‘आरक्षण’ की वजह से कानून एवं व्यवस्था के बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर राज्य में इसके प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। इसके बाद आंध्र प्रदेश में भी इसी आधार पर रोक का ऐलान कर दिया गया।

प्रकाश झा

उधर निर्माता-निर्देशक झा ने देर रात मीडिया दरबार को बताया कि उन्हें इस संबंध में आदेश की प्रति अभी नहीं मिली है। आदेश मिलने के बाद वह देखेंगे कि क्या किया जा सकता है।

लेकिन झा को सिर्फ उत्तर-प्रदेश तक ही अपनी कसरत नहीं करनी पड़ेगी। फिल्म का कई हस्तियों ने अपने अपने ढंग से विरोध शुरु कर दिया है। अनुसूचित जाति/जन जाति संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ0 उदित राज ने ऐलान किया है कि फिल्म पर यदि देश व्यापी प्रतिबंध नहीं लगाया जाता है तो  आगामी 12 अगस्त को दोपहर 12 बजे जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर विशाल प्रदर्शन होगा। उन्होंने सभी मानवतावादी, भ्रष्टाचार विरोधी एवं आरक्षण समर्थकों से सहयोग और समर्थन मांगा है।

डॉo उदित राज

डॉ0 उदित राज ने मीडिया दरबार को बताया कि प्रकाश झा ने इस फिल्म को पैसा कमाने के लिए बनाया है। उन्होंने यह नहीं सोचा कि इससे जातीय नफरत पैदा होगी। उन्होंने कहा कि प्रकाश झा और आरक्षण फिल्म के समर्थक यह नहीं जानते कि आरक्षण पूनापैक्ट (गांधी एवं डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के बीच समझौता) की देन है। अगर ऐसा न होता तो देश भी बंट सकता था। यह संवैधानिक व्यवस्था है। देश की संसद ने भी यह तय कर दिया है फिर भी बार-बार दलितों एवं आदिवासियों के खिलाफ इस तरह की नफरत भरी बातें होती रहती हैं।

दिलीप मंडल

उधर पत्रकार दिलीप मंडल पहले से ही सोशल नेटवर्किंग साइटों और ब्लॉगों के जरिए फिल्म पर रोक के लिए अभियान चला रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने फिल्म निर्देशक द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किए एक चुटकुले की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए उनपर मुकद्दमा ठोंकने की धमकी दी तो प्रकाश झा ने फौरन उसे डिलीट कर दिया था।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

8 Comments

  1. जनाब .. मेरा कमेन्ट डिलीट कर दिए हैं उसमे से? मैंने उसी रात में ३ बजे जब उनको इसी बात पर घेरा तो नाराज होकर ब्लाक मार दिए.. आखिर जब हैसियत नहीं है लड़ने की तो चिल्लाते क्यों है ? आईआईएमसी के अहसान तले दिलीप दबें होंगे.. हम नहीं .. श्रवण शुक्ल // नाम ले लेना .. कान खड़े हो जायेंगे .आरक्षण के पुजारी के ..

    और हाँ… दिलीप सिर्फ अपना चेहरा चमकाना चाहते हैं .. बाकी कुछ भी नहीं … दोहरे चरित्र वाला अति अवसरवादी व्यक्ति.. इससे ज्यादा और क्या कहें?

  2. Naveen Verma says:

    मनमोहन सिंह का चन्द्र अभियान

    ओबामा (मनमोहन सिंह) – इस बार हम चाहते हैं कि चाँद पर जाने वाले अभियान में भारतीय भी शामिल हों,
    मनमोहन सिंह – जी , बहुत अच्छा बिचार है, हमारे लिए अपने रोकेट में 100 सीटों कि व्यवस्था कर लीजिये ,
    ओबामा – इतनी सारी सीटें !!! किस लिए ?
    मनमोहन सिंह – हम को अपने यहाँ से हर वर्ग के लोगों को भेजना पड़ेगा,
    100 – सीटों में से
    27 – OBC,
    25 – SC,
    20 – ST,
    8 – अंग हीनो (Handicapped ),
    5 – खिलाड़ियों (Sports Quota,)
    4 – अल्पसंख्यक (Minority )
    5 – दंगा पीड़ितों
    & उस के बाद थोड़ी बहुत vip कोटा ,
    फिर भी अगर कुछ सीटें बच गयीं तो २-4 सीटें जनरल कैटागिरी के लिए रख लेंगे .
    आखिर चुनाव आने वाला है किसी को भी नाराज नहीं कर सकते

  3. bablooyadav says:

    घटिया लोग घटिया सोच? वास्तव में दिलीप मंडल और उदित राज़ जैसे ही लोग हैं जो देश की तरक्की नहीं चाहते. सिर्फ आरक्षण चाहते हैं.

    • vivek shukla says:

      तुम sahi कहते हो इससे पहले भी जवाहर लाल , गाँधी आदि इनसे ज्यादा घटिया paida और kutaa इन्सान हुए है जो इस देश की हजारो varsh से सताई हुए जनता की bhalai नहीं चाहते the और अब राहुल तथा bjp भी समतामूलक समाज की sthapana नहीं चाहती है, चाहेगी kaise ये लोग तो आर्य विदेशी है इस जो वर्षों पहले आये और अब raja bankar बैठ गए और यहाँ ke मुल्निवासिओं ko banchit कर दिया अब vah दलित आदिवासी, बच्क्वार्ड कहलाय जा rahe है. sachhai में तो हम brahmin ही arya विदेशी हे हमें इस par गर्व नहीं है .

  4. Nikhil Sablania says:

    जय भीम!

  5. Ashutosh Shukla says:

    ये सब अपनी अपनी दुकानदारी चमकाने की कोशिश है.. सड़क पर उतरने से और फेसबुक पर ब्लॉग लिखने से उदित राज और दिलीप मंडल दोनों उस करोड़ों रुपये के पब्लिसिटी कैम्पेन का फायदा उठा लेंगे जो प्रकाश झा ने चलाया है..

    • bablooyadav says:

      आशुतोष जी सही कह रहे हैं…..

      • vivek shukla says:

        आप sahi कहते ऐसे लोग sirf पुब्लिसिटी के लिए dikhte है इनको janta की सेवा की कोई फ़िक्र नहीं एसे समझे तो लालाक्रिशन aadwani, राहुल भी कम nautankibaj नहीं है, बीजेपी के लोग तो भगवान के नाम पर मंदिर banane के लिए करोरो डकार gaye और gandhi परिवार ने तो देश को खोखला hee कर दिया सारा पैसा स्विस बैंक me अपने भैएयों के paas रख दिया ऐसा सुब्रमैनियम स्वामी का कहना है और वो साबुत की बात भी कर रहे है , ये बात तो मुमकिन हो सकती है क्योकि इन्होने aazadi के बाद से ab तक राज जो किया है khuda bachaaye ऐसे नौटंकीबाजों से
        जय hind

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