/एक और सरबजीत कैद है पाकिस्तान की जेल में

एक और सरबजीत कैद है पाकिस्तान की जेल में

 भेड़ बकरी चराते सीमा पार पकिस्तान चला गया था.. 27 वर्ष से परिवारजन कर रहें है इंतज़ार.. सरबजीत की हत्या से खौफज़दा है परिवार जन…

-सिकंदर शैख़||

भारत के सरबजीत की पाकिस्तान की जेल में हुई मौत के बाद पूरा हिन्दुस्तान सकते में हैं मगर उससे भी ज्यादा उन लोगों के आंसू रुकने का नाम ले पा रहे हैं जिनका कोई अपना आज भी पाकिस्तान की जेल में क़ैद अपनों से मिलने की दुआ कर रहा हैं, सरबजीत पर हुए हमले और बाद में उसकी मौत के बाद इन लोगों के दिलों में भी डर बैठ गया है कि कहीं इनके परिजन के साथ ऐसी कोई घटना ना घट जाए, जी हाँ हम बात कर रहे हैं भारत-पाक बॉर्डर पर स्थित जैसलमेर जिले की , जहा के बंधा गाँव के ग्रामीण आज भी अपने एक सगे के इंतज़ार में पलकें बिछाए बैठे हैं.JAMALDEEN

वो बदनसीब नाम है जमालदीन का जो गलती से भेड़ बकरी चराते सीमा पार पकिस्तान चला गया था और आज तक वापिस नहीं लौटा। ये घटना है वर्ष 1986 की। कई सरकारी दरवाजों पर दस्तक देते, मुख्यमंत्रियों को ख़त लिख लिख कर इनके रिश्तेदार हार गए। मगर हिन्दुस्तान की ठकुराई करने वाले इन हुकुम रानों पर कोई जूँ तक नहीं रेंगी और रेंगे भी क्यों ये कोई इनका सगा थोड़े ही न था। जमालदीन के घर वालों ने उसके जिंदा होने की जब आस छोड़ दी तो सन 1990 में उनके पास एक उर्दू में ख़त आया जो की पाकिस्तान के कराची जेल से आया था जिसमे जमालदीन के बारे में लिखा था की वो कराची की जेल में बंद है और उसे यहाँ 15 दिनों में बाहर की बात की गयी थी। इस ख़त के बाद परिवार वालों की आँखों में ख़ुशी के आंसू दौड़ पड़े। उन्होंने जमालदीन को रिहा करवाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किये है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से लेकर प्रधानमंत्री तक को ज्ञापन भेजे है लेकिन कही से भी जमाल को रिहा करवाने के लिए आज तक आश्वाशन नहीं मिला है. और ना ही जमालदीन उस जेल से छूटा,
जैसलमेर के बंधा गाव के जमालदीन के जीजाजी पिराने खान कहते है की उनके भाई के बारे में 1991 के बाद कोई जानकारी नहीं है, 1986 में भेड़ बकरी चराते वक़्त पाकिस्तान जाने वाले इसके भाई का अंतिम ख़त 1990 में कराची जेल से आया था, तब से लेकर आज दिन तक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. जिस तरह सरबजीत को योजना के तहत मारा है, उस तरह उसके भाई की भी जेल मई हत्या की जा सकती है. उसकी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंता हो रही है. उसके परिवार वालो का बुरा हाल है.
पाक जेल में तय योजना के मुताबिक सरबजीत पर हमले के बाद और सरबजीत के जिन्दगी की लड़ाई हारने के बाद पाकिस्तानी जेल में बंद जमालदीन और ऐसे कई बेगुनाह भारतीयों के परिवारों की चिंता को बढ़ा दिया है. अब इन परिवारों को हर पल यह डर सताने लगा है कि पाकिस्तान कसाब और अफजल गुरु का बदला लेने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है अब इनके अपने पर भी जेल में हमले की साजिश रच सकता है लिहाजा अब यह परिवार सरकार से यह मांग कर रहे है कि इनके अपनों की रिहाई कारवाही शरू की जाए। मगर ये कब होगा ये कोई नहीं जानता

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.