/दो नाबालिग किशोरियों के साथ गैंग रेप…

दो नाबालिग किशोरियों के साथ गैंग रेप…

 -चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर सीमावर्ती बाड़मेर जिले में गैंग रेप की घटनाएँ सुरसा के मुंह की तरह दिन ब दिन बढती जा रही हें. गुरूवार को जिले में गैंग रेप के दो मामले अलग अलग थाना क्षेत्रो में दर्ज हुए . पुलिस सूत्रानुसार सिणधरी थानातंर्गत एक नाबालिग का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है।

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पीडि़ता को बोलेरो में डालकर जोधपुर ले गए। जहां पर स्थित एक गेस्ट हाऊस में उसे दो दिन तक बंधक बनाकर रखा। इसके बाद गुजरात ले जाते वक्त हिम्मतनगर में पीडि़ता का भाई मिलने पर आरोपी उसे छोड़कर भाग गए। सिणधरी थानाधिकारी सहदेव चौधरी ने बताया कि क्षेत्र के एक गांव की नाबालिग लड़की ने मामला दर्ज करवाया कि 30 अप्रैल रात्रि को वह अपने घर से शौच करने के लिए खेत में गई। इस दौरान एक बोलेरो मेरे पास आकर रूकी। जिसमें सवार मेरे ही गांव के निवासी महेन्द्र सिंह पुत्र भंवरसिंह रावणा राजपूत, ढलीया उर्फ ढले खां मिरासी, भीखसिंह पुत्र रामसिंह, भाऊ खां पुत्र मांगु खां मिरासी ने उसे पकड़कर बोलेरो में डाल दिया। फिर जान से मारने की धमकी देकर चुप रहने की नसीहत दी। ये लोग उसे जोधपुर स्थित एक गेस्ट हाऊस में लेकर गए। जहां पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। दो दिन रूकने के बाद आरोपी महेन्द्र सिंह उसे गुजरात के लिए बस में बैठाकर रवाना हुआ। बस हिम्मतनगर की एक होटल पर रूकी। जहां पर मैंने मेरे भाई उत्तमसिंह को देखा तो चिल्लाने लगी। इस पर आरोपी महेन्द्र सिंह भाग गया। भाई ने मेरे परिजनों को सूचना दी।

गुरुवार को पुलिस थाने में सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया। पीडि़ता का मेडिकल मुआयना करवाया गया। चौधरी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर तलाश शुरू की गई।

वहीं पचपदरा पचपदरा थाना क्षेत्र में गुरुवार को एक किशोरी को बंधक बनाकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज हुआ। पुलिस के अनुसार पटाऊ कला निवासी एक किशोरी ने रिपोर्ट पेश कर बताया कि अभिषेक पुत्र ओमप्रकाश विश्रोई निवासी जोधपुर वगैरह 4 जनों ने उसे बहला फुसलाकर अपहरण कर ले गए। बंधक बनाकर अभिषेक व उसके साथी अनिल पुत्र खेमाराम विश्रोई निवासी पटाऊ कला ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। गौरतलब हें की इस सप्ताह जिले में सामूहिक दुष्कर्म के छः मामले दर्ज हो चुके हें.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.