Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

सरकार की असफल विदेश नीति और कूटनीति…

By   /  May 3, 2013  /  3 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

एक तरफ सरबजीत का मामला और दूसरी तरफ चीन का हमारी सीमा में घुसकर अपने कैम्प बना लेना साफतौर पर हमारी सरकार की कूटनीतिक विफलता को दर्शाता है. पाकिस्तान और चीन की क्षमताएं हमारे देश की तुलना में अलग-अलग हैं और इन दोनों देशों के मंतव्य भी नितांत भिन्न हैं. पाकिस्तान इस तरह की घटनाओं के द्वारा अपने आंतरिक हित साधता है और चीन का इस हरकत को करने के पीछे अपने पड़ोसी देशों पर हनक स्थापित करने का मकसद है.Protest-against-China

ये बात किसी से भी छिपी नहीं है कि पाकिस्तान में आये दिनों किसी न किसी रूप में भारत-विरोधी गतिविधियों के द्वारा वहां के कट्टरपंथियों का दिल जीतने के प्रयास किये जाते रहते हैं. पाकिस्तान के कट्टरपंथी लोग/संगठन कसाब और अफजल की फांसी के बाद से भारत-विरोधी कारनामा करने की फ़िराक में बने हुए थे. इधर इस बात की आशंका भी जताई जा रही थी कि फांसी देने की घटनाओं के बाद सरबजीत की रिहाई टल सकती है अथवा उस पर हमला हो सकता है. इन आशंकाओं के बाद भी पाकिस्तान की तरफ से कुछ दया दिखाए जाने जैसी एक छोटी सी उम्मीद इस कारण से बनी हुई थी क्योंकि कसाब को वह पाकिस्तानी नागरिक होने से नकार चुका था. इस उम्मीद को झटका उस समय लगा जबकि अफ़ज़ल की फांसी के बाद पाकिस्तान की संसद तक ने अपना सुर बदल लिया. इधर पाकिस्तान के सुर बदले और साथ में चुनाव के हालात बन गए. ऐसे में भारतीय बंदियों के साथ होने वाली किसी भी अनहोनी की सम्भावना ज्यादा दिखने लगी थी. इसी अनहोनी का शिकार सरबजीत हो गए और अंततः मौत ने ही उन्हें पाकिस्तानी जेल से रिहा करवाया.

चीन की घुसपैठ भी अपने आपमें एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है. चीन को भी अच्छी तरह से एहसास है कि आज का भारत सन १९६२ का भारत नहीं है. सामरिक शक्ति के मामले में भले ही भारत चीन से कहीं पीछे हो किन्तु दक्षिण एशिया में अभी भी भारत के पासंग कोई दूसरा देश नहीं है. भारत की यही स्थिति कहीं न कहीं उसे एशियाई देशों के मध्य भी स्वीकार्य स्थिति में पहुंचाती है. चीन इस बात को भलीभांति समझता है कि भारत की एशिया में बढती शक्ति कहीं न कहीं उसके प्रभाव को अन्य दक्षिण एशियाई देशों में कम ही करेगी. इस घुसपैठ के माध्यम से चीन दक्षिण एशियाई देशों में और एशियाई देशों में यह सन्देश देना चाहता है कि भारतीय सैन्य-शक्ति/सामरिक शक्ति कागजों पर ही सशक्त है. अपनी हनक को जबरदस्त तरीके से स्थापित करने की मंशा के कारण ही चीन ने भारतीय सीमा में लगभग २०-२५ किमी तक घुसकर न केवल अपने कैम्प स्थापित किये बल्कि तीन-तीन फ्लैग मीटिंग के बाद भी अपने अड़ियल रुख पर अड़ा रहा. घुसपैठ की ये स्थिति तब है जबकि हमारे विदेशमंत्री इसी माह के दूसरे सप्ताह में चीन यात्रा पर जाने वाले हैं और संभवतः अगले माह चीनी प्रधानमंत्री की नई दिल्ली की प्रस्तावित यात्रा है.

पाकिस्तान की, चीन की अपनी-अपनी हरकतों की मंशा कुछ भी रही हो किन्तु ये तो स्पष्ट हो चुका है कि हमारी सरकार कूटनीतिक रूप में बुरी तरह असफल हुई है. सीमा पर जबरन घुसकर पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा दो भारतीय सैनिकों के सर काट ले जाने के बाद भी केंद्र सरकार की तरफ से कड़ी कार्यवाही करने के बजाय लीपापोती ही की जाती रही. कुछ यही हीलाहवाली चीन के मामले में हमेशा से होती रही है. चीनी घुसपैठ का ये कोई पहला मामला नहीं है, अभी भी इस ताजा अतिक्रमण के अलावा वह हमारी जमीन पर अपना अनाधिकृत कब्ज़ा बनाये हुए है. इन दो पड़ोसी देशों के भारत-विरोधी कार्यों के बाद भी इनके विरुद्ध कभी भी ठोस कार्यवाही करने की मंशा केंद्र सरकार की तरफ से होती नहीं दिखी. आंतरिक मामलों में जबरदस्त रूप से असफल रही केंद्र सरकार अपनी विदेशनीति के मामले में भी बुरी तरह से घुटने टेकती दिख रही है. चीनी घुसपैठ और पाकिस्तान जेल में हमले का जवाब/कूटनीतिक स्वरूप कठोर नहीं रखा गया तो आने वाला समय भारतीय विदेशनीति के लिए काला अध्याय लेकर आएगा.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

बुन्देलखण्ड के उरई-जालौन में जन्म। बुन्देलखण्ड क्षेत्र एवं बुन्देली भाषा-संस्कृति विकास, कन्या भ्रूण हत्या निवारण, सूचना का अधिकार अधिनियम, बाल अधिकार, पर्यावरण हेतु सतत व्यावहारिक क्रियाशीलता। साहित्यिक एवं मीडिया क्षेत्र में सक्रियता के चलते पत्र-पत्रिकाओं एवं अनेक वेबसाइट के लिए नियमित लेखन। एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन।
सम्प्रति साहित्यिक पत्रिका ‘स्पंदन’ और इंटरनैशनल रिसर्च जर्नल ‘मेनीफेस्टो’ का संपादन; सामाजिक संस्था ‘दीपशिखा’ तथा ‘पीएचड होल्डर्स एसोसिएशन’ का संचालन; निदेशक-सूचना अधिकार का राष्ट्रीय अभियान; महाविद्यालय में अध्यापन कार्य।
सम्पर्क – www.kumarendra.com
ई-मेल – [email protected]
फेसबुक – http://facebook.com/dr.kumarendra, http://facebook.com/rajakumarendra

3 Comments

  1. mahendra gupta says:

    हमारी सरकार तो कुटनीतिक और राजनितिक दोनों ही स्तर पर विफल रही है क्योंकि न तो हमारी सरकार के पास विदेश निति का कोई विज़न है,न ही हमारे यहाँ अब कोई ऐसा राजनीतिज्ञ है जो विदेश मंत्रालय का सही संचालन कर सके.जो है उनमें वह योग्यता भी नहीं जैसे आला कमान की चापलूसी,तुष्टिकरण को वोट बैंक के अनुरूप विदेश निति को बनाना.वर्तमान विदेश मंत्री इन योग्यताओं के अनुकूल हैं.अतएव यह सब विफलताएं तो मिलेगी ही,और यह बात दीगर है कि हमारे नेता इसे बिलकुल सफल मानते हैं.यदि सुप्रीम कोर्ट कद न हुआ होता तो क्या इटली अपने सैनिकों को वापस भेजता?इन्होने तो अपनी कर ही दिखाई ही,जब इटली सरकार को आश्वस्त कर दिया कि निर्धारित फांसी कि सजा नहीं देंगे.ये जरा जरा से देश ऐसे आँख दिखाते हैं और हम सफलता मानतें हैं.अब चीन वापस थोड़े ही न जायेगा,और यदि गया भी तो इनके कहने से नहीं,अपने मंतव्य पुरे होने पर.चला जायेगा तब हमारे नेता गाल फुला कर कहेंगे देखो वापस भेज दिया,न गया तो थोड़े दिन बाद कह दिया जायेगा यह हमारी भूमि थी ही नहीं,सेना को ग़लतफ़हमी हो गयी थी.अन्य पडोसी देशों के साथ भी विदेश निति विफल रही है,लेकिन सरकार इसे अपनी आदत के अनुरूप स्वीकर नहीं करतीं न करेगी,क्योंकि कांग्रेस कभी गलती करती ही नहीं,मुलायम जैसे तुक्देल नेताओं को बुला कर,बात कर अपने पक्ष में स्टेटमेंट दिल कर जनता को गुमराह करेगी

  2. हमारी सरकार तो कुटनीतिक और राजनितिक दोनों ही स्तर पर विफल रही है क्योंकि न तो हमारी सरकार के पास विदेश निति का कोई विज़न है,न ही हमारे यहाँ अब कोई ऐसा राजनीतिज्ञ है जो विदेश मंत्रालय का सही संचालन कर सके.जो है उनमें वह योग्यता भी नहीं जैसे आला कमान की चापलूसी,तुष्टिकरण को वोट बैंक के अनुरूप विदेश निति को बनाना.वर्तमान विदेश मंत्री इन योग्यताओं के अनुकूल हैं.अतएव यह सब विफलताएं तो मिलेगी ही,और यह बात दीगर है कि हमारे नेता इसे बिलकुल सफल मानते हैं.यदि सुप्रीम कोर्ट कद न हुआ होता तो क्या इटली अपने सैनिकों को वापस भेजता?इन्होने तो अपनी कर ही दिखाई ही,जब इटली सरकार को आश्वस्त कर दिया कि निर्धारित फांसी कि सजा नहीं देंगे.ये जरा जरा से देश ऐसे आँख दिखाते हैं और हम सफलता मानतें हैं.अब चीन वापस थोड़े ही न जायेगा,और यदि गया भी तो इनके कहने से नहीं,अपने मंतव्य पुरे होने पर.चला जायेगा तब हमारे नेता गाल फुला कर कहेंगे देखो वापस भेज दिया,न गया तो थोड़े दिन बाद कह दिया जायेगा यह हमारी भूमि थी ही नहीं,सेना को ग़लतफ़हमी हो गयी थी.अन्य पडोसी देशों के साथ भी विदेश निति विफल रही है,लेकिन सरकार इसे अपनी आदत के अनुरूप स्वीकर नहीं करतीं न करेगी,क्योंकि कांग्रेस कभी गलती करती ही नहीं,मुलायम जैसे तुक्देल नेताओं को बुला कर,बात कर अपने पक्ष में स्टेटमेंट दिल कर जनता को गुमराह करेगी.

  3. देश की जनता जबतक धरम और जात के आधार पर मतदान क्कारेगी ,मिली-जुली कमजोर सरकार बनती रहेगी.जब सरकार कमजोर होगी तो संभव है देश और नीतिया कमजोर ही होगी.अगले आम चुनाव में जनता को ही तय करनी होगी की देश को कमजोर बनाना है या मजबूत.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

जौहर : कब और कैसे..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: