/चिटफंड संकट से निपटने के लिए ममता केंद्र का तख्ता पलट देंगी ?

चिटफंड संकट से निपटने के लिए ममता केंद्र का तख्ता पलट देंगी ?

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​||

पानीहाटी में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सभा के लिए बेइइंतहा खर्च हुआ। राइटर्स बिल्डिंग के दरवाजे से लेकर पानीहाटी के अमरवती मैदान तक बहुंचने वाली सड़कों के चप्पे पर पार्टी के झंडे, दीदी के चित्र और पुलिसिया इंतजाम के चामत्कारिक दृश्य थे, जिन्हें देखकर पिकासो दीदी को चित्रकारिता की नई प्रेरणा मिल सकती है। पर सवाल यह है कि चिटफंड के विरुद्ध प्रचार अभियान में निकली दीदी के इस अभियान का खर्च कौन देगा? इससे पहले कोलकाता में  श्यामबाजार की सभा में पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य समेत तमाम माकपाइयों और खासतौर पर उनके भतीजे अभिषेक के खिलाफ आरोप लगाने वाले गौतम देव के चिटफंड कंपनियों के साथ रिश्ते साबित करने के लिये उन्होंने तमाम कागजात और चित्र लहराये।mamtabenarjee

फिर पंचायत चुनावों के सिलसिले में पार्टी नेताओं की बैठक में दागी नेताओं का खुलेआम बचाव करते हुए सबकी फाइलें खोलने और सबको जेल में डालने की धमकी दी। सोदपुर में पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की ओर से चिटफंड मामले पर निशाना साधे जाने पर पलटवार करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि मार्क्सवादी पार्टी (माकपा) के झूठे दावों के खिलाफ पोस्टर जारी किया जाएगा। चिट फंड घोटाले पर लटक रही सीबीआई जांच की तलवार के बीच प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की हिम्मत बढ़ाते हुए कहा कि सीबीआई “धमकी” से उनकी सरकार डरने वाली नहीं है क्योंकि अगले साल होने वाले आम चुनावों में यूपीए तीसरी बार सत्ता में नहीं लौटेगी।

ममता ने 24 परगना जिले में तृणमूल कांग्रेस की सभा में पूर्व मुख्यमंत्री भट्टाचार्य की एक चिटफंड मालिक के साथ कथित तस्वीर को दिखाते हुए कहा, ‘‘यह किसकी तस्वीर है?’’ इसके बाद उन्होंने जनता से बार-बार पूछा कि यह किसकी तस्वीर है? जनता ने जवाब दिया कि ‘बुद्ध’।

फिर ममता ने कहा, ‘‘जितनी ज्यादा आप झूठी बातें फैलाएंगे, उतना ही अधिक पोस्टर सामने आएंगे।’’

सोदपुर में भी प्रबल संभावना थी कि दीदी फिर माकपाइयों पर बरसेंगी। पर माकपाइयों को ज्यादा बोलने पर पोस्टर बनादेने की धमकी देने और जो चला गया, उसे भूलकर आगे चिटफंड में निवेश करने की सलाह देने के अलावा इस सिलसिले में उन्होंने कुछ खास नहीं कहा। सोदपुर में भी पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य समेत तमाम माकपाइयों और खासतौर पर उनके भतीजे अभिषेक के खिलाफ आरोप लगाने वाले गौतम देव के चिटफंड कंपनियों के साथ रिश्ते साबित करने के लिये उन्होंने तमाम कागजात और चित्र लहराये। बल्कि श्रोताओं को हैरत में डालते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें सीबीआई का डर न दिखाया जाये!

उन्होंने आखिर ऐसा क्या किया कर दिया है कि केंद्र उन्हें सीबीआई के मार्फत डरा सकती है, जबकि बंगाल ही नहीं पूरे देश में उनकी ईमानदारी की डंका बजती है?ममता ने कहा कि सीबीआई जांच की धमकी से हम डरने वाले नहीं,क्योंकि यूपीए तीसरी बार सत्ता में नहीं लौटेगी! हम यूपीए-1 और यूपीए-2 देख चुके हैं! चिट फंड मामले में सीबीआई जांच का तीखा विरोध कर रही ममता जब विपक्ष की नेता थी तब वह हर मामले में सीबीआई जांच की मांग करती रहती थीं। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग को “राजनैतिक षडयंत्र” बताते हुए कहा कि कांग्रेस और सीपीएम जांच के नाम पर उनकी सरकार को बदनाम करना चाहती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीपीएम और कांग्रेस एक बार फिर साथ हो गए हैं. दोनों पार्टियां मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ झूठी अफवाहें फैला रही हैं।मालूम हो कि असम और तरिपुरा सरकारों ने चिटफंड कांड की सीबीआई जांच की मांग की है। सीबीआई ने तो गुवाहाटी में काम भी शुरु कर दिया है। सीबीआई पूर्वोत्तर में राजनीति में अरुणाचल से लेकर असम तक चिठफंड के पैसों की भूमिका की बी जांच कर रही है। इस सिलसिले में याद रखने वाली बात है कि त्रिपुरा में आखिरी वक्त पर न लड़ने के फैसले के बावजूद  असम और  अरुणाचल समेत पूरे पूर्वोत्तर में तृणमूल कांग्रेस को भारी चुनावी कामयाबी मिली है।

केंद्र व माकपा पर तृणमूल सरकार के खिलाफ षड़यंत्र रचने का आरोप लगाते हुए ममता ने कहा कि केंद्र सरकार माकपा को शासन चलाने के लिए काफी धन देती थी जबकि तृणमूल को कर्ज लेने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।सरबजीत सिंह के मामले पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पोस्टमार्टम के दौरान सरबजीत के कई अंग नदारद पाए गए हैं। जबकि केंद्र इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। केंद्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है। अब यूपीए-3 का सत्ता में आना असंभव है।

फिर उन्होंने बंगाल की तरह केंद्र में भी परिवर्तन का आह्वान किया। बेहतर होता कि यह आह्वान वे दिल्ली से करतीं , जहां से पूरा देश उन्हें सुनता। पिछले सप्ताह इसी मैदान में माकपा ने जनसभा की थी। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य एवं उत्तर 24 परगना माकपा जिला कमेटी के सचिव गौतम देव ने तृणमूल सरकार में शामिल मंत्री व नेताओं पर चिट फंड कंपनियों के साथ संबंध होने का आरोप लगाया था। सोदपुर में लोग उनसे चिटफंड फर्जीवाड़ा से लुट चुके लोगों के पैसा लौटाने के बारे में उनके कदमों के बारे में सुनना चाहते थे पर पूर्ववर्ती माकपा सरकार , केंद्र सरकार और केंद्रीय एजंसियों को कोसने के अलावा उन्होंने कुछ कहा नहीं। बल्कि केंद्र में तीसरी यूपीए सरकार किसी भी हाल में न बनें, इसके लिए उत्तर चौबीस परगना के इस पालिका शहर के मंच का उन्होंने खूब इस्तेमाल किया।खुद को जनता का प्रहरी करार देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यदि राज्य में मां,माटी,मानुष सही नहीं रही तो मैं चैन से नहीं सो पाऊंगी। जनता के हितों की रक्षा के लिए सरकार सजग है।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि माकपा ने अपने 34 वर्षों के शासन में करोड़ों रुपये की चल और अचल संपत्ति बनाई है और ऐलान कर दिया कि राजनीतिक दलों की बेनामी संपत्ति का पता लगाने के लिये जांच करायी जायेगी। कहा, ‘‘माकपा ने हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति इकट्ठा की है। संपत्ति के लिहाज से माकपा अब कांग्रेस और भाजपा के करीब है।’’उन्होंने दावा किया कि अगर तृणमूल कांग्रेस सत्ता में नहीं आती तो और भी ज्यादा निवेशक चिटफंड कंपनियों के धोखाधड़ी के शिकार होते।चिटफंड कंपनियों की जड़ वामो सरकार है। अस्सी के दशक में ही यह कंपनियां फली-फूली हैं। तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने पर इन कंपनियों का पर्दाफाश हुआ है। उन्होंने कहा कि माकपा नेता खुद को फंसता देखकर तृणमूल के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। माकपा नेता इस दुष्प्रचार से बचें अन्यथा चिट फंड कंपनियों के साथ उनकी मिलीभगत की पोस्टर छपवा दूंगी।एक चिट फंड कंपनी के अधिकारियों के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की समाचार पत्र में छपी तस्वीर को दिखाते हुए ममता ने माकपा को अपनी हरकतों से बाज आने की नसीहत दी।

क्या दीदी अंदर बाहर दोनों तरफ से घिरकर चिटफंड संकट के मुकाबले के लिए अब केंद्र का तख्ता ही पलट देंगी?

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.