/पहले पानी की बेचारगी, अब पानी बेचारा…

पहले पानी की बेचारगी, अब पानी बेचारा…

बाड़मेर में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने किया औचक निरीक्षण..पानी की बर्बादी करने वालों के काटे  जा सकते हैं कनेक्शन…पानी बचाना ही होगा…रहीमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून….

-अशोक राजपुरोहित||

बाड़मेर, पानी की एक एक बूंद को तरसने वाले बाड़मेर में पानी की बेचारगी बरसो तक रही लेकिन सरकार  द्वारा हिमालय का मीठा  पानी  पहुचाने के बाद बाड़मेर के कई इलाको में इस बहुमूल्य पानी की कद्र करना तक लोग भूल गये है और यही वजह है कि आज हर रोज पानी खुद को बेचारा महसूस कर रहा है .03

शहर में बढ़ रही पानी की बेकद्री से परेशां होने के बाद जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने मंगलवार सुबह शहर के कई इलाजो में निरक्षण किया और पानी को व्यर्थ बहा  रहे लोगो को इस बात के लिए समझाया की पानी आज भी कीमती है . जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिक्षण अभियंता ओ पी व्यास  ने बताया की बाड़मेर में पानी हमेसा से लोगो के लिए चुनोती रहा है लेकिन सरकार  द्वारा बाड़मेर लिफ्ट पेयजल परियोजना के प्रथम  चरण के पूरा होने के बाद शहर में शुरू किये गए नहरी पानी के वितरण के बाद कई जगहों पर लोगो ने इस पानी को व्यर्थ बहाना  शुरू कर दिया है जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को इस बात की जानकारी मिलने के बाद बाड़मेर शहर के लिए वरिष्ठ अभियंता महेश कुमार शर्मा  , कनिस्थ अभियंता आरती परिहार और सीसीडीयू के आई इ सी कंसल्टेंट अशोक सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में एक दल का गठन कर मंगलवार से कई  मोहल्लो में औचक निरीक्षण करवाया गया . मंगलवार को खगाल मोहल्ला , जीनगर  मोहल्ला , नियो का वास , अग्रवाल मोह्हला , महेश्वरी भवन की गली में करवाए गये इस निरक्षण में कई जगहों पर लोगो द्वारा घरेलू कनेक्शनों के पानी को बेवजह बहाने की चौकाने वाली स्थिति देखने को मिली . इन इलाको के अस्सी फीसदी उपभोक्ताओ ने अपने कनेक्शनों के नल तक नही लगा रखे है . और यह पर हर रोज हजारो लीटर पानी को बर्बाद किया जा सकता है जिसे बेहद आसानी से बचाया जा सकता है .

मीठा  पानी गाड़ी से गटर तक 

05खारे  पानी से अपना हलक बरसो तक तर करने वाले बाड़मेर के कई इलाको के बाशिंदे इन दिनों हिमालय के मीठे पानी से अपने गाड़िया धो रहे है इतना ही नहीं कई घरो के रहवासी इस पानी की सप्लाई शुरू होते ही पाईप गटर में डाल कर उसे व्यर्थ बहा रहे है . मंगलवार को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग विभाग के निरक्षण में यह बाद सामने आई की लोगो अपने घरो में टांके  भरे होने के बावजूद पानी को व्यर्थ बहा रहे है. कई जगहों पर लोगो को इस पानी से मकान की तराई करते तो कुछ जगहों पर अपने आम रास्ते झाड़ू के बजाये पानी साफ़ करते हुए पाया गया.

काटे जाएँगे कई कनेक्शन

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की तर्ज पर बाड़मेर में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भी 04पानी बचाने के नारे को बुलन्द कर रहा है और इस बात के खिलाफ चल रहे कई उपभोक्ताओं के नल कनेक्शन काटे  जा सकते हैं. जानकरी के मुताबित जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के इन औचक निरीक्षणो के दौरान पहले लोगो को सौ – सौ रुपये का जुर्माना भरवाया जायेगा और पानी को सबसे ज्यादा बेकद्री का शिकार बना रहे उपभोक्ताओं के कनेक्शन हमेशा हमेशा के लिए काटे  भी जा सकते है. इस कार्यवाही के पीछे पानी के महत्व को बरकरार रखने के साथ साथ उसकी दुनिया में सीमित उपलब्धता बताया जा रहा है.

जारी  रहेगा यह अभियान

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा मंगलवार को शुरू किया गया पानी बचाओ का अभियान औचक निरीक्षण के रूप में आने वाले कई दिनों तक जारी रहेगा. इसी अभियान के दोरान पानी को व्यर्थ बहाने वाले लोगो की सूचि बनाने का काम मंगलवार से ही शुरू कर दिया है और इनम लोगो को इसी सप्ताह के अंदर -अंदर नोटिस जारी किये जाएँगे. साथ ही जिन मोहल्लो का निरीक्षण कर लिया गया है वहां पर भी किसी भी दिन फिर से निरीक्षण किया जा सकता है .

सौ रूपये के नल के पीछे हजारों की बर्बादी  

01बाड़मेर के कई वार्डों  और इलाको में लोग पानी को व्यर्थ महज इस लिए बहा रहे है क्योंकि वे लोग सौ रुपये का नल भी खरीदना नही चाहते. जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की औचक निरीक्षण के दौरान अस्सी फीसदी उपभोक्ताओ के नल नही लगे हुए थे और यही कारण था कि उन्होंने अपने कनेक्शन के पाइप को नाली, सड़क और अपने स्नान घर में लगा रखा था जिससे हर रोज हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है .

दी जल बचत की जानकारी

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के इस अभियान के दौरान सीसीडीयू के आईईसी अनुभाग द्वारा लोगो को जल बचत की जानकारी भी प्रदान की गयी . लोगो को पानी की कीमत को समझाने के लिए उनसे विचार विमर्श भी किया गया . लोगो को इस बात पर तफसील से जानकारी पर्दान की गई हिमालय के इस पानी ने बाड़मेर तक जितना लम्बा सफ़र तय किया है उतना की पानी के लिए यह के बाशिंदे तरसे है . इस पानी के थार की धरा पर पहुचने के बाद पानी की यह बेकद्री बाड़मेर के बाशिंदों के लिए ही आने वाले कल में चुनौती बन सकती है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.