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सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर आपत्तिजनक टिप्पणी में गिरफ्तारी से पहले इजाजत जरूरी…

By   /  May 16, 2013  /  1 Comment

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सोशल नेटवर्किंग साइट पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66ए के तहत किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी की अनुमति लेनी आवश्यक होगी. सुप्रीम कोर्ट के जज बी एस चौहान और जज दीपक मिश्रा की अवकाश पीठ ने श्रेया सिंघल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.facebook-testing-new-timeline-format-with-single-column-of-posts-updated--8395815038

श्रेया ने कार्यकर्ता जया विंध्यालय की गिरफ्तारी के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी. उन्हें आंध्र प्रदेश के एक विधायक की शिकायत पर आईटी अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था.
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबरटीज की कार्यकर्ता जया पर अपने फेसबुक टाइमलाइन में चिराला के विधायक अमांची कृष्णा मोहन और तमिलनाडु के राज्यपाल के रोसैया के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी लिखने का आरोप है. पुलिस ने जया के खिलाफ आईटी अधिनियम की धारा 66ए और भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (षड्यंत्र) लगाई थी.

कोर्ट का आदेश अतिरिक्त महाधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा द्वारा कोर्ट को यह बताए जाने के बाद आया कि केंद्र सरकार ने आईटी अधिनियम की धारा 66ए के तहत दर्ज होने वाली शिकायतों पर पुलिस की कार्रवाई से पहले प्रक्रियाओं को लेकर इस साल नौ जून को राज्यों को परामर्श जारी किया था. आईटी अधिनियम की धारा 66ए संचार सेवा के माध्यम से ऐसे संदेश भेजे जाने पर दंडात्मक प्रावधान से संबंधित है, जिससे लोगों को असुविधा, गुस्सा, खीझ, अपमान आदि अनुभव हों या ये संदेश बुरी नीयत अथवा नफरत से भेजे गए हों.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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