फ्लिपकार्ट पर खुले आम मची है ग्राहकों से लूट…

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फ्लिपकार्ट जैसी प्रसिद्ध वेबसाईट का पतन शुरू हो चुका है तथा सभी नैतिकताओं को तिलांजली देकर फ्लिपकार्ट येन केन प्रकारेण ग्राहकों की जेब से पैसा निकालने में जुट गई है. हालात इतने बदतर हैं कि जो उत्पाद फ्लिपकार्ट के गोदाम में ही नहीं है और उसका सप्लायर आठ से दस दिन तक उत्पाद सप्लाई नहीं कर सकता, उस उत्पाद को भी अपने पोर्टल पर उपलब्ध बता कर ग्राहकों से पैसे वसूल करने में लगी है. इसी का परिणाम है कि पिछले दो दिनों में ही फ्लिपकार्ट का ट्रैफिक आधा रह गया है.

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गौरतलब है कि किताबें बेचने से शुरू हुई फ्लिपकार्ट ने भारत के इ-कॉमर्स बाज़ार के बड़े हिस्से पर अपना कब्ज़ा जमा लिया था मगर फ्लिपकार्ट के मालिकों द्वारा ज्यादा कमाई के लालच ने फ्लिपकार्ट को चड्डी बनियान से लेकर कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इत्यादि बेचने की दुकान बना दिया. यहीं से शुरू होती है फ्लिपकार्ट के पतन की कहानी.

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पोर्टल पर उपलब्ध मगर फ्लिपकार्ट के स्टॉक में नहीं

जब मीडिया दरबार के पास फ्लिपकार्ट पर हो रही मनमानियों और बाज़ार भाव से अधिक कीमत पर सामान बेचे जाने की शिकायतें आयीं तो हमें यकायक विश्वास ही नहीं हुआ मगर जब हमने इसकी वास्तविकता जानने के लिए खुद फ्लिपकार्ट से करीब चौदह हज़ार रुपये की खरीददारी की तो हमारी आंखे फटी रह गई. फ्लिपकार्ट से जो सामान खरीदा गया, वह उनके स्टॉक में ही नहीं था और हमें फोन करने पर बताया गया कि आपके द्वारा खरीदे गये सामान का इंतजाम फ्लिपकार्ट सप्लायर से आठ से दस दिन में कर के भेज देगा. जबकि फ्लिपकार्ट के पोर्टल पर यह सामान उपलब्ध बताया गया है और इनमें से कुछ उत्पाद तो वेबसाईट पर फीचर्ड श्रेणी में रखे गए हैं.

यही नहीं जब हमने फ्लिपकार्ट के ग्राहक सेवा केंद्र पर फोन पर इस विषय में बात की तो वहां भी बड़े गैरजिम्मेदाराना ढंग से जवाब मिला और पैसा वापिस करने के लिए भी सात-आठ दिन की बात कही. जब हमने ग्राहक सेवा प्रतिनिधि से तुरंत पैसा वापिस करने को कहा तो बारम्बार ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बदलने लगे. यानि हर बार अपनी व्यथा नए सिरे से सुनाओ फिर भी ढ़ाक के तीन पात.

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पोर्टल पर उपलब्ध मगर फ्लिपकार्ट के स्टॉक में नहीं..

गौरतलब है कि फ्लिपकार्ट ने पिछले दिनों माइक्रोमैक्स द्वारा लांच किये गए कैनवास A116 HD मॉडल को भी अधिकतम मूल्य से पंद्रह सौ रुपये ज्यादा पर बेच कर देश के कानून की धज्जियां उड़ाने में भी कोई कसर बाकी नहीं रखी.

खबर यह भी है कि फ्लिपकार्ट की माली हालत दिनों-दिन पतली होती जा रही है, जिसके चलते पिछले दिनों फ्लिपकार्ट ने अपने अढाई सौ से ज्यादा कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. सुनने में यह भी आया है कि इनमें से अधिकांश कर्मचारियों ने कम्पनी के लिए अपनी नैतिकता को तिलांजलि देने से इनकार कर दिया था.

गौरतलब है कि भारत में ऑनलाइन खरीदारी का शैशवकाल चल रहा है और इस शैशवकाल में ही फ्लिपकार्ट जैसी कम्पनियां अपने ग्राहकों से अधिक मूल्य वसूली और धोखाधड़ी कर ग्राहकों का विश्वास डगमगा रहीं हैं. यदि समय रहते इन धंधेबाजों की कुटिलताओं से ग्राहकों को बचाया नहीं गया तो ऑनलाइन बाज़ार पनपने से पहले ही काल कलवित हो सकता है.

फ्लिपकार्ट ने अपने ग्राहकों की समस्यायों के निदान के लिए फेसबुक पर एक पेज बना रखा है और पेशेवरों की एक टीम इस पेज का संचालन करती है.

यह पेज अठारह लाख लोगों ने लाइक कर रखा है. 

फ्लिपकार्ट से ठोकर खाए ऑनलाइन ग्राहक इस पेज पर अपने साथ बीत रही से निजात पाने की गुहार करते रहतें हैं मगर उन्हें मिलता है सिर्फ रटा रटाया जवाब…

अधिकतम मूल्य से भी कहीं ज्यादा मूल्य वसूल कर रही है flipkart….   

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. sharad goel on

    भारत देश में इमानदार वाही व्यक्ति हे ,जिसे बेईमानी करने का मौका नहीं मिला , मौका मिलते ही चोरी शुरू ………..
    में भी एक बार छोटी सी चीज के लिए ऑनलाइन सोप्पिंग में फंस चूका हूँ,,,,,,,,,,,
    केवल कम्पनी से सीधे खरीदारी करने में ही समझदारी हे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
    ई शौपिंग ,,मतलब खराब माल ,,,और लूट ………………….

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