/क्रिकेटरों को फंसाने के लिए मॉडल्स सप्लाई करता था विन्दू..

क्रिकेटरों को फंसाने के लिए मॉडल्स सप्लाई करता था विन्दू..

मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम स्पॉट फिक्सिंग की जांच में नए-नए राज फ़ाश कर रही है. क्रिकेट की सट्टेबाजी में फंसे विंदू दारा सिंह को लेकर कई चौंकाने वाले राज सामने आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक विंदू सेक्स रैकेट से भी जुड़ा हुआ था. वो क्रिकेटरों को फंसाने के लिए हाई-फाई मॉडल्स को इनके पास भेजता था.fhm-models-night-out_023

सूत्रों के अनुसार क्राइम ब्रांच को एक होटल के सीसीटीवी फुटेज हाथ लगे हैं. इस फुटेज के आधार पर क्राइम ब्रांच ने जब पड़ताल की तो सनसनीखेज राज बेनकाब हुए. मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच का दावा है कि विंदू दारा सिंह स्पॉट फिक्सिंग के लिए सेक्स रैकेट से भी जुड़ा था. विंदू मॉडल्स की सप्लाई करता था और बदले में इन्हें मोटी रकम देता था.

मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक विन्दु दारासिंह क्रिकेटरों या अंपायर को खुश करने के लिए इनके पास मॉडल्स भेजता था. इसके लिए मॉडल्स को मोटी रकम अदा की जाती थी. इन्हें एक रात के लिए एक लाख रुपये तक देता था विंदू. सूत्रों की मानें तो ऐसी ही दो मॉडल्स के सीसीटीवी फुटेज मुंबई क्राइम ब्रांच के हाथ लगे हैं. बताया जा रहा है कि ये फुटेज जुहू के नोवेटेल होटल के हैं. इसी होटल में बुकी पवन जयपुर ठहरा हुआ था. बता दें कि विंदू ने अपने खास दोस्त पवन और उसके भाई संजय को दुबई भगा दिया था.

क्राइम ब्रांच सूत्रों का ये भी कहना है कि ये दोनों मॉडल फिलहाल मुंबई में लोखंडवाला कॉम्पलेक्स में रहती हैं. क्राइम ब्रांच ने दोनों से पूछताछ की है. बताया ये भी जा रहा है कि विंदू पाकिस्तानी अंपायर असद रऊफ को भी मॉडल्स भिजवाता था. विंदू दारा सिंह जयपुर के कुख्यात सटोरियों पवन और संजय के जरिए असद रऊफ के संपर्क में आया था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.