/नहर का दूषित पानी पीने से बाड़मेर बीमार, उलटी दस्त का कहर

नहर का दूषित पानी पीने से बाड़मेर बीमार, उलटी दस्त का कहर

-चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर सरहदी जिला मुख्यालय  पर इंदिरा गांधी नहर का दूषित पानी जलदाय विभाग द्वारा आपूर्ति करने से बाड़मेर शहर में डायरिया का कहर टूट पडा हें. जिन जिन मोहल्लो में नहर का  पानी आपूर्ति किया जा रहा हें उन्ही मोहल्लो से डायरिया के मरीज बड़ी तादाद में अस्पताल पहुँच रहे हें . यह सिलसिला लगभग एक सप्ताह से चल रहा हें इतनी बड़ी तादाद में उलटी , दस्त के मरीज आते देख अस्पताल प्रशासन भी हैरान हें .indira gandhi nahar

प्रमुख चिकित्सा अधिकारी में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बाड़मेर को शहर में आपूर्ति किये जा रहे नहरी पानी के सैम्पल लेने के लिए कहा हें .बाड़मेर शहर को नहर का मीठा पानी पिलाने का वर्षों से राजनीतिग्य सपना दिखा रहे थे जो इस साल पूरा हुआ .शुरू शुरू में नहर का पानी फ़िल्टर होकर आ रहा था मगर गत दो सप्ताह से ट्रीटमेंट प्लांट ख़राब हो जाने के कारन नहर का दूषित पानी सीधे ही आपूर्ति किया जा रहा हें .मोहनगढ़ से लिफ्ट कर नहर से लाये जा रहे इस दूषित पानी ने पिछले दो सप्ताह से कहर ढा रखा हें .दो सप्ताह से जिस जिस दिन जिन जिन मोहालो में पानी सप्लाई किया उसी मोहल्ले के लोग बड़ी तादाद में उलटी दस्त के शिकार होकर अस्पताल पहुँचाने लगे .शुरूआती दिनों में अस्पताल प्रशासन से इसे गर्मी जनित बीमारिया मान गंभीरता से नहीं लिया मगर गत पांच दिनों से एकाएक मरीजो की तादाद कई गुणा बढ़ जाने से राजकीय अस्पताल प्रशासन ने इस पर गंभीरता से मंथन किया तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया की जलदाय  विभाग द्वारा सप्लाई किया जा रहा नहर का पानी पीने के बाद लोगो को उलटी दस्त की शिकायत शुरू हो रही हें .चिकित्सक आश्चर्य में हें की मरीजो को प्रयाप्त उपचार के बाद भी राहत नहीं मिल रही .अस्पताल में पिछले एक एक सप्ताह से उलटी दस्त के मरीज भर्ती हें वो ठीक नहीं हो रहे .अस्पताल में प्रतिदिन तीन से चार दर्जन उलटी दस्त के मरीज पहुँच रहे हें .ग्रामीण इलाको से भी मरीजों का आना जरी हें .मरीजो की तादाद के अनुरूप अस्पताल में बिस्तर नहीं हें .अस्पताल भर्ती में उलटी दस्त का शिकार मरीज भगाराम पंवार ने  की पांच दिन पहले मोहल्ले में नहर का पानी सप्लाई हुआ था उस दिन पानी का स्वाद अजीब सा था .पानी पीने के बाद पेट में गड़बड़ शुरू हो गई .बाद में स्थति ख़राब होने पर अस्पताल आ गया तो मुझे भर्ती कर उपचार शुरू किया आज पांच दिनों से अस्पताल में उपचार करा रहा हूँ मगर कोई फर्क नज़ेर नहीं आ रहा ,नहर के पानी में बैक्टीरिया इतने घटक हें की उन पर दवाईयों का कोई असर नहीं हो रहा .नेहरु नगर निवासी रमेश सिंध पिछले दस दिनों से उलटी दस्त का शिकार हें अब तक तीन प्रमुख चिकित्सको से उपचार करा चुका हें मगर उन्हें कोई आराम नहीं मिला .उन्होंने बताया की नहर का पानी बहूत गंदा और दूषित आ रहा हें .पानी फ़िल्टर होकर आने की बाजार दूषित पानी सप्लाई करने से उलटी दस्त की शिकायतें निरंतर आ रही हें ,मेरे मोहल्ले में कई लोग उलटी दस्त के शिकार हें ,इधर राज्कित अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी हेमंत सिंघल ने बताया की अस्पताल में नहर का दूषित पानी पीने के बाद उलटी दस्त का शिकार मरीज बड़ी तादाद में आ रहें हें .शुरू में तो हमने इसे गर्मी जनित बिमारी मान उपचार किया मगर मरीजो पर दवाईयों का असर नहीं होते देख इस पर मंथन किया तो सामने आ या की नहर का दूषित पानी पीने से लोग उलटी दस्त का शिकार हो रहे हें हमने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बाड़मेर को जलदाय विभाग द्वारा सप्लाई किये जा रहे नहरी पानी के सैम्पल लेने का कहा हें वही राज्य सरकार को भी नहर का पानी ट्रीट करके सप्लाई करने का लिखा हें .उन्होंने बताया की शहर के मरीज दूषित पानी का शिकार हो रहें हें .बहरहाल नहर का दूषित पानी कहर बरपा   रहा हें .जलदाय विभाग के सहायक अभियंता महेश शर्मा ने बताया की अस्पताल प्रशासन से हमने उलटी दस्त मरीजों की मोहला वार सूचि प्रतिदिन की ली हें .सर्वे टीम इन मोहलों में जाकर पानी के सेम्पल लेगी .रिपोर्ट आने के बाद कार्य वाही होगी

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.