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वरुण के बहाने मोदी को बचाना चाहती है भाजपा…

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-अनुराग मिश्रा||

आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर  की 80 लोकसभा सीटें किसी भी सियासी दल के लिए काफी महत्वपूर्ण है और यही वो कारण है कि सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी से लेकर भाजपा,कांग्रेस और बसपा  सभी दल यूपी में अपनी ताकत झोंके हुए है. अपनी चुनावी रणनीत को और मजबूती देने के लिए ही भाजपा ने अपने युवा फायर ब्रांड नेता वरुण गाँधी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बैठाया है. 

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भाजपा अध्यक्ष  राजनाथ सिंह ने वरुण गांधी के जरिए एक तीर से दो निशाने लगाने की कोशिश की है.

 राजनीति में कई बार तो तीसरा निशाना फोकट में भी लग जाता है. सो, वरुण गांधी को लाकर बीजेपी ने यह संदेश तो दिया है कि वह यूपी को ज्यादा अहमियत देने जा रही हैं. साथ ही, यह भी बताने की कोशिश की है कि बीजेपी अब युवा चेहरों को आगे बढ़ा रही है. यही कारण है  कि वरुण गाँधी लगातार यूपी में चुनावी रैली कर रहे है. 

narendra-modiदरअसल वरुण को आगे करके भाजपा ने यूपी में लोकसभा चुनावो को राहुल बनाम वरुण गांधी करने की तैयारी की है क्योकि भाजपा अच्छी तरीके से जानती है कि  यूपी में कांग्रेस के लिए एक मात्र युवा चेहरा राहुल गाँधी है जिनके ऊपर यूपी में कांग्रेस को जिताने का पूरा दारोमदार  है. ऐसे में यदि वरुण को चुनाव में एक युवा चेहरा बनाकर पेश किया जाये तो राहुल की काट निकलना आसान होगा. इतना ही नहीं वरुण गाँधी के रूप में भाजपा दो तरीके के वोट बैंक पर भी निशाना साधने की कोशिश कर रही है. पहला भाजपा वरुण गाँधी के माध्यम से गाँधी खानदान के परम्परागत वोट बैंक को भी अपने पाले में करने की फ़िराक में है. दूसरा ये कि  वरुण की पहचान कट्टर हिंदूवादी नेता के रूप में है इसलिए एक वर्ग विशेष का वोट बैंक भी भाजपा अपने पाले में कर ले जायेगी.

हालाँकि यह भी सही है कि वरुण को आगे करके भाजपा मीडिया द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बनाये गए मोदी बनाम राहुल के चक्र को तोड़ना चाहती है. भाजपा किसी कीमत पर नहीं चाहती है कि लोकसभा चुनाव मोदी बनाम राहुल हो. इसलिए लगातार ऐसी परिस्थिति बनायीं जा रही है कि  पूरे भारत में नहीं तो कम से कम उतर प्रदेश में तो लोकसभा चुनाव राहुल बनाम वरुण हो ताकि यदि चुनाव बाद पार्टी को हार का सामना करना पड़े तो मोदी की सर पर हार का ठीकरा कम से कम फूटे.

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About Author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. BJP Varun Gandhi ko ya Narendra Modi ko aage kare ,ye dono neta Rahul Gandhi ke opposit nahi ho sakte kyoki inme National leader ka meterial nahi hai.Rahul Gandhi ko kathin takkar sirf ek hi neta de sakte hai,wo hai Lal k. Adwani ji jinme Atalji ke bad Congess Party ko Congess ki nitiyo ke dwara prast karne ki chhamta hai.

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