/खाप पंचायत ने लगाया दस लाख का जुर्माना…

खाप पंचायत ने लगाया दस लाख का जुर्माना…

-सिकंदर शैख़ ||
….अपनी बेटी के लिए अच्छा  लड़का ढूढ़ कर उसके हाथ पीले करना हर बाबुल का सपना होता हें और ऐसे ही एक सपने को पूरा करने पर एक बाबुल को उसके नाते रिश्तेदारों के साथ समाज के ठेकेदारों ने समाज बदर का फरमान सुना दिया हें साथ ही पिता व भाई को जूतों की माला पहनाने,10 लाख का जुर्माना लगाने व् अपनी 2 और लड़कियों की शादी समाज में उनके कहे अनुसार करवाने का सनसनी खेज मामला सामने vlcsnap-2013-06-01-08h15m29s125आया है। लड़की के परिवार पर 10 लाख का जुर्माना लगाने  का व् बाकी मांगे नहीं मानने पर लड़की को जबरन उठा ले जानेका फरमान जारी किया है। इंसानियत को शर्मसार करने वाला यह मामला हें पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर जिले का है जहां अपनी मर्जी से अपनी बेटी की शादी करने पर लड़के और लड़की के परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया हें।
लोकतंत्र एवं कानूनों की बडी बडी किताबों में लिखी कानूनी लाईनों के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में परम्परागत तरीकों से हो रहे अत्याचारों पर अकुंश नहीं लग पा रहे हैं। जी हां समाज स्तर पर होने वाली पंचायती अब भी गरीब परिवारों के लिये शोषण का सबब बनी हुई है,  ऐसा ही एक मामला इन दिनों जैसलमेर जिले के बईया गांव में सामने आया है जिसमें बईया निवासी कृपाराम ने समाज के पंचों पर अत्याचार करने का आरोप लगाया है। कृपाराम के अनुसार पुत्री की सगाई पूर्व में सवाईराम निवासी भियाड़ से की गई थी। सवाईराम शराबी था जिसके चलते कृपाराम ने उसकी सगाई तोड़ दी और पुत्री अमकादेवी की शादी  उसकी मनमर्जी से चमाराम मेघवाल से कर दी। यह बात समाज के ठेकेदारों को नाग्वारा गुजरी इस पर कई गावो पंचायत बेठी, कृपाराम के अनुसार 27 मई को एक बार फिर रामा गांव में पंच इकट्ठे हुए और पंचायती शुरू की। तीन दिन तक चली पंचायती के बाद उसके परिवार पर 10 लाख रुपए का दंड लगाया गया और कृपाराम व उसके पुत्र को जूतों की माला भी पहनाई। कृपाराम के  अनुसार कि समाज के पंचों का कहना है कि उसकी शादीशुदा पुत्री की शादी पूर्व में जिस युवक से तय की गई थी उससे करवाए नहीं तो 10 लाख का दंड भरना होगा इसके अलावा उसे 2 और लड़कियों की शादी भियांड गाँव में उसी परिवार के लोगो से करवानी होगी अन्यथा उसका हुक्का पानी हमेशा के लिए बंद करवा दिया जाएगा .khanp
कृपाराम की बेटी अमकादेवी के अनुसार समाज के ठेकेदारों ने परिवारों का हुक्का पानी बंद कर दिया उसके बाद इन परिवारों के साथ जानवरों जेसा सलूक किया गया पिता व भाई को जूतों की माला पहना दी गई इतने से  बात नहीं बनी तो इन मुर्गा बनाने के साथ ही गरीब परिवारों पर दस लाख का जुर्माना ठोक दिया गया है समाज के ठेकेदारों ने हमारा जीना दुर्भर कर दिया है अब तो पुलिस ही हमें न्याय दिला सकती है।
.जब पीड़ित पक्ष ने उस शराबी से अपनी लड़की की शादी नहीं करवा के चमाराम मेघवाल से करवाई तो इन पंचों ने चमाराम का भी हुक्का पानी बंद करवाने का फरमान जारी किया था तब चमाराम ने ढाई लाख रूपये का जुर्माना भरकर पंचों से वापिस समाज में शामिल होने की कीमत अदा करी थी ,जिसके बाद उसे वापिस समाज में तो ले लिया गया मगर उसके ससुराल वालों को परेशान करना चालू रखा तथा हद तो तब हो गयी जब समाज की पंचायती में उसके ससुर कृपा राम और उसके पुत्रों को दस लाख रूपये जुर्माना भरने, 2  लड़कियों की  शादी उसी गाँव में करवाने तथा जूते सर पर उठा कर पंचों से माफ़ी मांगने की बात कही गयी
यह पूरा मामला जब पुलिस के कप्तान के सामने आया तो जैसलमेर के एसपी पकंज चोधरी ने सांगड़ थाने में मामला दर्ज करने  के साथ ही पुलिस की टीम अब जातीय पंचो को ढूढने में लगा दी गई है, चोधरी के अनुसार किसी भी पंचो को इस तरह के फरमान सुनाने का अधिकार नहीं है तथा उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जायेगी.
एक तरफ जहा सरकार ओनर किलिग़ और खाप पंचायतो के तालिबानी हुक्मों से मानव अधिकारों के प्रति बढ़ रहे अपराधों पर नये कानून के जरिये समाज के ठेकेदारों  खिलाफ कड़े कदम उठाने की तैयारी में हें वही दूसरी तरफ इस तरह के फरमान हर कोशिश पर  तमाचा मारते नजर आते हें।
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.