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अखबार के दफ्तर में तिहरा हत्याकांड, अंधेरे में तीर चला रही है त्रिपुरा पुलिस!

By   /  May 21, 2013  /  No Comments

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-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||​

अगरतला में 19 मई को `दैनिक गणदूत’ के दफ्तर में तीन लोगों की हत्या के मामले में पुलिस अभी अंधेरे में तीर चला रही है। इस मामले में प्रगति यह है कि इस अभूतपूर्व हत्याकांड में अखबार के मालिक के मारे गये ड्राइवर की पत्नी नियति घोष को गिरफ्तार करके पुलिस उससे सघन पूछताछ कर रही है। इस महिला के पास पांच पांच कीमती मोबाइल फोन मिले हैं, जिनके जरिये पुलिस हत्यारों को पकड़ने की जुगत में है।पुलिस को शक है कि दैनिक अखबार के दफ्तर में एक साथ तीन तीन लोगों की हत्या के मामले में हत्यारों से इस महिला के संबंध हो सकते हैं। पूछताछ से ऐसे ही संकेत मिले हैं।पुलिस के तमाम अफसरान तिनके का सहारा पकड़ने की तरह इस महिला से पूछताछ में लगे हैं।ganadoot

लेकिन इस मामले में पेंच यह है कि बरामद मोबाइलों में से एक टच स्क्रीन मोबाइल का सिम गायब है। अब पुलिस आईईएम नंबर के जरिये काललिस्ट की खोज में है।अदालत से नियति घोष को पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

त्रिपुरा पुलिस ने बताया कि उन्होंने दैनिक गणदूत के संपादक के ड्राइवर दिवंगत बलराम घोष की पत्नी नियति घोष को गिरफ्तार किया है। ड्राइवर अखबार के कार्यालय के भीतर ही एक कमरे में रहता था। मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए दो लोगों ने पैलेस परिसर में दैनिक गणदूत के कार्यालय में घुसकर प्रूफ रीडर सुजीत भट्टाचार्य, ड्राइवर बलराम घोष और ऑफिस मैनेजर रंजीत चौधरी पर चाकू से वार किया।

पुलिस ने बताया कि विधवा को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह लगातार गुमराह करने वाला बयान दे रही थी।

इसके साथ ही इस मामले में यह पहली गिरफ्तारी है।

पुलिस ने बताया कि उसी परिसर में रहने वाले सुशील चौधरी घटना के वक्त कार्यालय में मौजूद था लेकिन उसने दावा किया है कि उसने कुछ नहीं देखा है

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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